रांची1 दिन पहलेलेखक: चंदन चौधरी
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- जिले में दारोगा-सिपाही के 3808 पद स्वीकृत, कार्यरत सिर्फ 2318
राजधानी में अपराधियों पर नकेल कसने और वारदात के बाद तत्काल कार्रवाई के लिए सड़क पर उतरने वाली पुलिस गश्त जवानों की कमी से कमजोर पड़ रही है। रांची जिले में दारोगा और सिपाही मिलाकर करीब 3808 पद स्वीकृत हैं, लेकिन वर्तमान में सिर्फ 2318 पुलिसकर्मी कार्यरत हैं। यानि करीब 1490 पद खाली हैं। 45 थानों में करीब 700 पुलिसकर्मी तैनात हैं।
पुलिस पदाधिकारियों के अनुसार, थानों में गश्त के अलावा भी कई तरह की ड्यूटी होती है। ऐसे में उपलब्ध बल का बड़ा हिस्सा दूसरी जिम्मेदारियों में लग जाता है और इसका सीधा असर गश्ती व्यवस्था पर पड़ता है। इसका ताजा उदाहरण अरगोड़ा थाना क्षेत्र में सामने आया, जहां 20 सितंबर की रात दो लुटेरों को पकड़ने के दौरान एसआई मुकेश कुमार उपाध्याय चोटिल हो गए।
2 सितंबर को भी हुई थी ऐसी घटना : मोती मस्जिद के पास गश्ती के दौरान टाइगर मोबाइल के जवानों पर हमला किया गया। ब्राउन शुगर खरीदने- बेचने के मामले में कार्रवाई के दौरान युवकों ने पुलिसकर्मियों के साथ हाथापाई की थी।
कहीं एक तो कहीं दो जवानों के भरोसे पीसीआर
बल की कमी का असर पीसीआर की तैनाती पर भी है। कई पीसीआर वाहनों में चालक के अलावा एक पदाधिकारी और एक जवान, जबकि कुछ में एक पदाधिकारी और दो जवान ही गश्त कर रहे हैं। इन टीमों को दो शिफ्ट में 12-12 घंटे की ड्यूटी करनी पड़ रही है। जबकि गश्ती व्यवस्था में आदर्श तौर पर चालक के अलावा एक पदाधिकारी और चार जवान होने चाहिए।
गश्ती का मकसद सिर्फ सड़क पर पुलिस वाहन चलाना नहीं, बल्कि वारदात की सूचना मिलते ही मौके पर पहुंचना, अपराधियों को रोकना, पीड़ित को सुरक्षित करना और जरूरत पड़ने पर कार्रवाई करना है। कम संख्या में पुलिसकर्मी होने पर अचानक हथियारबंद अपराधियों से सामना होने की स्थिति में पुलिस के सामने चुनौती बढ़ जाती है। अरगोड़ा की घटना में एसआई का चोटिल होना इसी जोखिम को सामने लाता है।
2017 के बाद बहाली नहीं, सिपाही के 11,355 पद खाली
जुलाई 2026 की रिपोर्ट के अनुसार झारखंड पुलिस में स्वीकृत बल की तुलना में 11,355 सिपाही के पद रिक्त हैं। दारोगा के भी 2,263 पद खाली हैं। बल की कमी का एक बड़ा कारण लंबे समय से नियमित भर्ती नहीं होना भी है। वर्ष 2015 में सिपाही बहाली के लिए आवेदन निकला था और उसी प्रक्रिया के तहत वर्ष 2017 में करीब 2000 सिपाहियों की बहाली हुई थी। इसके बाद नियमित सीधी बहाली नहीं हुई। जबकि पिछले करीब दस वर्षों में सैकड़ों जवान पदमुक्त और सेवानिवृत्त भी हो चुके हैं। जून 2026 में प्रशिक्षण पूरा करने के बाद 336 सिपाहियों समेत कुल 340 पुलिसकर्मियों को बल में शामिल किया गया, लेकिन यह संख्या मौजूदा कमी की तुलना में काफी कम है।
भास्कर एक्सपर्ट
राहुल कुमार मुर्मू, प्रदेश अध्यक्ष, झारखंड पुलिस एसोसिएशन
बल व संसाधन की कमी
पूरे राज्य में पुलिस बल की संख्या काफी कम है। पुलिस बल बढ़ाने के साथ-साथ उन्हें आधुनिक संसाधनों से लैस करने व उनके अधिकारों को सुदृढ़ करने की आवश्यकता है। उनके अनुसार, राज्य की पुलिस को और सशक्त व साधन-संपन्न बनाने की आवश्यकता है। एसोसिएशन की ओर से कई बार पुलिस मुख्यालय एवं मुख्यमंत्री को अवगत कराया गया है।
गश्ती दल में पर्याप्त जवान हैं
कहीं कोई कमी नहीं है, सब जगह ठीक है। पुलिस की ड्यूटी में थोड़ी बहुत चोट तो लगती ही रहती है। पर्याप्त संख्या बल के साथ विभाग बेहतर काम कर रहा है। सभी गश्ती दल में पर्याप्त जवान हैं। - राकेश रंजन, एसएसपी
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