Kapil Dev Agarwal MLA Fund Report में मुजफ्फरनगर विधानसभा क्षेत्र की चार वित्तीय वर्षों की विधायक निधि कार्य-प्रगति की विस्तृत तस्वीर सामने आती है। उत्तर प्रदेश ग्राम्य विकास विभाग की विधानमंडल क्षेत्र विकास निधि योजना से संबंधित चार आधिकारिक विधायकवार PDF रिपोर्टों के अनुसार वित्तीय वर्ष 2023-24 से 2026-27 तक कपिल देव अग्रवाल के नाम से कुल 321 विकास कार्यों की संस्तुति दर्ज हुई। इनमें से 251 प्रस्तावों को प्रशासनिक स्वीकृति मिली, 69 प्रस्ताव निरस्त हुए और एक प्रस्ताव संबंधित रिपोर्ट की तारीख तक लंबित था।
चार वर्षों की रिपोर्ट में कपिल देव अग्रवाल के विधायक निधि प्रस्तावों का प्रदर्शन एक समान नहीं रहा। वर्ष 2023-24 में उनके सभी 89 प्रस्ताव स्वीकृत हुए। इसके बाद 2024-25 में 91 में से 69 काम मंजूर हुए और 22 प्रस्ताव निरस्त हुए। वर्ष 2025-26 में 99 कार्य प्रस्तावित किए गए, जिनमें 53 को स्वीकृति मिली, 45 निरस्त हुए और एक लंबित रहा। वर्ष 2026-27 की जुलाई तक की रिपोर्ट में 42 प्रस्ताव दर्ज हुए, जिनमें 40 स्वीकृत और दो निरस्त थे।
इस तरह चार वर्षों में अनुशंसित कुल कार्यों के मुकाबले उनकी समग्र स्वीकृति दर लगभग 78.19 प्रतिशत रही। निरस्त कार्यों का हिस्सा करीब 21.50 प्रतिशत है, जबकि लंबित प्रस्तावों की हिस्सेदारी केवल 0.31 प्रतिशत दर्ज हुई। हालांकि, यह रिपोर्ट रुपये में आवंटित या खर्च की गई विधायक निधि नहीं बताती। इसमें केवल प्रस्तावों की प्रशासनिक स्थिति दर्ज है। इसलिए इसे कपिल देव अग्रवाल की विधायक निधि की कार्य स्वीकृति रिपोर्ट के रूप में पढ़ा जाना चाहिए, न कि अंतिम वित्तीय व्यय रिपोर्ट के रूप में।
Kapil Dev Agarwal MLA Fund Report: चार वर्षों का वर्षवार विवरण
| वित्तीय वर्ष | अनुशंसित कार्य | कुल लंबित | कुल स्वीकृत | निरस्त कार्य | स्वीकृति प्रतिशत |
|---|---|---|---|---|---|
| 2023-24 | 89 | 0 | 89 | 0 | 100% |
| 2024-25 | 91 | 0 | 69 | 22 | 75.82% |
| 2025-26 | 99 | 1 | 53 | 45 | 53.54% |
| 2026-27 | 42 | 0 | 40 | 2 | 95.24% |
| कुल | 321 | 1 | 251 | 69 | 78.19% |
यह तालिका चारों आधिकारिक रिपोर्टों की क्रम संख्या 14 वाली पंक्ति पर आधारित है। हर वर्ष की स्थिति उस समय की है जब संबंधित रिपोर्ट निर्यात की गई थी। पुरानी रिपोर्टों में लंबित दिखाया गया कोई प्रस्ताव बाद में स्वीकृत या निरस्त हो सकता है, इसलिए इसे समय-विशेष की प्रशासनिक स्थिति के रूप में समझना चाहिए।
2023-24 में सभी 89 विकास कार्यों को मिली मंजूरी
वित्तीय वर्ष 2023-24 की आधिकारिक विधायकवार रिपोर्ट में क्रम संख्या 14 पर कपिल देव अग्रवाल, मुजफ्फरनगर विधानसभा और नोडल जनपद मुजफ्फरनगर दर्ज है। उनके नाम के सामने 89 अनुशंसित और 89 स्वीकृत कार्य दर्ज हैं। किसी प्रस्ताव को लंबित या निरस्त नहीं दिखाया गया।
वर्ष 2023-24 के प्रमुख आंकड़े
| विवरण | कार्यों की संख्या |
|---|---|
| कुल अनुशंसित कार्य | 89 |
| कुल स्वीकृत कार्य | 89 |
| लंबित कार्य | 0 |
| निरस्त कार्य | 0 |
| स्वीकृति दर | 100 प्रतिशत |
यह कपिल देव अग्रवाल के लिए चार वर्षों का सबसे मजबूत प्रशासनिक प्रदर्शन रहा। उनके सभी प्रस्ताव पात्र पाए गए और शत-प्रतिशत स्वीकृति मिली।
विधायक निधि के किसी प्रस्ताव को मंजूरी मिलने से पहले जिला प्रशासन कई स्तरों पर जांच करता है। प्रस्तावित भूमि सार्वजनिक है या नहीं, कार्य योजना के नियमों में पात्र है या नहीं, तकनीकी लागत सही है या नहीं और संबंधित काम किसी दूसरी सरकारी योजना में पहले से स्वीकृत तो नहीं है—इन सभी पहलुओं की जांच होती है।
ऐसे में सभी 89 प्रस्तावों का मंजूर होना बताता है कि वित्तीय वर्ष 2023-24 में भेजी गई संस्तुतियां प्रशासनिक और तकनीकी स्तर पर स्वीकार्य रहीं।
हालांकि, स्वीकृति को निर्माण पूर्ण होने के बराबर नहीं माना जा सकता। रिपोर्ट में यह नहीं बताया गया कि इन 89 कार्यों में कितने शुरू हुए, कितने पूरे हुए और कितना भुगतान किया गया। इसके लिए कार्य-प्रगति तथा वित्तीय व्यय की दूसरी रिपोर्टों की जरूरत होगी।
2024-25 में 91 प्रस्ताव, 69 स्वीकृत और 22 निरस्त
वित्तीय वर्ष 2024-25 में कपिल देव अग्रवाल के नाम से 91 कार्यों की संस्तुति दर्ज हुई। इनमें 69 कार्य स्वीकृत किए गए और 22 प्रस्ताव निरस्त रहे। रिपोर्ट में कोई प्रस्ताव स्वीकृति के लिए लंबित नहीं दिखाया गया।
वर्ष 2024-25 की स्थिति
| विवरण | कार्यों की संख्या |
|---|---|
| अनुशंसित कार्य | 91 |
| कुल स्वीकृत कार्य | 69 |
| लंबित कार्य | 0 |
| निरस्त कार्य | 22 |
| स्वीकृति प्रतिशत | 75.82 प्रतिशत |
इस वर्ष कुल अनुशंसित कार्यों में लगभग तीन-चौथाई को मंजूरी मिली। वहीं करीब 24.18 प्रतिशत प्रस्ताव निरस्त हुए।
रिपोर्ट में स्वीकृत कार्यों को समय अवधि के आधार पर भी वर्गीकृत किया गया है। उपलब्ध पंक्ति के अनुसार 69 स्वीकृत कार्य अलग-अलग समयावधि में मंजूर हुए। इनमें कुछ प्रस्ताव 45 दिन के भीतर और कुछ को अधिक समय में प्रशासनिक स्वीकृति मिली।
22 प्रस्ताव निरस्त होने के संभावित कारण
रिपोर्ट में निरस्त प्रस्तावों के नाम या कारण नहीं बताए गए हैं। सामान्य तौर पर विधायक निधि का प्रस्ताव इन परिस्थितियों में निरस्त हो सकता है—
- प्रस्तावित भूमि निजी या विवादित हो।
- वही काम दूसरी सरकारी योजना में पहले से मंजूर हो।
- प्रस्ताव योजना के पात्र कार्यों की सूची में न आता हो।
- तकनीकी आगणन या स्थल विवरण अधूरा हो।
- उपलब्ध विधायक निधि की तुलना में प्रस्तावों की लागत अधिक हो।
- निर्माण स्थल किसी अन्य विभाग के अधिकार क्षेत्र में हो।
- जनोपयोगिता स्पष्ट न हो।
- प्रस्तावित संस्था या भवन सार्वजनिक श्रेणी में न आता हो।
इसलिए केवल निरस्त प्रस्तावों की संख्या के आधार पर विधायक या प्रशासन को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं होगा। सही निष्कर्ष के लिए प्रत्येक प्रस्ताव का नाम, लागत, स्थान और निरस्तीकरण का कारण सार्वजनिक होना चाहिए।
2025-26 में स्वीकृति दर घटी, 45 प्रस्ताव निरस्त
वित्तीय वर्ष 2025-26 में कपिल देव अग्रवाल के नाम से चार वर्षों में सबसे अधिक 99 विकास कार्यों की संस्तुति हुई। इनमें 53 प्रस्तावों को स्वीकृति मिली, एक प्रस्ताव लंबित रहा और 45 प्रस्ताव निरस्त किए गए।
वर्ष 2025-26 के प्रमुख आंकड़े
| विवरण | कार्यों की संख्या |
|---|---|
| अनुशंसित कार्य | 99 |
| लंबित कार्य | 1 |
| स्वीकृत कार्य | 53 |
| निरस्त कार्य | 45 |
| स्वीकृति प्रतिशत | 53.54 प्रतिशत |
| निरस्तीकरण प्रतिशत | 45.45 प्रतिशत |
यह चारों वर्षों में सबसे कमजोर स्वीकृति अनुपात वाला वर्ष रहा। लगभग हर दो प्रस्तावों में से एक स्वीकृत हुआ और दूसरा निरस्त या लंबित रहा।
रिपोर्ट में एक प्रस्ताव 60 दिन से अधिक समय से लंबित दिखाई देता है। वहीं स्वीकृत 53 कामों में अलग-अलग समयावधि में मंजूर किए गए प्रस्ताव शामिल हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार चार कार्य 45 दिन के भीतर, आठ कार्य 45 से 60 दिन के बीच और 41 कार्य 60 दिन के बाद स्वीकृत हुए।
इसका अर्थ है कि स्वीकृत 53 कार्यों में लगभग 77.36 प्रतिशत को प्रशासनिक मंजूरी मिलने में 60 दिन से अधिक समय लगा।
स्वीकृति में देरी ने उठाए सवाल
यदि 41 कार्यों को मंजूरी मिलने में दो महीने से अधिक लगे तो यह प्रस्तावों की तकनीकी जांच, भूमि सत्यापन और प्रशासनिक प्रक्रिया की रफ्तार पर सवाल खड़ा करता है।
देरी के कई कारण हो सकते हैं—
- प्रस्ताव अधूरा होना।
- तकनीकी अनुमान समय पर तैयार न होना।
- भूमि का स्वामित्व स्पष्ट न होना।
- कार्यदायी संस्था के चयन में समय लगना।
- प्रस्तावों की संख्या अधिक होना।
- संबंधित विभाग से अनापत्ति प्रमाणपत्र का इंतजार।
- पुराने कार्यों की उपयोगिता प्रमाणपत्र प्रक्रिया लंबित होना।
प्रशासन को 60 दिन से अधिक समय में स्वीकृत हुए कार्यों की अलग सूची सार्वजनिक करनी चाहिए। इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि देरी किस स्तर पर हुई।
45 निरस्त कार्य चार वर्षों में सबसे अधिक
वर्ष 2025-26 में 45 प्रस्तावों का निरस्त होना कपिल देव अग्रवाल की चार वर्षीय रिपोर्ट का सबसे बड़ा नकारात्मक आंकड़ा है। कुल 99 प्रस्तावों में लगभग 45.45 प्रतिशत कार्य मंजूरी तक नहीं पहुंच सके।
वर्ष 2024-25 के 22 निरस्त प्रस्तावों को मिलाकर दो वर्षों में कुल 67 कार्य निरस्त हुए। इससे संकेत मिलता है कि प्रस्ताव तैयार करने से पहले पात्रता, भूमि और तकनीकी मानकों की अधिक सघन जांच की जरूरत थी।
यदि निरस्त कार्यों को समय रहते संशोधित करके दोबारा प्रस्तुत किया जाता तो क्षेत्र में अधिक विकास परियोजनाओं को मंजूरी मिल सकती थी।
2026-27 में स्वीकृति दर फिर बढ़कर 95 प्रतिशत से अधिक
वित्तीय वर्ष 2026-27 की रिपोर्ट में कपिल देव अग्रवाल के नाम से 42 विकास कार्यों की संस्तुति दर्ज है। इनमें 40 कार्य स्वीकृत और दो प्रस्ताव निरस्त दिखाए गए हैं। कोई प्रस्ताव लंबित नहीं है।
वर्ष 2026-27 की स्थिति
| विवरण | कार्यों की संख्या |
|---|---|
| अनुशंसित कार्य | 42 |
| स्वीकृत कार्य | 40 |
| लंबित कार्य | 0 |
| निरस्त कार्य | 2 |
| स्वीकृति प्रतिशत | 95.24 प्रतिशत |
यह प्रदर्शन 2025-26 के मुकाबले काफी बेहतर है। स्वीकृति दर 53.54 प्रतिशत से बढ़कर 95.24 प्रतिशत हो गई, जबकि निरस्त प्रस्तावों की संख्या 45 से घटकर केवल दो रह गई।
रिपोर्ट के अनुसार 40 स्वीकृत कार्यों में 12 को 45 दिन के भीतर, 17 को 45 से 60 दिन के बीच और 11 को 60 दिन से अधिक समय में मंजूरी मिली।
इस आधार पर—
- 30 प्रतिशत कार्य 45 दिन के भीतर स्वीकृत हुए।
- 42.50 प्रतिशत कार्य 45 से 60 दिन में स्वीकृत हुए।
- 27.50 प्रतिशत कार्य 60 दिन के बाद स्वीकृत हुए।
यह वर्ष अभी जारी है। रिपोर्ट 13 जुलाई 2026 को निर्यात की गई थी, इसलिए 2026-27 के आंकड़ों को पूरे वित्तीय वर्ष का अंतिम परिणाम नहीं माना जाना चाहिए। जुलाई के बाद नए प्रस्ताव, स्वीकृतियां और भुगतान दर्ज हो सकते हैं।
चार वर्षों में 321 प्रस्तावों की बदलती तस्वीर
कपिल देव अग्रवाल की विधायक निधि रिपोर्ट में वर्षवार बड़ा उतार-चढ़ाव दिखाई देता है।
प्रस्तावों की संख्या
| वित्तीय वर्ष | प्रस्तावित कार्य |
|---|---|
| 2023-24 | 89 |
| 2024-25 | 91 |
| 2025-26 | 99 |
| 2026-27 | 42 |
वर्ष 2025-26 में सर्वाधिक 99 प्रस्ताव दिए गए। वहीं 2026-27 की जुलाई तक 42 कार्यों की संस्तुति दर्ज हुई।
स्वीकृत कार्य
| वित्तीय वर्ष | स्वीकृत कार्य |
|---|---|
| 2023-24 | 89 |
| 2024-25 | 69 |
| 2025-26 | 53 |
| 2026-27 | 40 |
सबसे अधिक 89 स्वीकृत कार्य वर्ष 2023-24 में रहे। 2025-26 में प्रस्ताव सबसे अधिक थे, लेकिन मंजूरी केवल 53 को मिली।
निरस्त कार्य
| वित्तीय वर्ष | निरस्त कार्य |
|---|---|
| 2023-24 | 0 |
| 2024-25 | 22 |
| 2025-26 | 45 |
| 2026-27 | 2 |
निरस्त कार्यों का आंकड़ा 2025-26 में सबसे अधिक रहा। इसके बाद 2026-27 में इसमें तेज गिरावट आई।
चार वर्षों की समग्र स्वीकृति दर
चारों वित्तीय वर्षों में कुल 321 प्रस्तावों के मुकाबले 251 स्वीकृत हुए। इस आधार पर समग्र स्वीकृति दर 78.19 प्रतिशत है।
| समग्र स्थिति | संख्या | प्रतिशत |
|---|---|---|
| कुल अनुशंसित कार्य | 321 | 100% |
| स्वीकृत कार्य | 251 | 78.19% |
| निरस्त कार्य | 69 | 21.50% |
| लंबित कार्य | 1 | 0.31% |
इन आंकड़ों से यह सामने आता है कि लगभग हर पांच में चार प्रस्ताव स्वीकृत हुए। हालांकि, पांचवां प्रस्ताव निरस्त या लंबित रहा।
स्वीकृति दर संतोषजनक दिखाई देती है, लेकिन असली आकलन के लिए यह जानना जरूरी है कि 251 स्वीकृत कामों में कितने शुरू हुए, कितने पूरे हुए और कितनी धनराशि खर्च हुई।
क्या 251 स्वीकृत कार्य पूरे हो चुके हैं?
नहीं। “स्वीकृत” और “पूर्ण” दो अलग प्रशासनिक स्थितियां हैं।
किसी कार्य की स्वीकृति के बाद भी कई चरण बाकी रहते हैं—
- तकनीकी आगणन को अंतिम रूप देना
- कार्यदायी संस्था तय करना
- निविदा प्रक्रिया पूरी करना
- पहली किस्त जारी करना
- निर्माण शुरू कराना
- भौतिक प्रगति की जांच
- निर्माण पूरा करना
- गुणवत्ता परीक्षण
- उपयोगिता प्रमाणपत्र जमा करना
- अंतिम भुगतान
इसलिए 251 स्वीकृत कार्यों को पूर्ण कार्य या वास्तविक खर्च नहीं माना जा सकता।
विधायक निधि में वास्तविक खर्च का विवरण उपलब्ध नहीं
चारों आधिकारिक PDF रिपोर्टों में रुपये के रूप में वित्तीय आंकड़े नहीं दिए गए हैं। इनमें निम्न जानकारी उपलब्ध नहीं है—
- प्रति वर्ष जारी विधायक निधि।
- पिछले वर्ष की शेष राशि।
- कुल उपलब्ध निधि।
- स्वीकृत कार्यों की लागत।
- वास्तविक भुगतान।
- प्रतिबद्ध धनराशि।
- शेष निधि।
- प्रति कार्य औसत लागत।
इसलिए इस रिपोर्ट के आधार पर यह नहीं कहा जा सकता कि कपिल देव अग्रवाल ने चार वर्षों में कितने करोड़ रुपये खर्च किए।
वर्षवार राज्यस्तरीय विधायक निधि रिपोर्टों को यहां पढ़ा जा सकता है—
- UP MLA Fund Report 2023-24
- UP MLA Fund Report 2024-25
- UP MLA Fund Report 2025-26
- UP MLA Fund Report 2026-27
विधायक निधि से जुड़ी सभी रिपोर्टों के लिए उत्तर प्रदेश विधायक निधि विशेष पेज देखा जा सकता है।
ताजा विधायकवार और जनपदवार आधिकारिक डेटा MLALAD उत्तर प्रदेश के आधिकारिक पोर्टल पर उपलब्ध है।
कपिल देव अग्रवाल का राजनीतिक परिचय
UttarPradesh.org पर उपलब्ध विधायक प्रोफाइल के अनुसार कपिल देव अग्रवाल का जन्म 6 जून 1963 को मुजफ्फरनगर जिले में हुआ। उन्होंने स्नातक तक शिक्षा प्राप्त की और उद्योग तथा व्यापार से जुड़े रहे। सामाजिक क्षेत्र में वह वैश्य सभा, रोटरी क्लब, भारत विकास परिषद और स्थानीय उद्योग संगठनों से भी जुड़े रहे हैं।
उनका विस्तृत जीवन परिचय और राजनीतिक सफर यहां पढ़ा जा सकता है—
कपिल देव अग्रवाल का विधायक प्रोफाइल, जीवन परिचय और राजनीतिक सफर
उपचुनाव से शुरू हुआ विधानसभा का सफर
कपिल देव अग्रवाल पहली बार वर्ष 2016 में मुजफ्फरनगर विधानसभा उपचुनाव जीतकर विधायक बने। इसके बाद 2017 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने दोबारा जीत दर्ज की।
वर्ष 2019 में उन्हें उत्तर प्रदेश सरकार में व्यावसायिक शिक्षा एवं कौशल विकास विभाग की जिम्मेदारी मिली। मार्च 2022 में वह तीसरी बार विधायक निर्वाचित हुए और योगी आदित्यनाथ सरकार में दोबारा मंत्री बने।
तीन बार विधायक बनने का उनका राजनीतिक सफर मुजफ्फरनगर शहर में भाजपा के मजबूत संगठन, व्यापारी वर्ग में पकड़ और स्थानीय सामाजिक नेटवर्क से जुड़ा रहा है।
मुजफ्फरनगर विधानसभा चुनाव 2022 का परिणाम
वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में कपिल देव अग्रवाल ने भाजपा के टिकट पर मुजफ्फरनगर सीट से चुनाव लड़ा। उनके सामने राष्ट्रीय लोक दल के सौरभ स्वरूप प्रमुख प्रतिद्वंद्वी थे।
UttarPradesh.org की चुनाव परिणाम रिपोर्ट के अनुसार कपिल देव अग्रवाल को 1,11,794 मत मिले और उन्होंने सौरभ स्वरूप को 18,694 मतों के अंतर से हराया। इस जीत के साथ वह तीसरी बार उत्तर प्रदेश विधानसभा पहुंचे।
मुजफ्फरनगर विधानसभा चुनाव 2022 का पूरा परिणाम
मुजफ्फरनगर विधानसभा चुनाव 2022
| प्रत्याशी | दल | प्राप्त मत/स्थिति |
|---|---|---|
| कपिल देव अग्रवाल | भारतीय जनता पार्टी | 1,11,794 |
| सौरभ स्वरूप | राष्ट्रीय लोक दल | दूसरे स्थान पर |
| जीत का अंतर | — | 18,694 मत |
मुजफ्फरनगर जिले की छह विधानसभा सीटों में 2022 में भाजपा को केवल मुजफ्फरनगर और खतौली सीट पर जीत मिली थी। बाकी चार सीटों पर सपा-रालोद गठबंधन ने कब्जा किया। बाद में खतौली उपचुनाव में यह सीट भी रालोद के पास चली गई।
मंत्री और विधायक के रूप में दोहरी जिम्मेदारी
कपिल देव अग्रवाल केवल विधायक ही नहीं, उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री भी हैं। इसलिए उनके सामने विधानसभा क्षेत्र के स्थानीय विकास और राज्यस्तरीय विभागीय जिम्मेदारी—दोनों को संभालने की चुनौती रहती है।
विधायक निधि के तहत उनकी भूमिका क्षेत्र में छोटे लेकिन जरूरी सार्वजनिक कार्यों की पहचान और संस्तुति करना है। इनमें सड़क, नाली, विद्यालय, सार्वजनिक भवन, पेयजल और सामुदायिक सुविधाएं शामिल हो सकती हैं।
चार वर्षों में 321 प्रस्तावों की संस्तुति यह दिखाती है कि क्षेत्र में बड़ी संख्या में छोटे विकास कार्यों की मांग रही। हालांकि, 69 प्रस्तावों का निरस्त होना प्रस्ताव तैयार करने और प्रशासनिक समन्वय में सुधार की जरूरत भी बताता है।
मुजफ्फरनगर शहर की विकास प्राथमिकताएं
मुजफ्फरनगर विधानसभा क्षेत्र मुख्यतः शहरी और अर्धशहरी प्रकृति का है। यहां विधायक निधि की जरूरत ग्रामीण विधानसभा क्षेत्रों से अलग हो सकती है।
सड़क और गलियों का निर्माण
शहर की घनी आबादी वाली कॉलोनियों में सीसी रोड, इंटरलॉकिंग, गलियों की मरम्मत और संपर्क मार्ग सबसे सामान्य मांगों में शामिल रहते हैं।
जल निकासी
बरसात में जलभराव मुजफ्फरनगर शहर की प्रमुख समस्याओं में से एक है। छोटी नालियों, क्रॉस ड्रेन और जल निकासी व्यवस्था के काम विधायक निधि से प्रस्तावित किए जा सकते हैं।
विद्यालय और सार्वजनिक संस्थाएं
सरकारी विद्यालयों में अतिरिक्त कक्ष, चहारदीवारी, शौचालय, पेयजल और फर्नीचर जैसी सुविधाएं भी विधायक निधि से विकसित की जा सकती हैं।
स्वास्थ्य सुविधाएं
सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में मरीज शेड, प्रतीक्षालय, छोटी आधारभूत सुविधाएं और उपकरण उपलब्ध कराने के प्रस्ताव भी दिए जा सकते हैं।
सामुदायिक सुविधाएं
सामुदायिक भवन, यात्री शेड, सार्वजनिक बैठने की व्यवस्था और सार्वजनिक स्थलों के विकास में विधायक निधि का उपयोग हो सकता है।
69 निरस्त प्रस्तावों की सूची सार्वजनिक हो
चार वर्षों में कुल 69 प्रस्ताव निरस्त हुए। इनमें से 67 केवल 2024-25 और 2025-26 में निरस्त हुए।
जनता के लिए यह जानना जरूरी है कि—
- कौन-से काम निरस्त हुए?
- वे किस गांव, वार्ड या मोहल्ले से जुड़े थे?
- प्रस्तावित लागत कितनी थी?
- निरस्तीकरण का कारण क्या था?
- क्या संशोधित प्रस्ताव दोबारा भेजा गया?
- संबंधित क्षेत्र के लिए कोई वैकल्पिक काम मंजूर हुआ?
यदि यह जानकारी सार्वजनिक की जाती है तो विधायक निधि के उपयोग में पारदर्शिता बढ़ेगी और बार-बार अपात्र प्रस्ताव भेजे जाने से बचा जा सकेगा।
251 स्वीकृत कार्यों का भौतिक सत्यापन जरूरी
रिपोर्ट में 251 स्वीकृत कार्य हैं, लेकिन उनकी भौतिक प्रगति इस डेटा में नहीं है।
पारदर्शिता के लिए हर स्वीकृत कार्य के साथ पोर्टल पर यह जानकारी दिखाई जानी चाहिए—
इससे नागरिक अपने क्षेत्र में विधायक निधि के कामों की मौके पर जांच कर सकेंगे।
चार वर्षों की रिपोर्ट से क्या तस्वीर सामने आती है?
कपिल देव अग्रवाल की चार वर्षीय विधायक निधि रिपोर्ट का सबसे मजबूत वर्ष 2023-24 रहा, जब सभी 89 प्रस्ताव स्वीकृत हुए। वर्ष 2024-25 में स्वीकृति दर घटकर लगभग 76 प्रतिशत रह गई। वर्ष 2025-26 में स्वीकृति दर और गिरकर लगभग 54 प्रतिशत हो गई तथा 45 प्रस्ताव निरस्त हुए।
इसके बाद 2026-27 की जुलाई तक की रिपोर्ट में स्थिति फिर सुधरी और 42 में से 40 प्रस्ताव स्वीकृत हुए। यह लगभग 95 प्रतिशत स्वीकृति दर है।
चार वर्षों में कुल 321 प्रस्ताव, 251 स्वीकृत कार्य, 69 निरस्त और केवल एक लंबित प्रस्ताव प्रशासनिक स्तर पर मिश्रित लेकिन सक्रिय प्रदर्शन दिखाते हैं।
फिर भी विधायक निधि का अंतिम मूल्यांकन केवल स्वीकृत कार्यों की संख्या से नहीं किया जा सकता। असली सवाल यह है कि 251 मंजूर परियोजनाओं में कितनी जमीन पर शुरू हुईं, कितनी पूरी हुईं, उनकी गुणवत्ता कैसी रही और उन पर कितनी सार्वजनिक धनराशि खर्च हुई।
कपिल देव अग्रवाल की विधायक निधि का वास्तविक रिपोर्ट कार्ड तभी पूरा होगा जब कार्यों की संख्या के साथ वित्तीय खर्च, भौतिक प्रगति और सार्वजनिक उपयोगिता का भी विवरण सामने आए।
-
समाचार संपादन, ब्रेकिंग अलर्ट और फैक्ट-चेक पर फ़ोकस। ज़मीनी रिपोर्टों को डेटा के साथ जोड़ना पसंद। कॉफ़ी, डेडलाइन और सत्य , तीनों से समझौता नहीं।
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