नीब करोली बाबा का भोपाल से करीब 53 साल पुराना जुड़ाव सामने आया है। परिवार के दावे के मुताबिक बाबा के अस्थि कलश का एक हिस्सा 1973 से भोपाल में सुरक्षित है। अब परिवार मंदिर-आश्रम बनाकर अस्थि कलश श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए स्थापित करने की तैयारी में है।
नीब करोली बाबा 1970 में करीब 10 दिन भोपाल के अरेरा कॉलोनी स्थित परिवार के घर में रुके थे।
- Published: 14 Sep 2026, 02:18 PM IST
- Last Updated: 14 Sep 2026, 02:18 PM IST
भोपाल। नीब करोली बाबा का भोपाल से करीब 53 साल पुराना जुड़ाव अब एक मंदिर और आश्रम के रूप में श्रद्धालुओं के सामने आने की तैयारी में है।
परिवार के अनुसार, बाबा से जुड़ा अस्थि कलश 1973 से भोपाल में सुरक्षित रखा गया है। परिवार अब मंदिर-आश्रम बनाने की तैयारी कर रहा है, जहां इस अस्थि कलश को श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए स्थापित करने की योजना है।
परिवार के मुताबिक, नीब करोली बाबा वर्ष 1970 में करीब 10 दिन भोपाल में डॉ. धनंजय शर्मा के अरेरा कॉलोनी स्थित उनके घर पर रुके थे। इस दौरान उन्होंने नेवरी मंदिर में भी रात्रि विश्राम किया था। बाबा के भोपाल प्रवास की यादें आज भी परिवार के पास सुरक्षित हैं।
परिवार के दावे के मुताबिक 53 साल से सुरक्षित है अस्थि कलश
नीब करोली बाबा ने 11 सितंबर 1973 को वृंदावन में देह त्यागी थी। परिवार का दावा है कि बाबा के देह त्यागने के बाद उनकी अस्थियों का एक हिस्सा उनके बड़े बेटे अनेग सिंह भोपाल लेकर आए थे। तभी से अस्थि कलश को परिवार ने सुरक्षित रखा है।
परिवार के इस दावे की स्वतंत्र रूप से किसी आधिकारिक रिकॉर्ड से पुष्टि सामने नहीं आई है। हालांकि, परिवार लंबे समय से इस अस्थि कलश को बाबा की स्मृति और आस्था से जुड़ी निशानी के रूप में सुरक्षित रखने की बात कहता रहा है।
पोते को दी थी हनुमान जी की प्रतिमा
परिवार के सदस्य डॉ. धनंजय शर्मा के अनुसार, नीब करोली बाबा ने उन्हें हनुमान जी की एक प्रतिमा भी दी थी। परिवार इस प्रतिमा की नियमित पूजा करता है। बाबा के हनुमान भक्ति से जुड़े होने के कारण यह प्रतिमा भी परिवार के लिए विशेष धार्मिक महत्व रखती है।
परिवार के अनुसार, बाबा के भोपाल प्रवास से जुड़ी यादों और उनके द्वारा दी गई प्रतिमा को आज भी उसी श्रद्धा के साथ संभालकर रखा गया है।
भोपाल में बनेगा मंदिर-आश्रम
परिवार अब बाबा की स्मृति और उनसे जुड़ी धार्मिक विरासत को स्थायी रूप देने की तैयारी में है। इसके लिए मंदिर और आश्रम बनाने की योजना है। प्रस्तावित परिसर में अस्थि कलश को भी स्थापित किया जाएगा, ताकि बाबा के अनुयायी और श्रद्धालु यहां दर्शन कर सकें।
परिवार का कहना है कि इस स्थान को केवल मंदिर के रूप में नहीं, बल्कि नीब करोली बाबा की स्मृतियों और उनके आध्यात्मिक संदेश से जुड़े स्थान के रूप में विकसित करने की इच्छा है।
यह भी जानें
जानकारी विवरण
बाबा का भोपाल प्रवास 1970
भोपाल में ठहराव करीब 10 दिन
स्थान अरेरा कॉलोनी
रात्रि विश्राम नेवरी मंदिर
देह त्याग 11 सितंबर 1973, वृंदावन
भोपाल में अस्थि कलश परिवार के दावे के अनुसार 53 साल से सुरक्षित
हनुमान प्रतिमा डॉ. धनंजय शर्मा को बाबा ने दी
आगे की योजना मंदिर-आश्रम निर्माण और अस्थि कलश की स्थापना