बिहार में इंश्योरेंस का पैसा हड़पने के लिए लोग खुद को ही नुकसान पहुंचा रहे हैं। एक रिटायर्ड टीचर ने खुद ही डकैती कराकर 5 करोड़ का क्लेम कर दिया। वहीं, एक पति-पत्नी ने दवा के स्टॉक को जलने दिया।
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संडे बिग स्टोरी में पढ़िए ऐसे फर्जीवाड़े की 3 कहानियां...और कैसे खुली पोल
केस-1ः न FIR कराई, न आग बुझाई... फिर भी ठोक दिया 5 करोड़ का क्लेम
पटना के सरकारी स्कूल से रिटायर्ड टीचर अनुज किशोर प्रसाद ने इंश्योरेंस कंपनी के पास दावा किया कि 18 अक्टूबर 2025 की रात उनके घर में डकैती हुई थी। 10-15 अपराधी घर में आए। उनके और उनकी पत्नी मीना कुमारी के साथ मारपीट की। फिर दोनों को एक कमरे में बन्द कर दिया। कीमती सामान लूट ले गए।
जाने से पहले तोड़फोड़ की। आग लगा दी। इससे वहां रखा साउंड सिस्टम, कैमरा, लाइट सेट और कॉस्ट्यूम जल गए। उन्होंने 5 करोड़ रुपए का इंश्योरेंस क्लेम किया। 2025 में ही इन्होंने इश्योरेंस कराया था।
पिछले साल हुए थे रिटायर
अनुज किशोर प्रसाद एक सरकारी टीचर रहे हैं। 30 मई 2025 को पटना सिटी के जालान स्कूल से रिटायर हुए। 2018 से पहले वो पटना सिटी में ही मारवाड़ी स्कूल के टीचर थे। पटना जिला में आने से पहले इनकी पोस्टिंग पूर्णिया और कटिहार जिले के स्कूलों में भी रही है।
- 2014 के पहले राष्ट्रपति के हाथों अवार्ड भी प्राप्त कर चुके हैं। मूल रूप से नालंदा के रहने वाले हैं। लेकिन, पटना के कुम्हरार के चाणक्य नगर में रहते हैं।
- 1995 से ये 'तेजस्वी स्वयंसेवी संस्थान' (NGO) चला रहे हैं। घर के एक हिस्से में इन्होंने ऑफिस बनाया था। इनका दावा था कि उसके अंदर NGO के लिए वीडियो शूट होता था। वहां उससे ही जुड़े कीमती सामान रखे थे।
कंपनी की पड़ताल में ताश के पत्तों की तरह ढहा झूठ
क्लेम के बाद इंश्योरेंस कंपनी ने जांच की, जिसमें सारे दावे झूठे निकले। जानिए, कंपनी का दावा…
- CCTV ने खोला राज: पड़ोस के CCTV खंगालने पर 10-15 डकैतों के बजाय सिर्फ 2 लोग आराम से बैग ले जाते दिखे। पड़ोसियों ने किसी भी डकैती या आगजनी से साफ इनकार किया।
- पुलिस और फायर ब्रिगेड बेखबर: अगमकुआं थाना की पुलिस और फायर ब्रिगेड से संपर्क करने पर खुलासा हुआ कि अनुज ने घटना की कोई लिखित या मौखिक सूचना दी ही नहीं थी।
- FSL जांच: दफ्तर की जांच में कई अलग-अलग जगहों पर आग लगाने की पुष्टि हुई और हाइड्रोकार्बन मिला। जले हुए सामान के अवशेष तक मौके से गायब थे।
- आपराधिक इतिहास : जांच के दौरान बीमा कंपनी को पता चला कि इस रिटायर्ड शिक्षक पर पहले से अगमकुआं और कदमकुआं थानों में रंगदारी और धोखाधड़ी के 4 क्रिमिनल केस (2023 और 2024 में) दर्ज हैं।
बयान बदलने, फर्जीवाड़ा रचने और झूठा क्लेम ठोकने के आरोप में 7 अप्रैल को अगमकुआं थाने में अनुज किशोर प्रसाद और उनकी संस्था के खिलाफ FIR दर्ज की गई, जिसकी जांच सब-इंस्पेक्टर अविनाश कुमार कर रहे हैं।

रिटायर्ड टीचर अनुज किशोर प्रसाद ने अपने इसी घर और ऑफिस में डकैती और जलाने का आरोप लगाया था। (घटना के बाद की फोटो)
केस-2ः 3.08 करोड़ का दावा फर्जी, पति-पत्नी पर FIR
17 मई 2026 की देर रात करीब ढाई बजे पटना के एसके पुरी थाने के बोरिंग रोड में एक बिल्डिंग में आग लगी। आग पहले फ्लोर पर लगी थी। जहां मेसर्स जीएस लेबोरेटरीज और मेसर्स एपी डिस्ट्रीब्यूटर नाम के दो फर्म चलते थे। दोनों फर्मों के मेडिसीन का स्टॉक एक ही जगह रहता था।
- मेसर्स जीएस लेबोरेटरीज के मालिक सचिन कुमार और मेसर्स एपी डिस्ट्रीब्यूटर की मालकिन पूजा शर्मा, दोनों पति-पत्नी हैं। दोनों की सूचना पर पहुंची फायर ब्रिगेड की टीम ने दो घंटे की मशक्कत के बाद आग बुझाई। इस दौरान स्टॉक में रखे मेडिसीन, दूसरे कीमती सामान जलकर राख हो गए।
- 18 मई 2026 को पुलिस, फायर ब्रिगेड के साथ ही जनरल इंश्योरेंस कंपनी के पास सचिन ने दावा किया कि शॉर्ट सर्किट से फर्म में आग लगी। इस वजह से दोनों फर्म को मिलाकर 3 करोड़ 8 लाख रुपए का नुकसान हुआ है। इसमें उनके फर्म का करीब 2 करोड़ और उनकी पत्नी के फर्म का करीब 1 करोड़ 8 लाख रुपए का नुकसान हुआ।
दरअसल, सचिन ने दोनों फर्म को मिलाकर 2 करोड़ 80 लाख रुपए की पॉलिसी ले रखी थी। पिछले दो साल से पॉलिसी को वो रिनुअल करा रहे थे।
सर्वेयर को संदिग्ध लगा मामला
क्लेम के बाद इंश्योरेंश कंपनी ने सर्वेयर को घटना स्थल पर जांच के लिए भेजा। उसकी जिम्मेवारी थी कि आग लगने की वजह पता करना। साथ ही हर नुकसान का सही आकलन कर कंपनी को बताना।
जांच के दौरान सर्वेयर को मामला संदिग्ध लगा। तब कंपनी ने केस को अपनी इन्वेस्टिगेशन टीम को फॉरवर्ड कर दिया।
दिल्ली से आई FSL रिपोर्ट ने खोल दी झूठ की पोल
इंश्योरेंस कंपनी भी घटना स्थल पर गई। मान्यता प्राप्त एक प्राइवेट फोरेंसिक साइंस लैब (FSL) की टीम को बुलाया। इंश्योरेंस कंपनी के असोसिएट मैनेजर ने बताया कि FSL टीम ने 'हाइड्रो कार्बन' का सैंपल कलेक्ट किया। साथ ही आग से जले बिजली के तार का भी सैंपल लिया। सैंपल दिल्ली भेजा गया। करीब 20 दिन बाद आई FSL रिपोर्ट ने सचिन के दावों की पोल खोल दी।
कंपनी का दावा- आग लगी नहीं, लगाई गई
- FSL की टीम ने आग से प्रभावित एरिया में लगे स्विच और बिजली के तार की जांच स्टीरियो माइक्रोस्कोप और दूसरे साइंटिफिक तरीके से की थी। दावा है कि जांच में किसी प्रकार का कोई आर्क बीड्स नहीं मिला। इलेक्ट्रिकल आर्किंग का कोई निशान नहीं मिला, बिजली के तार को बाहरी गर्मी से नुकसान पहुंचा और इलेक्ट्रिक शॉर्ट सर्किट से नहीं लगी थी।
- खिड़की के पास से 'हाइड्रो कार्बन' का मिलना, यह संकेत देता है कि वहां पर आग फैलाने के लिए केरोसीन या पेट्रोल का इस्तेमाल किया गया। इसके अवशेष का मिलना शॉर्ट सर्किट की वजह से अचानक लगने वाली इलेक्ट्रिकल आग से मैच नहीं करता है।
- सचिन ने कंपनी की टीम को बताया था कि आग लगने की सबसे पहली जानकारी देर रात 2:30 पर उनके मैनेजर रंजीत कुमार ने कॉल कर दी थी। पड़ताल हुई तो रंजीत के मोबाइल से मालिक सचिन को कॉल करने के कोई सबूत नहीं मिले। दोनों के बयान बार-बार बदलते रहे।
- आदित्य शर्मा फर्म का स्टॉक इंचार्ज होने के साथ ही सचिन और पूजा शर्मा का रिश्तेदार भी है। उसने दावा किया था कि आग लगने के दौरान उसे चोट लगी थी। एक पैर जल गया था। इलाज के लिए पटना के दो बड़े हॉस्पिटल में एडमिट रहा।
- लेकिन, कंपनी की इंवेस्टिगेशन टीम का दावा है कि उनकी जांच के दरम्यान वो सामने नहीं आया। करीब डेढ़ महीने बाद 1 जुलाई 2026 को वो सामने आया। लेकिन अपने घायल होने, पैर जलने का कोई फोटो-वीडियो या फिर दो प्राइवेट हॉस्पिटल में हुए इलाज से जुड़ा का कोई सबूत नहीं दिया।
5 अगस्त को इंश्योरेंस कंपनी के ब्रांच मैनेजर ने एसके पुरी थाने में सचिन और पूजा के खिलाफ नामजद कंप्लेन की। इस आधार पर पुलिस ने दोनों के खिलाफ FIR नंबर 285/26 दर्ज की है। मामले की जांच सब इंस्पेक्टर स्वाती कुमारी कर रही है।

सचिन और पूजा शर्मा की दवा का स्टाक अगलगी में जलकर खाक हो गया था। (घटना के बाद की फोटो)
सचिन ने कहा- FIR की कॉपी आने दीजिए
इस पूरे प्रकरण पर भास्कर ने सचिन से बात की। सचिन ने भास्कर को बताया कि आग शॉर्ट सर्किट से लगी थी। उनसे दूसरा सवाल पूछा गया कि इंश्योरेंस कंपनी ने आपके खिलाफ फर्जी क्लेम करने का केस दर्ज कराया है। इस पर उनका जवाब था कि FIR की कॉपी आने दीजिए। फिर बात करेंगे।
केस-3ः बुलेट से ली जान, इंश्योरेंस बचाने के लिए खड़ा कर दिया नकली ड्राइवर
17 अक्टूबर 2025 की सुबह समस्तीपुर के दलसिंह सराय चौराहे पर तेज रफ्तार बुलेट (BR33 BM7238) ने बाइक सवार विष्णु देव सिंह को जोरदार टक्कर मार दी, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई। बुलेट सवार गाड़ी छोड़कर भाग निकला।
अगले दिन दलसिंह सराय थाने में FIR हुई और पुलिस जांच में विनय कुमार नाम के व्यक्ति को आरोपी बनाया गया।
असली खेल ऐसे आया सामने
बुलेट ममता कुमारी के नाम रजिस्टर्ड थी और 1 सितंबर 2025 को ही इसका इंश्योरेंस कराया गया था। हादसे में क्षतिग्रस्त बुलेट के इंश्योरेंस क्लेम के लिए जब बीमा कंपनी के पास आवेदन पहुंचा, तो उनकी इन्वेस्टिगेशन टीम हरकत में आई। उसने जांच की। उसकी रिपोर्ट के मुताबिक...
- घटनास्थल पर पूछताछ में पता चला कि हादसे के वक्त बुलेट कोई 20 साल का लड़का चला रहा था।
- ममता के घर पहुंची टीम ने जांच की तो पता चला कि गाड़ी ममता का भाई राजन कुमार चला रहा था, जिसके पास ड्राइविंग लाइसेंस (DL) नहीं था।
- राजन के ठेकेदार पिता बैद्यनाथ महतो ने अपने बेटे को जेल और इंश्योरेंस क्लेम रद्द होने से बचाने के लिए अपने लाइसेंसी ड्राइवर विनय कुमार को फर्जी आरोपी बनाकर पुलिस के सामने पेश कर दिया था।

ममता कुमारी की इसी बाइक से समस्तीपुर में एक्सीडेंट हुआ था। (घटना के बाद की फोटो)
बीमा कंपनी की टीम ने कैमरे पर राजन का जुर्म कबूलता हुआ बयान रिकॉर्ड किया और पुलिस को सौंपा। पुलिस ने अपनी केस डायरी में सच दर्ज करते हुए कोर्ट में चार्जशीट दाखिल कर दी है। अब कोर्ट तय करेगी कि मृतक के परिवार को मुआवजा कौन देगा।
हर साल फर्जी क्लेम से 10 से 15 हजार करोड़ का नुकसान
इंश्योरेंस क्लेम में फर्जीवाड़ा का खेल अकेले बिहार में नहीं हो रहा है। इंश्योरेंस रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (IRDAI) की रिपोर्ट के मुताबिक, इंश्योरेंस के हर सेक्टर में कुल क्लेम का 10 से 15 प्रतिशत मामला फर्जी होता है। इससे कंपनियों को 10 से 15 हजार करोड़ रुपए का नुकसान उठाना पड़ता है। जनरल इंश्योरेंस काउंसिल और कपंनियों के अनुमान के अनुसार फर्जी क्लेम का मामला बहुत तेजी बढ़ता जा रहा है।