Published: Sunday, September 13, 2026, 10:04 [IST]
मणिपुर में यूनाइटेड नगा काउंसिल (UNC) के आर्थिक नाकेबंदी के चलते नेशनल हाईवे-37 पर माल ढोने वाले ट्रक और खाली तेल टैंकर फंस गए हैं। न्यू कैथेलमांबी में ही सैकड़ों वाहन 4 दिन से ज्यादा समय से खड़े हैं। हाईवे पर कई जगहों पर हालात ऐसे हैं कि जरूरी सामान की आवाजाही भी बुरी तरह प्रभावित हुई है।
NH-37 पर अलग-अलग जगहों पर 200 से ज्यादा मालवाहक ट्रक और खाली तेल टैंकर फंसे हुए हैं। सबसे ज्यादा वाहन कंबिरोन इलाके में रुके हैं। इस बीच 12 सितंबर को जिरीबाम से सुरक्षा बलों की निगरानी में करीब 103 मालवाहक ट्रक इम्फाल के लिए रवाना हुए। इनमें 55 सीमेंट लदे ट्रक और 23 परिवहन सामग्री वाले ट्रक शामिल थे।
हालात सिर्फ मालवाहक वाहनों तक सीमित नहीं हैं। तेल टैंकरों की आवाजाही भी प्रभावित हुई है। नोनोई इलाके में तेल टैंकर चालकों पर हमले के विरोध में ऑल मणिपुर पेट्रोलियम प्रोडक्ट ड्राइवर्स एसोसिएशन ने स्टीयरिंग डाउन हड़ताल शुरू कर दी है।
ड्राइवरों का दर्द- सड़क खराब, सफर 5-6 दिन का
बिहार के ट्रक चालक पुरुषोत्तम कुमार ने कहा,
"मैं करीब दस दिन से रास्ते में फंसा हूं। सरकार भी इस परेशानी पर उतना ध्यान नहीं दे रही। ड्राइवरों को कितनी दिक्कत हो रही है, इसे कोई देख नहीं रहा। सड़क पहले से खराब है और रास्ते में वसूली का अलग दबाव है। हमें काफी परेशानियां झेलनी पड़ती हैं।"
चालकों का कहना है कि एनएच-37 की खराब हालत के चलते सामान्य सफर भी पांच से छह दिन तक खिंच जाता है।
इंफाल के मालोम स्थित तेल डिपो के सामने चालक संगठन दो दिन से धरना दे रहा है। प्रदर्शनकारियों ने "ड्राइवर बचाओ, मणिपुर बचाओ" और "ड्राइवर ही सप्लाई की रीढ़ हैं" जैसे संदेशों वाले पोस्टर लगाए।
चालक शामुंगौ ने कहा कि प्रदर्शन का मकसद हाईवे पर चालकों की सुरक्षा को लेकर प्रशासन की नाकामी सामने लाना है। एक अन्य चालक ने कहा,
"ड्राइवर किसी एक समुदाय के नहीं होते। जरूरी सामान भी हर समुदाय के लिए होता है। इसलिए किसी भी आंदोलन या बंद के दौरान चालकों को निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए।"
संगठन ने सरकार से हमले के जिम्मेदार लोगों की पहचान कर गिरफ्तारी और कानूनी कार्रवाई की मांग की है। साथ ही भविष्य में ऐसी घटनाएं न होने का भरोसा देने को कहा है।
नोनोई में 5 ड्राइवर घायल, 20 वाहन क्षतिग्रस्त
10 सितंबर को नोनोई इलाके में हुए हमले में पांच ड्राइवर घायल हुए, जिनमें एक की हालत गंभीर बताई गई। करीब 20 वाहन भी क्षतिग्रस्त हुए। आरोप है कि यह घटना तब हुई, जब केंद्रीय सुरक्षा बलों ने जारी आर्थिक नाकेबंदी के बीच तेल टैंकरों को हाईवे पर चलने के लिए मजबूर किया।
फिलहाल नाकेबंदी, सड़क की खराब हालत और चालकों की सुरक्षा का संकट एक साथ सामने है। इसका सीधा असर मणिपुर में जरूरी सामान और पेट्रोलियम उत्पादों की आवाजाही पर पड़ रहा है।