देशभर में हो रही सैकड़ों करोड़ की साइबर ठगी का पैसा राजस्थान में खुले 361 बैंक खातों में खपाया जा रहा था। ये सभी बैंक खाते दौसा जिले के लालसोट में इंडियन ओवरसीज बैंक की एक ही ब्रांच के हैं। ये खुलासा तब हुआ हुआ, जब साइबर हेल्पलाइन-1930 और नेशनल साइबर
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पड़ताल में सामने आया कि जनवरी 2026 से जुलाई 2026 के बीच ये खाते खुलवाए गए। डिजिटल अरेस्ट, फर्जी निवेश योजनाओं और KYC अपडेट के जरिए हुई ठगी का पैसा इन खातों में ट्रांसफर किया गया।
राजस्थान की साइबर पुलिस का कहना है कि नेटवर्क में बैंककर्मियों की भूमिका संदिग्ध है। करीब 7 महीने में इन बैंक खातों में कितना पैसा ट्रांसफर हुआ? अब पूरे नेटवर्क के बारे में पुलिस कहां तक पहुंची है? पढ़िए संडे बिग स्टोरी में...
देशभर से मिली शिकायतें, 4 अगस्त को दर्ज हुई FIR
जनवरी से जुलाई 2026 के बीच NCRP पर देशभर से साइबर ठगी की सैकड़ों शिकायतें दर्ज हुईं। जब उन शिकायतों की जांच की गई तो सामने आया कि ठगी का पैसा जिन 361 बैंक खातों में ट्रांसफर हुआ है, उनका लिंक राजस्थान से है।
सभी बैंक खाते दौसा जिले की लालसोट ब्रांच (IFSC- 0002541) में खोले गए थे। इससे जांच एजेंसियों को शक हुआ कि ये महज कोई संयोग नहीं बल्कि बड़े लेवल का 'म्यूल अकाउंट नेटवर्क' है।
‘म्यूल अकाउंट’ दूसरे व्यक्ति के नाम से खोला गया ऐसा बैंक खाता होता है, जिसका इस्तेमाल साइबर ठगी की रकम रिसीव और आगे ट्रांसफर करने में किया जाता है। इन सभी खातों को फ्रीज करने के बाद मामले में 4 अगस्त को दौसा की साइबर थाना पुलिस में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की गई।

इंडियन ओवरसीज बैंक की दौसा जिले की लालसोट ब्रांच में खुले 361 खाते जांच के दायरे में हैं।
भास्कर के पास 361 बैंक खातों की पूरी लिस्ट
साइबर पुलिस को मिले सभी 361 संदिग्ध खातों की पूरी लिस्ट भास्कर के पास है। शुरुआती खातों के नंबर xxxxxx000002418, xxxxxx000002657, xxxxxx000002840, xxxxxx000003284, xxxxxx000003442, xxxxxx000003968, xxxxxx000005486, xxxxxx000005707, xxxxxx000005713 और xxxxxx000006944 हैं।
- इसमें बड़ी संख्या में खाते एक ही सीरीज 254101... के हैं, जबकि कुछ खाते 254102... और 254133... सीरीज में भी दर्ज हैं।
- NCRP ने हर खाते के साथ अलग-अलग साइबर शिकायत का रेफरेंस नंबर लगाकर भेजा है, ताकि यह पता चल सके कि संबंधित अकाउंट में पैसा कहां से आया?
- सभी बैंक खातों के आगे लेयर-1 लिखा गया है। इसका मतलब है कि ये वो बैंक अकाउंट हैं, जहां ठगी की बड़ी रकम सबसे पहले ट्रांसफर हुई।

इससे साफ है कि देशभर के लोगों से ठगी गई रकम सीधे दौसा की एक शाखा के 361 खातों में ट्रांसफर हुई। इसके बाद आगे ट्रांसफर कर रकम को या तो क्रिप्टो में कन्वर्ट किया गया होगा या फिर किसी और माध्यम से ट्रांसफर।
सैकड़ों करोड़ खपाए, एक-एक खाते की हो रही जांच
साइबर पुलिस ने अभी यह खुलासा नहीं किया है कि कितने करोड़ की ठगी हुई, जो इन खातों में ट्रांसफर हुई। लेकिन सैकड़ों करोड़ रुपए इधर से उधर होने का अनुमान है।
साइबर डीआईजी शांतनु कुमार ने बताया- साइबर ठगों को बड़ी रकम ठिकाने लगाने के लिए ज्यादा खातों की जरूरत होती है। साइबर अपराधी पहले ठगी की रकम प्राप्त करते हैं।
फिर उसे कई खातों में बांटकर ट्रेल खत्म करते हैं, ताकि जब तक खातों को फ्रीज किया जाए, तब तक ठगी का सारा पैसा अलग-अलग खातों से ट्रांसफर कर USDT या किसी अन्य क्रिप्टोकरेंसी में कन्वर्ट किया जा सके।

बैंक कर्मचारियों की मिलीभगत की आशंका
एफआईआर में साफ तौर पर आशंका जताई गई है कि अज्ञात व्यक्तियों ने बैंक कर्मचारियों के साथ मिलकर षड्यंत्रपूर्वक खाते खुलवाए। इसी आधार पर पुलिस ने BNS (भारतीय न्याय संहिता) की धोखाधड़ी, आपराधिक षड्यंत्र और आईटी एक्ट की धाराओं में मामला दर्ज किया है।
अब साइबर पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि इतने कम समय में बड़ी संख्या में खाते किस प्रक्रिया के तहत खोले गए, KYC किसने सत्यापित की, दस्तावेज किसने स्वीकार किए और क्या बैंक के मॉनिटरिंग सिस्टम ने कभी कोई अलर्ट जारी किया था या नहीं?

बैंक खातों से जुड़े डॉक्यूमेंट्स की फॉरेंसिक जांच भी चल रही है।
डॉक्यूमेंट की होगी फॉरेंसिक जांच
साइबर पुलिस ने संदिग्ध खातों की KYC में आवेदन, सिग्नेचर, फोटो, मोबाइल नंबर, पता, आधार-पैन का क्रॉस वेरिफिकेशन शुरू कर दी है। जांच होगी कि एक ही मोबाइल, पते या दस्तावेज से कितने खाते खुले। खाताधारकों की लोकेशन और बैंक आने-जाने की गतिविधि भी खंगाली जा रही है। ट्रांजैक्शन ट्रेल से पैसा कहां से आया और आखिर किस तक पहुंचा, यह भी जांचा जाएगा।
दौसा जिले के 5 और बैंक भी जांच के घेरे में
साइबर पुलिस को कुछ ऐसे इनपुट भी मिले हैं कि म्यूल अकाउंट का नेटवर्क केवल एक बैंक तक सीमित नहीं है। ऐसे में दौसा और लालसोट के करीब 5 बैंक की कई ब्रांच भी रडार पर हैं।
दूसरे बैंकों और उनकी शाखाओं के डेटा का भी मिलान किया जा रहा है। अगर समान पैटर्न मिलता है तो जांच का दायरा कई जिलों और कई बैंक शाखाओं तक बढ़ सकता है।
अधिकारी बोले- पूरे नेटवर्क का हो सकता है खुलासा
डीआईजी साइबर पुलिस शांतनु कुमार ने बताया कि पूरे मामले की जांच के लिए दौसा में हमारी विशेष टीम भेजी गई है। फिलहाल जांच शुरुआती चरण में है।
जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ेगी, साइबर ठगी के पूरे नेटवर्क की परतें खुलेंगी। हमारी कोशिश केवल खातों की जांच तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे म्यूल अकाउंट नेटवर्क का पर्दाफाश करना है।

एडीजी साइबर क्राइम वीके सिंह ने बताया- हमें इस संबंध में शिकायत प्राप्त हुई थी, जिसके आधार पर FIR दर्ज कर विस्तृत जांच शुरू की गई है।
जांच के दौरान संदिग्ध म्यूल खातों से जुड़े सभी पहलुओं की पड़ताल की जा रही है। यह म्यूल अकाउंट नेटवर्क के खिलाफ बड़ी कार्रवाई है।