चीनी महंगी होने पर इन 5 चीजों के दाम भी बढ़ सकते हैं, फेस्टिवल शॉपिंग से पहले चेक करें

Published on 21 अग॰ 2026

Sugar Price Hike: चीनी की कीमतें 65 रुपए किलो तक पहुंचने के बाद त्योहारी सीजन में कई चीजें महंगी हो सकती हैं, जिससे आपका बजट बिगड़ सकता है। जानिए सरकार क्या कर रही है।

Sugar Rate: त्योहारों का सीजन दरवाजे पर दस्तक दे रहा है। गणेश चतुर्थी, जन्माष्टमी, दशहरा और फिर दिवाली... ये वो समय है जब हर घर में जमकर मीठा बनता और बाजार से आता है। लेकिन इस बार त्योहारों की मिठास आपकी जेब पर थोड़ी भारी पड़ सकती है। वजह? चीनी के दामों में अचानक लगी आग। बाजार में चीनी की कीमतें 65 रुपए प्रति किलो तक पहुंच गई हैं। पिछले एक साल में ही इसके रेट करीब 13% बढ़ गए हैं। लेकिन बात सिर्फ एक किलो चीनी की नहीं है। जब चीनी महंगी होती है, तो इसका सीधा असर उन तमाम चीजों पर पड़ता है जो आप बाजार से खरीदते हैं। अगर आप त्योहारी सीजन की शॉपिंग लिस्ट बना रहे हैं, तो जान लीजिए कि चीनी महंगी होने से बाजार में मिलने वाली ये 5 चीजें भी महंगी हो सकती हैं..

बाजार की मिठाइयां (Sweets & Mithai)

त्योहारों पर सबसे ज्यादा डिमांड मिठाइयों की होती है। हलवाई और मिठाई बनाने वाली बड़ी कंपनियां भारी मात्रा में (थोक में) चीनी खरीदती हैं। जब पीछे से ही चीनी महंगी मिलेगी, तो जाहिर है काजू कतली, लड्डू और गुलाब जामुन के डिब्बे का रेट भी बढ़ जाएगा।

कोल्ड ड्रिंक्स और पैक्ड जूस (Cold Drinks & Juices)

सॉफ्ट ड्रिंक बनाने वाली कंपनियों का मुख्य कच्चा माल चीनी ही होता है। चीनी के दाम बढ़ने से इन कंपनियों की लागत बढ़ जाती है। ऐसे में कंपनियां या तो कोल्ड ड्रिंक की बोतल का रेट बढ़ा सकती हैं या फिर उतने ही पैसे में बोतल का साइज छोटा कर सकती हैं। इसे श्रिंकफ्लेशन कहते हैं।

बिस्कुट और बेकरी आइटम्स (Biscuits & Bakery)

दिवाली पर गिफ्ट देने के लिए कुकीज, केक और बिस्कुट के पैकेट खूब खरीदे जाते हैं। बेकरी इंडस्ट्री भी बड़े 'बल्क कंज्यूमर' (थोक खरीदार) में आती है। चीनी महंगी होने का सीधा असर आपके फेवरेट बिस्कुट के पैकेट पर भी दिख सकता है।

चॉकलेट्स और टॉफियां (Chocolates & Confectionery)

चॉकलेट कंपनियों का बजट भी चीनी के रेट पर बहुत ज्यादा निर्भर करता है। त्योहारी गिफ्ट पैक्स में सबसे ज्यादा चॉकलेट्स ही दी जाती हैं। इस बार दिवाली पर चॉकलेट हैम्पर्स के दाम आपको पिछले साल से ज्यादा लग सकते हैं।

पैक्ड और प्रोसेस्ड फूड्स (Packaged Foods)

आपको शायद अंदाजा न हो, लेकिन टोमैटो केचप से लेकर रेडी-टू-ईट स्नैक्स तक में चीनी का इस्तेमाल होता है। फूड प्रोसेसिंग कंपनियों के लिए लागत बढ़ने का मतलब है कि आम आदमी के लिए पैकेट वाले सामान का महंगा होना।

चीनी के दाम अचानक से क्यों बढ़ गए?

पेट्रोल वाला कनेक्शन

देश में पेट्रोल को सस्ता और इको-फ्रेंडली बनाने के लिए उसमें 'एथेनॉल' मिलाया जा रहा है। यह एथेनॉल गन्ने से बनता है। यानी, जो गन्ना पहले चीनी बनाने के काम आता था, उसका एक बड़ा हिस्सा अब गाड़ियों के फ्यूल (एथेनॉल) के लिए जा रहा है।

मौसम की मार

यूपी जैसे बड़े गन्ना उत्पादक राज्यों में कम बारिश और फसल में लगी कुछ बीमारियों की वजह से गन्ने की पैदावार पर असर पड़ा है।

सरकार ने आपको राहत देने के लिए क्या किया?

जमाखोरी पर लगाम

सरकार ने नया नियम बना दिया है कि कोल्ड ड्रिंक, बिस्कुट और मिठाई बनाने वाली बड़ी कंपनियां अब 30 दिन की बजाय सिर्फ 15 दिन का ही चीनी का स्टॉक रख सकती हैं। इससे बाजार में चीनी की कमी नहीं होगी और दाम काबू में रहेंगे।

10 साल बाद विदेशी चीनी की एंट्री

देश में चीनी की कमी न हो, इसके लिए सरकार ने 31 अक्टूबर 2026 तक 10 लाख टन कच्ची चीनी बिना किसी टैक्स (ड्यूटी-फ्री) के विदेशों से मंगाने की इजाजत दे दी है। पूरे एक दशक बाद सरकार ने ऐसा फैसला लिया है।