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अनुग्रह नारायण शाही | देवरिया23 मिनट पहले
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देवरिया पुलिस ने 'ऑपरेशन Cy-Vazra' के तहत साइबर ठगी और डिजिटल करेंसी के माध्यम से मनी लॉन्ड्रिंग करने वाले एक संगठित गिरोह का पर्दाफाश किया है। गौरीबाजार थाना और साइबर क्राइम पुलिस की संयुक्त टीम ने शुक्रवार को चार आरोपियों को गिरफ्तार किया।
गिरफ्तार आरोपियों के कब्जे से 52 हजार रुपये नकद, दो पीओएस मशीनें, पांच एटीएम कार्ड, दो सिम कार्ड, तीन आधार कार्ड (एक ही नंबर पर अलग-अलग नाम से), बैंक की मुहर, पैन कार्ड और निर्वाचन कार्ड सहित कई आपत्तिजनक दस्तावेज बरामद किए गए हैं।
धनराशि की निकासी और ट्रांसफर की
पुलिस के अनुसार, यह कार्रवाई 3 अगस्त को दर्ज एक मुकदमे की जांच के दौरान की गई। पूछताछ में खुलासा हुआ कि यह गिरोह फर्जी दस्तावेजों, म्यूल बैंक खातों और विभिन्न ट्रेडिंग व क्रिप्टो ऐप का उपयोग कर साइबर ठगी की रकम को डिजिटल करेंसी में बदलता था। इसके बाद पीओएस मशीनों और बैंक खातों के जरिए धनराशि की निकासी और ट्रांसफर की जाती थी।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान साकेत नगर निवासी पवन वर्मा, शुभम सिंह, लाहिलपार निवासी सैफ अंसारी और आदर्श नगर निवासी रोशन वर्मा के रूप में हुई है। पुलिस की पूछताछ में इसराफिल, निखिल मणि त्रिपाठी, विशाल, शुभम मणि, वारिश वर्मा और असलान उर्फ इरफान सहित कई अन्य लोगों की भूमिका भी सामने आई है।
इस मामले में कुल 23 आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं के साथ-साथ आईटी एक्ट की धारा 66-सी और 66-डी के तहत केस दर्ज किया है। आगे की जांच जारी है और अधिकारियों का कहना है कि गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश की जा रही है।
बैंक खातों में ट्रांसफर कराता
साइबर ठगी से जुड़े पूरे नेटवर्क की भी गहनता से जांच की जा रही है। म्यूल खातों के जरिए होता था साइबर ठगी का खेल पुलिस जांच में सामने आया कि गिरोह साइबर ठगी से प्राप्त धनराशि को सीधे अपने खातों में न लेकर पहले म्यूल बैंक खातों में ट्रांसफर कराता था।
इसके लिए दूसरे लोगों के आधार कार्ड, पैन कार्ड और सिम का इस्तेमाल कर खाते एवं डिजिटल वॉलेट बनाए जाते थे। इसके बाद बाइनेन्स, टीजी एक्सचेंज और आईपे जैसे प्लेटफॉर्म पर डिजिटल करेंसी खरीदी जाती थी। इस पूरी प्रक्रिया के जरिए ठगी के पैसे का स्रोत छिपाकर उसे वैध दिखाने का प्रयास किया जाता था।
पुलिस का कहना है कि यह गिरोह लंबे समय से इस तरीके से साइबर अपराध को अंजाम दे रहा था। पुलिस ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों के पास से दो पीओएस मशीन, बैंक की मुहर, कई एटीएम कार्ड और एक ही नंबर वाले अलग-अलग नाम के आधार कार्ड बरामद हुए हैं।
जांच में सामने आया कि इन उपकरणों का उपयोग साइबर ठगी की रकम को अलग-अलग खातों से निकालने और ट्रांसफर करने में किया जाता था। गिरोह डिजिटल करेंसी बेचकर प्राप्त धन को नकद में बदलता था। पुलिस अब बरामद दस्तावेजों और बैंक खातों की जांच कर यह पता लगा रही है कि इस नेटवर्क से कितनी रकम का लेन-देन हुआ और इसमें अन्य किन लोगों की भूमिका रही।
23 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज
पूछताछ के दौरान पुलिस को गिरोह के कई अन्य सदस्यों की जानकारी मिली। इसके आधार पर पवन वर्मा समेत कुल 23 लोगों के खिलाफ गौरीबाजार थाने में मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस के अनुसार, अलग-अलग सदस्य म्यूल खाते उपलब्ध कराने, डिजिटल करेंसी खरीदने-बेचने, नकदी निकालने और लेयरिंग का काम करते थे।
फिलहाल चार आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है, जबकि अन्य आरोपियों की तलाश में पुलिस लगातार दबिश दे रही है।
अधिकारियों का कहना है कि जांच के दौरान और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं। पुलिस ने बरामद किए नकदी, एटीएम कार्ड और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण कार्रवाई के दौरान पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 52 हजार रुपये नकद, पांच एटीएम कार्ड, दो सिम कार्ड, दो पीओएस मशीन, बैंक की मुहर, पैन कार्ड, निर्वाचन कार्ड और तीन आधार कार्ड बरामद किए।

पुलिस का कहना है कि बरामद सामग्री का उपयोग साइबर ठगी और फर्जी वित्तीय लेन-देन में किया जा रहा था। सभी दस्तावेजों और उपकरणों की फॉरेंसिक जांच कराई जाएगी ताकि इनके जरिए किए गए लेन-देन और अन्य मामलों का भी पता लगाया जा सके।
आरोपियों से पूछताछ जारी
पुलिस ने बरामद सामान को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है। क्षेत्राधिकारी सलेमपुर गौरव कुमार सिंह ने बताया कि शुरुआती जांच में सामने आया है कि गिरोह साइबर फ्रॉड की रकम को डिजिटल करेंसी में बदलकर अवैध लाभ कमा रहा था। गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ जारी है और उनके बैंक खातों, मोबाइल फोन तथा डिजिटल लेन-देन का विश्लेषण किया जा रहा है।
पुलिस अन्य राज्यों और जिलों से जुड़े संभावित लिंक की भी जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि साइबर अपराध में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा और पूरे नेटवर्क का खुलासा कर सभी आरोपियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
19 आरोपियों की तलाश जारी
देवरिया पुलिस साइबर ठगी और डिजिटल करेंसी के जरिए मनी लॉन्ड्रिंग करने वाले गिरोह के फरार 19 आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए लगातार दबिश दे रही है। पुलिस के अनुसार, अब तक चार आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि मुकदमे में नामजद अन्य 19 आरोपियों की तलाश जारी है।
पुलिस की टीमें संभावित ठिकानों पर छापेमारी कर रही हैं और उनके मोबाइल नंबर, बैंक खातों तथा डिजिटल ट्रांजेक्शन की भी जांच की जा रही है। साथ ही यह पता लगाया जा रहा है कि गिरोह का नेटवर्क किन-किन जिलों और राज्यों तक फैला हुआ है।
अधिकारियों का कहना है कि फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद साइबर ठगी के पूरे नेटवर्क और धन के लेन-देन से जुड़े कई और महत्वपूर्ण खुलासे होने की संभावना है। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि मामले में शामिल किसी भी आरोपी को बख्शा नहीं जाएगा और सभी के खिलाफ नियमानुसार कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
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