बैतूल में कम बारिश का असर अब रबी सीजन की सिंचाई पर दिखाई देने लगा है। जल उपयोगिता समिति की बैठक में सामने आया कि पिछले साल करीब 94 हजार हेक्टेयर में सिंचाई हुई थी, जबकि इस बार पानी की उपलब्धता के आधार पर करीब 55 हजार हेक्टेयर में ही सिंचाई हो सकेगी।
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127 जलस्रोतों में बड़ी संख्या 50% या उससे कम भरे
बैठक में जल संसाधन विभाग के अधिकारियों ने बांधों और तालाबों में पानी की स्थिति की समीक्षा की। कलेक्टर ने बताया कि कम बारिश के कारण जलस्रोत पर्याप्त नहीं भर पाए हैं। जिले के 127 बांध-तालाबों में बड़ी संख्या ऐसे जलस्रोतों की है, जो 50% या उससे कम भरे हैं। ऐसे में अगले करीब आठ महीनों के लिए उपलब्ध पानी का नियोजित इस्तेमाल करना होगा। पेयजल के लिए विभागीय गाइडलाइन के अनुसार पानी सुरक्षित रखा जाएगा।
55 हजार हेक्टेयर में सिंचाई की योजना
कम पानी वाले क्षेत्रों में किसानों को कम पानी वाली फसलें लेने के लिए समझाइश दी जाएगी। उपलब्ध पानी के अनुसार पलेवा के बाद एक सिंचाई देने की व्यवस्था होगी। बेहतर जल उपलब्धता वाले क्षेत्रों में पलेवा के साथ दो सिंचाई देने का प्रयास किया जाएगा। करीब 14,421 हेक्टेयर क्षेत्र में बेहतर जल उपलब्धता के आधार पर अधिक सिंचाई सुविधा देने की योजना है।
गेहूं और गन्ने की बोवनी कम करने की सलाह
जिला पंचायत अध्यक्ष राजा पवार ने कहा कि जिले के जलस्रोत अभी पूरी तरह नहीं भर पाए हैं, इसलिए किसानों को फसल चयन की सलाह अभी से देना जरूरी है। उन्होंने कहा कि गेहूं में ज्यादा पानी लगता है, जबकि कई क्षेत्रों में एक-दो सिंचाई में भी फसल लेना मुश्किल होता है। उन्होंने गन्ने जैसी ज्यादा पानी मांगने वाली फसलों की बोवनी कम करने की सलाह दी।
पवार ने सरकारी और निजी निर्माण कार्यों में पानी की खपत पर भी नियंत्रण करने की बात कही। बैठक में तय किया गया कि गांवों में मुनादी कराकर कम पानी वाली फसलों के प्रति किसानों को जागरूक किया जाएगा। किसान संगठनों के साथ बैठक कर रबी सीजन की सिंचाई और फसल योजना पर सुझाव भी लिए जाएंगे।
पिछले साल की तुलना में 27% कम बारिश
30 सितंबर तक जिले में औसत 721.9 मिमी बारिश दर्ज हुई है, जबकि पिछले साल इसी अवधि तक 989.8 मिमी बारिश हुई थी। इस तरह इस साल करीब 267.9 मिमी यानी 27% कम बारिश हुई है। कम बारिश के साथ नदी-नालों और जलस्रोतों में पर्याप्त पानी नहीं होने से रबी फसलों की सिंचाई का संकट बढ़ने की स्थिति है।