सागर30 मिनट पहलेलेखक: सुखेन्द्र मिश्रा
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पीएमश्री एक्सीलेंस कॉलेज के हाईटेक कोर्स कागजों में सिमटे, अतिथि विद्वानों के भरोसे पढ़ाई
मध्यप्रदेश में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP-2020) के तहत उच्च शिक्षा की तस्वीर बदलने के सरकारी दावे जमीनी हकीकत से कोसों दूर नजर आ रहे हैं। प्रदेश के 55 जिलों में खुले पीएमश्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस बिना किसी स्थायी तंत्र के सिर्फ पुराने संस्थानों का बोर्ड बदलकर चलाए जा रहे हैं।
दो साल पहले इनके शुभारंभ पर नए शैक्षणिक व गैर-शैक्षणिक पद सृजित करने की घोषणा हुई थी। विडंबना यह है कि दो साल बीतने के बाद भी वित्त और सामान्य प्रशासन विभाग से इन पदों को प्रशासनिक व वित्तीय स्वीकृति तक नहीं मिल सकी। नतीजतन, प्रदेशभर में 2,232 पदों पर भर्ती अटकी है और ये महत्वाकांक्षी संस्थान अटैचमेंट व अतिथि विद्वानों के सहारे सांसें गिन रहे हैं।
पीएम कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस, मुरैना के प्राचार्य ऋषिपाल सिंह का कहना है कि हमारे कॉलेज में 26 शैक्षणिक और 5 गैर-शैक्षणिक पद सृजित करने की घोषणा हुई थी, लेकिन अब तक प्रशासनिक स्वीकृति नहीं मिली। पोर्टल पर पद दर्ज न होने से न तो स्थायी भर्ती हो सकती है और न ही इन नए पदों पर अतिथि विद्वान रखे जा सकते हैं। पुराने स्वीकृत रिक्त पदों के विरुद्ध ही जैसे-तैसे अतिथि विद्वानों की व्यवस्था कर कक्षाएं चलाई जा रही हैं।
कागजों में सिमटे हाईटेक कोर्स, पढ़ाने वाले विशेषज्ञ ही नहीं पीएम कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस का मुख्य उद्देश्य छात्रों को सीधे रोजगारोन्मुखी शिक्षा से जोड़ना था। इसके लिए बीएससी (कृषि), आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), साइबर सुरक्षा, ड्रोन तकनीक, एविएशन मैनेजमेंट, डेटा एनालिसिस और जैविक खेती जैसे आधुनिक पाठ्यक्रम तय किए गए। हकीकत यह है कि इन विषयों के लिए जरूरी 1,845 शैक्षणिक पद अब तक सिर्फ फाइलों में दर्ज हैं। कॉलेजों को न तो विषय-विशेषज्ञ प्राध्यापक मिले और न ही तकनीकी लैब स्टाफ। आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर के अभाव में रोजगार का यह महत्वाकांक्षी मॉडल महज कागजी बनकर रह गया है।
तकनीकी कोर्स से विद्यार्थियों का मोहभंग, सामान्य कॉलेज भी बेपटरी सीटें खाली: स्थायी फैकल्टी न होने से छात्रों का भरोसा घटा है। अकेले मुरैना एक्सीलेंस कॉलेज की 1,400 सीटों में से तकनीकी कोर्स की करीब 300 सीटें इस सत्र में खाली रह गईं। अटैचमेंट का नुकसान: इन संस्थानों को संभालने के लिए सामान्य कॉलेजों से प्रोफेसरों को अटैच किया गया, जिससे मूल कॉलेजों की नियमित व्यवस्था भी बिगड़ गई और वे भी पूरी तरह अतिथि शिक्षकों पर निर्भर हो गए।
भर्ती में तीन साल का गैप 2,232 पदों की फाइल अभी भी शासन स्तर पर लंबित है। यदि आज मंजूरी मिल भी जाए, तो एमपीपीएसी चयन प्रक्रिया पूरी करने में कम से कम 2 से 3 साल लगेंगे। यानी पहला बैच बिना किसी नियमित प्रोफेसर के ही डिग्री लेकर बाहर निकल जाएगा। घोषणा के उलट परीक्षा सेंटर बने: इन कॉलेजों को परीक्षा केंद्र न बनाने की बात कही गई थी ताकि शिक्षण कार्य न रुके, लेकिन मुरैना सहित अधिकांश कॉलेजों में विवि समेत बीएड, एमएड व एमबीए परीक्षाएं हो रही हैं। अधिकांश समय परीक्षाएं कराने में ही बीत रहा है।
पीएम एक्सीलेंस महाविद्यालयों में रिक्त पदों को भरने की प्रक्रिया जारी है। छात्रों की पढ़ाई प्रभावित न हो, इसके लिए दूसरे कॉलेजों से प्रोफेसर अटैच किए गए हैं। नए पदों के सृजन और भर्ती की प्रक्रिया भी जल्द पूरी की जाएगी। - इंदर सिंह परमार, उच्च शिक्षा मंत्री
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