Major Navya Shekhawat: भारत की बेटियां किसी भी क्षेत्र में बेटों से कम नहीं हैं। यह बात लगातार किसी न किसी उदाहरण से साबित होती हुई नजर आती है। ऐसा ही एक कारनामा मेजर नव्या शेखावत ने कर दिखाया है, जिन्हें राष्ट्रपति की ADC अपॉइंट किया गया है।
सीडीसी की एग्जाम से लेकर राष्ट्रपति भवन तक का नव्या का सफर उनकी मेहनत, काबिलियत और डिसिप्लिन की मिसाल पेश करता है। राष्ट्रपति की एडीसी बनकर उन्होंने न केवल इतिहास रचा है बल्कि देशभर के युवाओं के लिए एक इंस्पिरेशन भी बन गई हैं। चलिए जान लेते हैं कि नव्या कौन हैं?
कौन है नव्या शेखावत?
नव्या शेखावत को हाल ही में राष्ट्रपति का ADC बनाया गया है। यह बहुत ही सम्मान और जिम्मेदारी वाला पद होता है। सिर्फ 5 साल की सर्विस में वो इस मुकाम तक पहुंचने वाली पहली महिला बनी हैं। उन्होंने अपना सफर कंबाइंड डिफेंस सर्विसेज एग्जाम के जरिए शुरू किया था। इस परीक्षा में सफल होने के बाद उनका सिलेक्शन शॉर्ट सर्विस कमिशन में हुआ और उन्हें चेन्नई स्थित ऑफिसर्स ट्रेनिंग एकेडमी में अपनी ट्रेनिंग पूरी की है।
कैसा रहा नव्या का सफर
OTA में अपनी ट्रेनिंग पूरी करने के बाद उन्हें इंडियन आर्मी की आर्मी सर्विस कॉर्प्स में कमीशन मिला। आर्मी का ये डिपार्मेंट सेना के लिए लॉजिस्टिक, सामान की सप्लाई और ट्रांसपोर्टेशन के जिम्मेदारी संभालता है। जिससे फोर्स को अपनी तैयारी को मजबूत करने में मदद मिलती है।
अब मिली ये जिम्मेदारी
नव्या को अब राष्ट्रपति भवन में बहुत ही जिम्मेदारी का काम दिया गया है। ADC का काम राष्ट्रपति के ऑफिशियल इंगेजमेंट में उनकी सहायता करना, सीनियर मिलिट्री और सिविल ऑफिशल्स के साथ कोऑर्डिनेटर करना। स्टेट सेरिमनी और गार्ड ऑफ ऑनर जैसे इवेंट में शामिल होना। राष्ट्रपति भवन के प्रोटोकॉल को बनाकर रखना, इंडियन आर्म्ड फोर्स को रिप्रजेंट करना होता है।
History isn't always made on the battlefield. Sometimes, it's made by quietly taking a seat where no woman from your service has sat before.
Major Navya Shekhawat has become the first woman officer from the Indian Army to be appointed as the President's Aide-de-Camp, serving… pic.twitter.com/PaqA4TugbO
— The Better India (@thebetterindia) July 13, 2026
बनीं युवाओं के लिए प्रेरणा
मेजर नव्या शेखावत ने अपनी सफलता के जरिए आर्मी में महिलाओं के लिए बढ़ते अवसरों को लोगों के सामने लाने का काम किया है। ये सफलता केवल उनकी पर्सनल अचीवमेंट नहीं बल्कि आर्मी में महिलाओं की भर्ती भागीदारी और देश सेवा के जज्बे का प्रमाण है। कठिन ट्रेनिंग और लगातार बेहतरीन प्रदर्शन से बड़े अवसर हासिल किए जा सकते हैं, ये केवल 5 सालों के करियर में ADC बनकर नव्या ने साबित कर दिया है।
महिला अधिकारियों के लिए यह नियुक्ति क्यों अहम है?
1992 में शॉर्ट सर्विस कमीशन के जरिए महिलाएं भारतीय सेना में शामिल हुईं। कानूनी और पॉलिसी में बदलावों के साथ करियर के मौके लगातार बढ़े हैं। सुप्रीम कोर्ट के 2020 के फ़ैसले ने इन मौकों को काफ़ी मज़बूत किया। अब महिला अधिकारियों को कमांड और स्टाफ़ की ज़्यादा ज़िम्मेदारियां मिलती हैं। आज मिलिट्री संगठनों में प्रोफेशनल तरक्की का फ़ैसला काफ़ी हद तक मेरिट के आधार पर होता है।
मेजर शेखावत की नियुक्ति साफ तौर पर इस लगातार हो रहे संस्थागत बदलाव को दिखाती है। डिफेंस से जुड़े प्लेटफॉर्म्स ने 2026 की शुरुआत में उनकी नियुक्ति की काफ़ी चर्चा की। राष्ट्रपति के साथ उनकी तस्वीरों ने लोगों का काफ़ी ध्यान खींचा। कई लोगों ने इस कामयाबी को महिला सशक्तिकरण की मिसाल माना। उनकी सफलता ने देश भर में CDS परीक्षा की तैयारी कर रहे अधिकारियों का हौसला बढ़ाया। इसने आर्मी सर्विस कॉर्प्स में मौजूद संभावनाओं को भी उजागर किया।
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FAQ
Q.
मेजर नव्या शेखावत कौन हैं?
A.
मेजर नव्या शेखावत भारतीय सेना की आर्मी सर्विस कॉर्प्स (ASC) की एक महिला अधिकारी हैं, जिन्हें हाल ही में राष्ट्रपति का एडीसी (Aide-de-Camp) नियुक्त किया गया है।
Q.
सेना में एडीसी (ADC) का क्या मतलब होता है?
A.
डीसी का फुल फॉर्म Aide-de-Camp होता है। यह एक पर्सनल असिस्टेंट या ऑनररी अटेंडेंट की तरह होते हैं जो राष्ट्रपति या राज्यपाल जैसे वीआईपी प्रमुखों के प्रोटोकॉल और मिलिट्री कोऑर्डिनेशन को संभालते हैं।
Q.
मेजर नव्या शेखावत ने अपनी ट्रेनिंग कहां से पूरी की?
A.
उन्होंने कंबाइंड डिफेंस सर्विसेज (CDS) की परीक्षा पास करने के बाद ऑफिसर्स ट्रेनिंग एकेडमी (OTA), चेन्नई से अपनी मिलिट्री ट्रेनिंग पूरी की।
Q.
राष्ट्रपति की एडीसी बनने वाली पहली महिला अधिकारी कौन हैं?
A.
मेजर नव्या शेखावत मात्र 5 साल की आर्मी सर्विस में राष्ट्रपति की एडीसी बनने वाली पहली महिला सैन्य अधिकारी बनी हैं।
Q.
सुप्रीम कोर्ट का 2020 का फैसला महिलाओं के लिए क्यों जरूरी था?
A.
2020 में सुप्रीम कोर्ट ने सेना में महिला अधिकारियों को परमानेंट कमीशन (PC) और कमांड पोस्टिंग देने का ऐतिहासिक आदेश दिया था, जिससे महिलाओं के लिए बड़े पदों के रास्ते खुले।