पोंजी स्कीम पर ईडी का बड़ा एक्शन, फरार समीर अग्रवाल की ₹30 करोड़ से अधिक की प्रॉपर्टी फ्रीज

Published on 20 अग॰ 2026

मुंबई। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने ₹10,000 करोड़ से अधिक के बहुचर्चित एलयूसीसी (LUCC) पोंजी स्कीम घोटाले में अपनी जांच तेज कर दी है। धन शोधन निवारण अधिनियम के तहत केंद्रीय जांच एजेंसी ने कार्रवाई करते हुए आरोपियों की ₹30 करोड़ से ज्यादा की संपत्तियों को फ्रीज और जब्त कर लिया है। यह कार्रवाई सागा ग्रुप (SAGA Group) के प्रमोटर समीर अग्रवाल, उनके पारिवारिक सदस्यों और मुख्य सहयोगियों के मुंबई और भोपाल स्थित विभिन्न स्थानों पर सघन छापेमारी के बाद की गई है।

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छापेमारी में बरामदगी का विवरण

ईडी की तलाशी के दौरान बेहिसाब संपत्ति और दस्तावेज बरामद हुए हैं। विभिन्न बैंकों में जमा राशि, लिस्टेड शेयर, म्यूचुअल फंड और LIC पॉलिसियों सहित कुल ₹30 करोड़ से अधिक की वित्तीय संपत्तियों को फ्रीज कर दिया गया है। साथ ही आरोपियों के ठिकानों से ₹1.53 करोड़ की भारतीय नकदी और करीब ₹35 लाख की विदेशी मुद्रा जब्त की गई है। इसके अलावा इस छापेमारी में ₹5.25 करोड़ से अधिक मूल्य के सोने-चांदी के आभूषण, कीमती रत्न और सोने के बिस्किट भी बरामद किए गए हैं। सिर्फ इतना ही नहीं एजेंसी ने आरोपियों के बेड़े से 9 महंगी लग्जरी कारों को भी अपने कब्जे में ले लिया है।

क्या है एलयूसीसी (LUCC) घोटाला?

प्राप्त जानकारी के मुताबिक, यह पूरा मामला ‘लोनी अर्बन मल्टी-स्टेट क्रेडिट एंड थ्रिफ्ट को-ऑपरेटिव सोसाइटी’ और सागा ग्रुप द्वारा चलाई गई एक कथित पोंजी (Chit fund) स्कीम से जुड़ा है। इसपर आरोप है कि साल 2009 से इस समूह ने देश भर के आम लोगों को फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) और रेकरिंग डिपॉजिट (RD) पर असाधारण रूप से भारी रिटर्न देने का लालच दिया। जांच के मुताबिक, बिना किसी वैध व्यावसायिक गतिविधियों के करीब 30.51 लाख निवेशकों से ₹10,000 करोड़ से अधिक की रकम जुटाई गई और बाद में उसे हड़प लिया गया। सा​थ ही इस पैसे को विभिन्न शेल कंपनियों और हवाला नेटवर्क के जरिए डायवर्ट किया गया था।

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जांच और वर्तमान स्थिति

इस घोटाले को लेकर देश के विभिन्न राज्यों में पुलिस और CBI ने कई एफआईआर (FIR) दर्ज की गई थीं, जिसके आधार पर ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज किया। हांलाकि, इस मामले का मुख्य सूत्रधार और सागा ग्रुप का सीएमडी समीर अग्रवाल फिलहाल देश छोड़कर फरार है। वहीं, उसके एक प्रमुख सहयोगी रवि शंकर तिवारी को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है। ईडी अधिकारियों का कहना है कि जब्त किए गए डिजिटल उपकरणों और दस्तावेजों की जांच के बाद इस मामले में कुछ और बड़ी गिरफ्तारियां हो सकती है।