राजस्थान: 322 नेता पंचायत चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य: पूर्व मंत्री के बेटे-बेटी का भी नाम, 5 साल का बैन लगाया; देखिए पूरी लिस्ट - Rajasthan News

Published on 8 अक्टू॰ 2026

राजस्थान में पूर्व मंत्री के बेटे-बेटी सहित 322 पूर्व सरपंच, उपसरपंच, पंच और प्रधान इस बार चुनाव नहीं लड़ पाएंगे। पंचायतीराज विभाग ने एक लिस्ट तैयार करके राज्य निर्वाचन आयोग को भेजी थी। विभाग ने आयोग से जनप्रतिनिधियों को 5 वर्ष के लिए चुनाव लड़ने से

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लिस्ट में पूर्ववर्ती गहलोत सरकार में मंत्री रहीं जाहिदा खान के बेटे और बेटी का नाम भी शामिल है। इन पर अनियमितता के आरोप लगे थे। राज्य निर्वाचन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि पंचायती राज ने अयोग्य ठहराए गए जनप्रतिनिधि चुनाव नहीं लड़ पाएंगे। पढ़िए पूरी रिपोर्ट...

पहले जानते हैं जाहिदा खान के बेटे-बेटी का मामला

बेटा साजिद खान, पूर्व पहाड़ी प्रधान

मामला क्या था? : पूर्व मंत्री के बेटे साजिद खान सितंबर 2021 में भरतपुर (वर्तमान डीग) जिले की पहाड़ी पंचायत समिति से निर्विरोध प्रधान चुने गए थे। साजिद पर 2 आरोप लगे थे। पहला आरोप था कि पिछले विधानसभा चुनाव की आचार संहिता के दौरान विकास कार्यों के लिए 54 लाख रुपए का भुगतान कर दिया गया।

वित्तीय शक्तियां नहीं होने के बाद भी 4 करोड़ 50 लाख का भुगतान प्रधान की ओर से किया गया था। साथ ही एफएफसी योजना में ग्रेवल सड़क (एक तरह से कच्ची सड़क) अनुमत नहीं होने के बाद भी भी ग्रेवल सड़क की स्वीकृति निकालकर 5 लाख का भुगतान कर दिया।

दूसरा आरोप यह था कि पहाड़ी पंचायत समिति का प्रधान अवैध खनन करवा रहा है। भरतपुर जिले के सामाजिक कार्यकर्ता विजय मिश्रा ने खोह पुलिस थाने में साजिद खान के खिलाफ शिकायत भी दर्ज कराई थी।

सरकार का एक्शन: राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद फरवरी 2024 में भजनलाल सरकार ने अनियमितता के आरोपों के चलते साजिद खान को प्रधान पद से निलंबित कर दिया था।

बेटी शहनाज खान, पूर्व कामां प्रधान

मामला क्या था?: पूर्व मंत्री जाहिदा खान की बेटी शहनाज खान पर पद पर रहते हुए अनियमित भुगतान और विभिन्न योजनाओं की स्वीकृतियां जारी करने में गड़बड़ियों का आरोप लगा था। ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग के अतिरिक्त आयुक्त एवं शासन उप सचिव द्वितीय (जांच) ने जारी आदेश में कहा- कामां पंचायत समिति में अनियमित भुगतान करने एवं विभिन्न योजनाओं में स्वीकृतियां जारी करने में गड़बड़ी की है।

सदस्यता समाप्त : राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा 38(4) के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए शहनाज खान को 6 मार्च, 2024 को ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग ने प्रधान के पद से निलंबित कर दिया था। इसके बाद अगस्त 2025 में पंचायती राज विभाग ने शहनाज खान की कामां पंचायत समिति (वार्ड संख्या-13) की सदस्यता भी रद्द कर दी थी।

इस संबंध में पूर्व मंत्री जाहिदा खान को फोन किया, लेकिन उन्होंने कॉल रिसीव नहीं किया।

राज्य निर्वाचन आयोग ने मांगा था ब्योरा

दरअसल, राज्य निर्वाचन आयोग ने पंचायती राज विभाग को सितंबर, 2026 को चिट्ठी लिखी थी। चिट्ठी में जनप्रतिनिधियों से जुड़ा ब्योरा मांगा था।

  • ऐसे जनप्रतिनिधि, जिन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान सरकारी फंड में वित्तीय अनियमितता की हो।
  • पंचायती राज के नियमों के तहत भ्रष्टाचार, गबन और पद के दुरुपयोग के मामले में सजा हुई हो।
  • अपने कार्यकाल का पूरा रिकाॅर्ड, वित्तीय ऑडिट या बकाया राशि जमा नहीं कराया हो।
  • आयोग के निर्देश पर पंयातीराज राज विभाग ने सभी संभागीय आयुक्तों को चिट्टी लिखकर ब्योरा देने के निर्देश दिए थे।
  • पंचायती राज विभाग ने 7 अक्टूबर, 2026 को आयोग को सूची भेज दी।

राज्य निर्वाचन आयोग के सचिव बोले- अयोग्य ठहराए लोग नहीं लड़ पाएंगे चुनाव

राज्य निर्वाचन आयोग के सचिव राजेश वर्मा का कहना है कि पंचायती राज विभाग से अयोग्य ठहराए गए लोगों की लिस्ट मिल गई है। आयोग ऐसे व्यक्तियों को चुनाव लड़ने पर रोक लगाएगा। जो अयोग्य ठहराए गए हैं, वे चुनाव नहीं लड़ पाएंगे। सभी जिला निर्वाचन अधिकारियों को लिस्ट भेज दी है।

पंचायती राज विभाग के सचिव जोगाराम का कहना है कि संभागीय आयुक्त उन जन प्रतिनिधियों को चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य ठहराता है, जिनके खिलाफ वित्तीय अनियमितता के मामले चल रहे हो।

क्या कहता है कानून?

कानूनी मामलों के जानकार एडवोकेट प्रतीक कासलीवाल का कहना है कि राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 के तहत वित्तीय अनियमितता, गबन या भ्रष्टाचार के मामलों में लिप्त होने पर किसी भी जनप्रतिनिधि (जैसे सरपंच, प्रधान, या सदस्य) के चुनाव लड़ने पर कड़ी रोक (अयोग्यता) का प्रावधान है।

पूरी लिस्ट यहां देखिए

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जयपुर संभाग

भरतपुर संभाग