रूस में नौकरी के नाम पर गए तेलंगाना के 4 युवक फंसे, परिवारों का दावा- रूसी सेना में भेजा गया

Published on 30 सित॰ 2026

Telangana News: तेलंगाना के चार युवकों के रूस में फंसने का मामला सामने आया है. परिवारों का आरोप है कि चारों युवक रूस में सिविलियन नौकरी करने के लिए गए थे, लेकिन वहां पहुंचने के बाद उन्हें रूसी सेना में सेवा के लिए भेज दिया गया. परिवारों का कहना है कि इनमें से कुछ युवकों को युद्ध क्षेत्र यानी यूक्रेन से लगी फ्रंटलाइन के करीब भी भेजा गया है. इससे उनके परिजन काफी चिंतित हैं. परिवारों ने तेलंगाना सरकार से हस्तक्षेप कर युवकों को सुरक्षित भारत वापस लाने की मांग की है.

नौकरी का ऑफर मिलने के बाद रूस गए थे युवक

परिवारों के मुताबिक, युवकों को रूस में सामान्य और मैकेनिकल हेल्पर जैसे काम का ऑफर मिला था. नौकरी के विज्ञापन में करीब 477 डॉलर मासिक वेतन और मुफ्त खाने की सुविधा का उल्लेख था. साथ ही यह भी बताया गया था कि नौकरी के लिए रूसी भाषा की परीक्षा देने की जरूरत नहीं होगी. इसी आधार पर युवक रूस गए थे. परिवारों का कहना है कि उन्हें इस बात की जानकारी नहीं थी कि रूस पहुंचने के बाद उन्हें सैन्य सेवा में भेजा जा सकता है. अब परिजन सरकार और भारतीय अधिकारियों से उनकी जल्द सुरक्षित वापसी की मांग कर रहे हैं.

सैन्य कैंप पहुंचने के बाद परिवार से संपर्क कम

तेलंगाना के एक युवक प्रकाश की पत्नी मेघावत सुनीता ने बताया कि प्रकाश रूस में नौकरी करने की उम्मीद से गया था. रूस पहुंचने के बाद उसने एक सैन्य कैंप से परिवार से सिर्फ एक बार बात की. सुनीता के मुताबिक, प्रकाश का फोन भी ले लिया गया है और वह अपनी सुरक्षा को लेकर चिंतित है. प्रकाश के परिवार में उसकी पत्नी और तीन बच्चे हैं. उसके साले लाउड्या रवि ने बताया कि प्रकाश अभी एक सैन्य कैंप में है. परिवार का दावा है कि समूह के दो अन्य युवकों को भी फ्रंटलाइन के करीब भेजे जाने की जानकारी मिली है.

युवक के वॉइस मैसेज से परिवार में डर

निजामाबाद जिले के तदकोले गांव में रहने वाले मोहम्मद अफजान खान के परिवार ने भी सरकार से मदद मांगी है. परिवार के मुताबिक, रूस भेजे जाने के बाद अफजान की ओर से कुछ परेशान करने वाले वॉइस मैसेज मिले थे. अफजान की पत्नी जमीला बेगम ने कहा कि वॉइस मैसेज सुनने के बाद से पूरा परिवार परेशान है. अफजान 15 फरवरी को रूस गया था. उसके परिवार में पत्नी, दो बच्चे और पिता अब्बास खान हैं. परिजन अब उसकी सुरक्षित वापसी के लिए तत्काल सरकारी मदद चाहते हैं. वहीं, रविंदर के परिवार ने बताया कि उसके दो बेटे नितिन और अरविंद उस पर निर्भर हैं. परिवार का कहना है कि उनके लिए भी यह स्थिति बेहद चिंताजनक बनी हुई है.

सरकार ने विदेश मंत्रालय से संपर्क के निर्देश दिए

चारों परिवारों ने 29 सितंबर को हैदराबाद में मुख्यमंत्री प्रवासी प्रजावाणी के अधिकारियों के सामने अपनी शिकायत रखी. इससे पहले निजामाबाद ग्रामीण विधायक आर भूपति रेड्डी की ओर से भी मामले को उठाया गया था. परिवारों ने विदेश मंत्रालय के MADAD पोर्टल के जरिए भी शिकायत दर्ज कराई है.

प्रवासी प्रजावाणी की अधिकारी गडवाल विजयलक्ष्मी और नोडल अधिकारी के विद्यासागर ने परिवारों से मुलाकात की. अधिकारियों ने राज्य के एनआरआई विंग को विदेश मंत्रालय और मॉस्को स्थित भारतीय दूतावास के साथ समन्वय करने के निर्देश दिए हैं. शिकायत को सामान्य प्रशासन विभाग के एनआरआई सेल को भी भेजा गया है.

दस्तावेजों में सिविलियन नौकरी का जिक्र

परिवारों ने सरकार को भर्ती से जुड़े दस्तावेज भी सौंपे हैं. इनमें रूस की Pondera Co. के जरिए सामान्य और मैकेनिकल हेल्पर की नौकरियों के विज्ञापन शामिल हैं. इसके अलावा ओड्डे येल्लैया से जुड़े दस्तावेजों में उन्हें Pondera Industry LLC का भारतीय सिविलियन कर्मचारी बताया गया है. उनके वर्क परमिट में काम को औद्योगिक पाइपलाइन इंस्टॉलर के तौर पर दर्ज किया गया है.

परिवारों का कहना है कि वे नौकरी के लिए रूस गए थे, लेकिन अब युद्ध से जुड़े सैन्य हालात में फंस गए हैं. परिजन सरकार और भारतीय अधिकारियों से चारों युवकों की स्थिति का पता लगाने और उन्हें सुरक्षित भारत वापस लाने के लिए तत्काल कदम उठाने की मांग कर रहे हैं.

आशीष कुमार मिश्रा

आशीष कुमार मिश्रा

आशीष कुमार मिश्रा की 6 साल से जर्नलिज्म की Journey जारी है. दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र को बनाने में अहम योगदान भारत के राज्यों का है. इन राज्यों से जुड़ी हर खटपट, चाहे राजनीतिक हो या सामाजिक, वो आप तक पहुंचाने में जुटा हुआ हूं. उत्तर प्रदेश समेत देश के तमाम बड़े राज्यों की सियासत को समझता हूं और बेबाकी से उसे लिखता हूं. जर्नलिज्म की Journey 2017 में न्यूज चैनल समाचार टुडे से स्टार्ट हुई, फिर नेशनल वॉइस के साथ भी काम करने का मौका मिला. दो न्यूज चैनलों में काम करने के बाद डिजिटल की तरफ में रुख किया. 2018 में पहली बार हैदराबाद में ईटीवी भारत की डिजिटल विंग टीम से जुड़ा. यहां साढ़े 3 साल का समय बिताने के बाद 2021 में दैनिक भास्कर (लखनऊ) की टीम से जुड़ा. अब यह सफर 2022 से टीवी9 भारतवर्ष के साथ चल रहा है. पत्रकारिता का मैंने ककहरा दैनिक जागरण इंस्टीट्यूट से सीखा. यहीं से मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन की डिग्री हासिल की.

Read More

google button