Published: Monday, October 5, 2026, 11:15 [IST]
Indira Ekadashi 2026: पितृपक्ष में पूर्वजों के लिए श्राद्ध, तर्पण और दान करने की परंपरा है, लेकिन इस दौरान आने वाली इंदिरा एकादशी को खास माना जाता है। इस साल इंदिरा एकादशी का व्रत 6 अक्टूबर 2026, मंगलवार को रखा जाएगा। यह एकादशी भगवान विष्णु की पूजा के साथ पितरों के स्मरण से भी जुड़ी है।
धार्मिक मान्यता है कि इस दिन व्रत और भगवान विष्णु की पूजा करने के बाद पितरों के नाम से श्राद्ध, तर्पण और दान करने से उन्हें शांति मिलती है। यह भी मान्यता है कि इससे पितरों को पिशाच योनि और यमलोक के कष्टों से मुक्ति मिलने का मार्ग मिलता है। यही कारण है कि पितृपक्ष की इस एकादशी पर श्राद्ध करते समय पूजा के समय, भोजन और कुछ खास नियमों का ध्यान रखा जाता है।
कब है इंदिरा एकादशी?
पंचांग के अनुसार एकादशी तिथि 6 अक्टूबर को सुबह 2 बजकर 7 मिनट से शुरू होगी और 7 अक्टूबर को सुबह 00 बजकर 34 मिनट पर समाप्त होगी। उदया तिथि के अनुसार इंदिरा एकादशी का व्रत 6 अक्टूबर, मंगलवार को रखा जाएगा। पितृपक्ष की एकादशी से जुड़ा श्राद्ध कर्म भी इसी दिन किया जाएगा।
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श्राद्ध के लिए शुभ समय
इंदिरा एकादशी पर पितरों के लिए श्राद्ध और तर्पण करने के लिए दिन में अलग-अलग समय बताए गए हैं।
- कुतुप मुहूर्त: सुबह 11:46 बजे से दोपहर 12:33 बजे तक
- रौहिण मुहूर्त: दोपहर 12:33 बजे से 1:20 बजे तक
- अपराह्न काल: दोपहर 1:20 बजे से शाम 3:40 बजे तक
श्राद्ध कर्म में अपराह्न के समय का विशेष महत्व माना जाता है।
पितरों के लिए क्यों खास है यह एकादशी?
इंदिरा एकादशी भगवान विष्णु को समर्पित मानी जाती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन व्रत से मिलने वाला पुण्य पितरों को अर्पित करने से उन्हें सद्गति मिलने का मार्ग बनता है।
मान्यता यह भी है कि अगर किसी पूर्वज की आत्मा किसी कारण से निम्न योनि में हो या यमलोक में कष्ट भोग रही हो तो उसके नाम से इंदिरा एकादशी का व्रत, श्राद्ध और दान करना फलदायी माना जाता है। पितृपक्ष में आने की वजह से इस एकादशी का महत्व और बढ़ जाता है।
सुबह ऐसे करें शुरुआत
इंदिरा एकादशी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करने के बाद भगवान विष्णु का ध्यान करें और व्रत का संकल्प लें। इसके बाद घर के पूजा स्थल पर भगवान विष्णु की पूजा की जा सकती है। पूजा के बाद अपने पूर्वजों का स्मरण करते हुए उनके नाम से तर्पण, श्राद्ध और दान करने की परंपरा है। इन सभी कामों में साफ-सफाई और सात्विकता का विशेष ध्यान रखा जाता है।
श्राद्ध के भोजन में रखें ध्यान
पितरों के लिए बनाए जाने वाले भोजन को सात्विक रखना चाहिए। अपनी क्षमता के अनुसार ब्राह्मणों या जरूरतमंद लोगों को भोजन कराया जा सकता है। श्राद्ध की प्रक्रिया पूरी होने के बाद जरूरतमंद व्यक्ति को भोजन, कपड़े या अपनी क्षमता के अनुसार दूसरी जरूरी चीजें पितरों के नाम से दान करने की परंपरा भी है।
इन कामों से बचने की मान्यता
इंदिरा एकादशी और श्राद्ध के दौरान किसी व्यक्ति का अपमान या अनादर करने से बचने की सलाह दी जाती है। धार्मिक परंपराओं के अनुसार इस दिन बाल और नाखून काटना भी उचित नहीं माना जाता। मान्यता है कि श्रद्धा के साथ भगवान विष्णु की पूजा, व्रत और पितरों के नाम से किए गए दान-पुण्य से भगवान विष्णु की कृपा मिलती है और पूर्वजों के लिए मोक्ष का मार्ग बनता है। इसलिए 6 अक्टूबर को पूजा के साथ पितरों का स्मरण, तर्पण और अपनी क्षमता के अनुसार दान किया जाता है।
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