रायपुर36 मिनट पहलेलेखक: प्रमोद साहू
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महादेव ऑनलाइन सट्टा नेटवर्क के खिलाफ चार साल से पुलिस, ईओडब्ल्यू, ईडी और सीबीआई की कार्रवाई चल रही है। नेटवर्क से जुड़े लोगों की 3800 करोड़ रुपए से अधिक की संपत्तियां अटैच की जा चुकी हैं। करीब 2000 सिम और 1700 बैंक खाते ब्लॉक किए गए हैं। 22 एप पर भी रोक लगाई गई है।
सीबीआई 11 चार्जशीट दाखिल कर 72 लोगों को आरोपी बना चुकी है। इसके बावजूद नेटवर्क पूरी तरह बंद नहीं हुआ। सोशल मीडिया और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म पर आज भी सट्टे की आईडी आसानी से उपलब्ध है। नए नाम और डोमेन से ऑनलाइन दांव लगवाए जा रहे हैं। कार्रवाई के बावजूद इस अवैध कारोबार के 45 हजार करोड़ रुपए से अधिक तक पहुंचने का दावा किया जा रहा है। मनी लॉन्ड्रिंग केस में ईडी ने तीन दिन पहले ईजमायट्रिप से जुड़े निशांत पिट्टी के 59.60 करोड़ रुपए के शेयर अटैच किए हैं। एजेंसी का आरोप है कि ये शेयर बेटिंग से हुई अवैध कमाई से जुड़े हैं। जांच में सट्टे की रकम शेयर बाजार, रियल एस्टेट और विदेशी कंपनियों तक पहुंचाए जाने के आरोपों की भी जांच चल रही है।
116 से ज्यादा आरोपी, 26 गिरफ्तार महादेव सट्टा नेटवर्क के मामले में अलग-अलग एजेंसियों ने 116 से ज्यादा लोगों और कंपनियों को आरोपी बनाया है। इनमें से सीबीआई ने 14 और ईडी ने 12 लोगों को गिरफ्तार किया है। यह मामला राजनीतिक आरोपों के कारण भी चर्चा में रहा है। जांच एजेंसियों के समक्ष चुनाव के दौरान 500 करोड़ रुपए से ज्यादा की रकम विदेश से हवाला के जरिए भेजे जाने के आरोप भी आए हैं। एजेंसियां इन आरोपों और कथित राजनीतिक कनेक्शन की जांच कर रही हैं। हालांकि, अब तक इस मामले में किसी राजनीतिक व्यक्ति की गिरफ्तारी नहीं हुई है।
डोमेन-सर्वर बदला और फिर चालू हो गया नेटवर्क एजेंसियों के मुताबिक, कार्रवाई से बचने के लिए बेटिंग नेटवर्क चलाने वाले लगातार डोमेन, सर्वर, मोबाइल नंबर और बैंक खाते बदल रहे हैं। एक एप या वेबसाइट ब्लॉक होते ही नए नाम और डोमेन से कारोबार शुरू कर दिया जाता है। यही वजह है कि कार्रवाई के कुछ समय बाद सट्टे की नई आईडी फिर सोशल मीडिया पर दिखाई देने लगती है।अब ‘महादेव बुक’ नाम का इस्तेमाल भी कम किया जा रहा है। अलग-अलग नामों से नए डोमेन बनाए जा रहे हैं। ऑनलाइन गेमिंग के नाम पर भी दांव लिए जा रहे हैं।
मैसेज करते ही खाता नंबर, पैसे जमा होते ही आईडी-पासवर्ड वॉट्सएप, टेलीग्राम और फेसबुक समेत सोशल मीडिया व मैसेजिंग प्लेटफॉर्म पर सट्टे की आईडी उपलब्ध कराई जा रही है। संपर्क करते ही बैंक खाता नंबर भेजा जाता है। रकम जमा होने के बाद यूजर को आईडी और पासवर्ड दिया जाता है, जिससे वह ऑनलाइन दांव लगा सकता है। इस नेटवर्क में नाम और खातों को लगातार बदला जा रहा है। एक खाता या नंबर ब्लॉक होने के बाद दूसरा इस्तेमाल होने लगता है।
म्यूल खातों में पहुंच रहा पैसा, सिम कार्ड भी दूसरों के नाम पर दर्ज जांच एजेंसियों के मुताबिक, सट्टे की रकम के लेन-देन के लिए म्यूल बैंक खातों का इस्तेमाल किया जा रहा है। मोबाइल सिम भी दूसरे लोगों के नाम पर लिए या इस्तेमाल किए जा रहे हैं। कई मामलों में जिन लोगों के नाम पर खाते या सिम हैं, उन्हें यह तक पता नहीं होता कि उनका इस्तेमाल किस काम के लिए किया जा रहा है।
रोज साइबर पेट्रोलिंग जरूरी, तभी टूटेगा नया नेटवर्क किसी बेटिंग एप या ऑनलाइन गेम को एक बार ब्लॉक करने भर से उसका नेटवर्क पूरी तरह खत्म नहीं होता। एप या डोमेन ब्लॉक करने के लिए संबंधित कंपनी अथवा सर्विस प्रोवाइडर को सूचना भेजी जाती है। आमतौर पर 24 घंटे में एक्सेस बंद हो जाता है, लेकिन इसके बाद प्रमोटर नया डोमेन, एप या सर्वर तैयार कर लेते हैं। ज्यादातर सर्वर विदेश में होने से कार्रवाई और चुनौतीपूर्ण हो जाती है। केंद्र सरकार को इसके लिए अलग मॉनिटरिंग सेल बनाकर रोज साइबर पेट्रोलिंग करनी चाहिए। नया एप या डोमेन सामने आते ही उसे ब्लॉक करने की प्रक्रिया शुरू हो।- मुकेश चौधरी, साइबर एक्सपर्ट
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