सरकारी स्कूलों में बच्चों को बेहतर और सुरक्षित माहौल में पढ़ाने के दावों की परतें बारिश ने खोली दी। जिले के 51 से ज्यादा स्कूल भवन जर्जर हैं, जबकि 25 से अधिक भवनविहीन हैं।
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कई स्कूलों में छत से पानी टपक रहा है तो कहीं कमरों की कमी के कारण बच्चों को खुले में बैठाना पड़ रहा है। बारिश होने पर कक्षाएं लगाना मुश्किल हो जाता है और शिक्षकों को मजबूरी में बच्चों की छुट्टी करनी पड़ती है।
सबसे गंभीर स्थिति यह है कि जिला शिक्षा केंद्र ने 325 स्कूल भवनों की मरम्मत के लिए प्रस्ताव भेजा था, लेकिन शासन से महज 9 स्कूलों की मरम्मत के लिए राशि स्वीकृत हुई।

जिले के 51 से ज्यादा स्कूल जर्जर, 25 से अधिक भवनविहीन
अतिरिक्त कक्ष मिल जाएं तो बच्चों को बेहतर माहौल में पढ़ाया जा सकता है
छात्र संख्या 102 सालेगढ़ का प्राथमिक स्कूल कभी अपने नवाचार और बेहतर शैक्षणिक कार्यों के कारण जिले में मॉडल स्कूल के तौर पर पहचान बना चुका है। वर्ष 2020 में भारत सरकार के इस्पात मंत्रालय ने स्कूल पर डॉक्यूमेंट्री बनाई थी। यहां के शिक्षक नीरज सक्सेना को वर्ष 2022 में राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार भी मिल चुका है। बावजूद इसके स्कूल में सिर्फ दो छोटे कमरे हैं।
इनकी क्षमता करीब 40 बच्चों की है, जबकि दर्ज संख्या 102 है। सामान्य दिनों में इन्हें खुले मैदान या पेड़ के नीचे बैठाकर पढ़ाना पड़ता है। बारिश में पढ़ाई प्रभावित होती है। शिक्षक नीरज सक्सेना का कहना है कि स्कूल को सिर्फ दो अतिरिक्त कक्ष मिल जाएं तो बच्चों को बेहतर माहौल में पढ़ाया जा सकता है। इसके लिए कई बार मांग की, लेकिन समाधान नहीं हुआ।
जर्जर भवन, अब अतीक खां की दालान में क्लास
जन शिक्षा केंद्र ईंटखेड़ी के अंतर्गत उमरई टोला का प्राथमिक स्कूल पिछले चार साल से जर्जर है। भवन की हालत ऐसी है कि बच्चों को वहां बैठाकर पढ़ाना जोखिम भरा है। स्कूल के शिक्षक तरण जाटव के सामने हर साल बच्चों को पढ़ाने के लिए नया ठिकाना तलाशने की मजबूरी रहती है।
वर्तमान में गांव के अतीक खां के पुराने मकान की दालान में कक्षाएं लग रही हैं। 24 बच्चे इसी वैकल्पिक व्यवस्था में पढ़ रहे हैं। शिक्षक के अनुसार नए भवन के लिए वरिष्ठ अधिकारियों को कई बार आवेदन दिए गए, लेकिन अब तक बजट स्वीकृत नहीं हुआ।
अब 9 स्कूलों की मरम्मत के लिए बजट मिला है
जिले के 325 स्कूल भवनों की मरम्मत और जर्जर हो चुके 10 भवनों के पुनर्निर्माण के लिए राज्य शिक्षा केंद्र से बजट मांगा गया था। हाल ही में 9 स्कूलों की मरम्मत और 2 नए भवनों के निर्माण की स्वीकृति मिली है। शेष के लिए पत्राचार जारी है। -विनोद राजपूत, सब इंजीनियर, जिला शिक्षा केंद्र, रायसेन