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सालाना 684.9 यूनिट बिजली खपत के दावे के साथ बेचा गया एयर कंडीशनर जांच में करीब 4.2 गुना ज्यादा बिजली खींचता मिला। खरीददार की शिकायत के बावजूद कंपनी ने समस्या दूर नहीं की और न ही एसी बदला।
उपभोक्ता आयोग ने मामले में ई-कॉमर्स कंपनी फ्लिपकार्ट सहित 4 कंपनियों को सेवा में कमी का दोषी मानते हुए एसी सुधारने या बदलने और ऐसा नहीं होने पर खरीद राशि ब्याज सहित लौटाने का आदेश दिया है। अशोकनगर निवासी और वर्तमान में गुना के सिसोदिया कॉलोनी निवासी हिमांशु पाराशर ने मई 2025 में 19,990 रुपए में MarQ 1 Ton 3 Star Split Inverter 5-in-1 Convertible AC ऑनलाइन खरीदा था। विज्ञापन में सालाना बिजली खपत 684.9 यूनिट और हाई एनर्जी सेविंग का दावा किया गया था। कुछ समय बाद एसी की ज्यादा बिजली खपत की शिकायत हुई। जांच में तकनीशियन ने 10 मिनट में 0.3 यूनिट, यानी करीब 1.8 यूनिट प्रति घंटे खपत दर्ज की। इस दर से एसी रोज 8 घंटे चलाने पर महीने में करीब 432 यूनिट खपत होगी। आयोग के नोटिस कुछ मामलों में ‘Refused' और कुछ में ‘Left' टिप्पणी के साथ वापस आए। आयोग ने नोटिस की तामीली मानते हुए अनावेदक कंपनियों के जवाब पेश नहीं करने पर मामले की एकपक्षीय सुनवाई की। आयोग ने कौशल्या लॉजिस्टिक लिमिटेड, MarQ By Flipkart, Flipkart Internet Pvt. Ltd. और जीवेश कंज्यूमर सर्विस प्राइवेट लिमिटेड को सेवा में कमी का दोषी माना। फैसले में ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म की उपभोक्ता को उत्पाद की सही जानकारी उपलब्ध कराने और शिकायतों के निवारण संबंधी जिम्मेदारी का भी उल्लेख किया गया। आयोग के अध्यक्ष सुरेश कुमार चौबे और सदस्य शबीना अली ने कंपनियों को दो महीने में विज्ञापित दावे के अनुरूप एसी नि:शुल्क सुधारने का आदेश दिया है। सुधार संभव नहीं होने पर उसी मॉडल का नया एसी देना होगा। ऐसा नहीं करने पर 19,990 रुपए की खरीद राशि 7% वार्षिक ब्याज सहित लौटानी होगी। इसके अलावा मानसिक एवं शारीरिक कष्ट के लिए 5,000 रुपए, वाद व्यय 2,000 रुपए और अधिवक्ता शुल्क 3,000 रुपए, यानी कुल 10,000 रुपए देने का आदेश दिया गया है। दो महीने में भुगतान नहीं करने पर इस राशि पर भी 7% वार्षिक ब्याज देना होगा।
हिमांशु ने कंपनी के पास 15 से ज्यादा शिकायतें दर्ज कराईं और तकनीशियन करीब 10 बार घर पहुंचा। जांच के दौरान तकनीशियन ने फोटो-वीडियो बनाए और एसी में मैन्युफैक्चरिंग डिफेक्ट होने की बात कही। इसके बावजूद समस्या दूर नहीं हुई। इसके बाद हिमांशु ने उपभोक्ता आयोग में परिवाद दायर किया। उनकी ओर से अधिवक्ता सूर्य प्रकाश रघुवंशी ने पैरवी की।