भोपाल से जबलपुर 3 तो रायपुर 7 घंटे में पहुंचेंगे: एमपी में बन रहे 4 मेगा कॉरिडोर; सिंहस्थ और 2028 चुनाव से पहले बदलेगी तस्वीर - Madhya Pradesh News

Published on 22 अग॰ 2026

भोपाल से रायपुर का सफर 15 से घटकर 7 घंटे और भोपाल से जबलपुर का 6 से 3 घंटे हो जाएगा। अगले दो साल में भोपाल को केंद्र मानकर चार बड़े इकोनॉमिक कॉरिडोर तैयार होने हैं।

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इनसे शहरों के बीच कनेक्टिविटी बेहतर होगी और आर्थिक गतिविधियों को भी रफ्तार मिलेगी। 2028 के सिंहस्थ और विधानसभा चुनाव से पहले इन प्रोजेक्ट्स को अहम माना जा रहा है।

भोपाल से जुड़ने वाले बड़े कॉरिडोर एक नजर में

भोपाल-विदिशा 4-लेन: कानपुर कॉरिडोर को मिलेगी मजबूती

राज्य कैबिनेट ने पिछले सप्ताह भोपाल-विदिशा 4-लेन प्रोजेक्ट को मंजूरी दी है। यह भोपाल-कानपुर कॉरिडोर का अहम हिस्सा होगा।

क्यों जरूरत पड़ी: इस सड़क पर ट्रैफिक करीब 10,975 PCU है, जबकि 2-लेन सड़क की मानक क्षमता 10,000 PCU है। यानी मौजूदा ट्रैफिक क्षमता से अधिक है, इसलिए सड़क को 4-लेन किया जा रहा है।

प्रोजेक्ट प्रोफाइल: 44.83 किमी लंबे प्रोजेक्ट की लागत ₹1,757.55 करोड़ है। यह भानपुरा टी-जंक्शन (अयोध्या बायपास रोड) से सांची-सलामतपुर जंक्शन तक बनेगा।

क्या है HAM मॉडल: प्रोजेक्ट हाइब्रिड एन्युटी मॉडल (HAM) पर बनेगा। इसमें 40% निवेश सरकार और 60% निजी डेवलपर करता है। सड़क के निर्माण के बाद लंबे समय तक रखरखाव की जिम्मेदारी भी डेवलपर की होती है।

भोपाल से रायपुर: सफर 15 से घटकर 7 घंटे होगा

सरकार ने जबलपुर-भोपाल ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे और जबलपुर-मंडला-छत्तीसगढ़ सीमा 6-लेन मार्ग को मंजूरी दी है। एक्सप्रेसवे पर वाहनों की अधिकतम गति 120 किमी प्रति घंटा होगी।

  • भोपाल से जबलपुर: अभी 320 किमी की दूरी तय करने में 5 से 6 घंटे लगते हैं। नया हाईवे बनने के बाद दूरी 255 किमी और यात्रा का समय करीब 3 घंटे रह जाएगा।
  • जबलपुर से रायपुर: अभी 7 से 8 घंटे लगते हैं। 6-लेन कॉरिडोर बनने के बाद यात्रा का समय घटकर 3.5 से 4 घंटे रह जाएगा।
  • सीधा फायदा: भोपाल से रायपुर की यात्रा अभी 14 से 15 घंटे की है, जो कॉरिडोर बनने के बाद घटकर 6 से 7 घंटे रह जाएगी।

जबलपुर आउटर रिंग रोड: शहर के बाहर से गुजरेगा लंबी दूरी का ट्रैफिक

जबलपुर में ₹3,540 करोड़ की लागत से 114 किमी लंबा 4-लेन आउटर रिंग रोड बनाया जा रहा है। 5 पैकेज में बनने वाले इस ग्रीनफील्ड कॉरिडोर में नर्मदा पर करीब 750 मीटर लंबा पुल भी होगा। यह बरेला, मानेगांव, NH-45, कुशनेर और अमझर को जोड़ेगा। इससे लंबी दूरी का ट्रैफिक शहर के बाहर से गुजर सकेगा।

भोपाल-इंदौर: यात्रा का समय करीब 2.5 घंटे होगा

भोपाल और इंदौर के बीच ₹4,000 करोड़ की लागत से 6-लेन ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे बनाया जा रहा है। इससे दोनों शहरों के बीच यात्रा का समय 4 घंटे से घटकर करीब 2.5 घंटे रह जाएगा। यह मौजूदा मार्ग का हाई-स्पीड विकल्प होगा।

इसके साथ इंदौर के पूर्वी हिस्से में ₹3,617.08 करोड़ की लागत से 75.63 किमी लंबा इंदौर ईस्टर्न बायपास भी बनाया जा रहा है। यह देवास/इंदौर क्षेत्र को सिमरोल/दातोदा के रास्ते नांदेड से जोड़ेगा।

सिंहस्थ 2028 से पहले उज्जैन के 3 बड़े सड़क प्रोजेक्ट पूरे करने का लक्ष्य

2028 के सिंहस्थ को देखते हुए सरकार ने उज्जैन से जुड़े सड़क प्रोजेक्ट्स को दीपावली 2027 तक पूरा करने के निर्देश दिए हैं।

  • इंदौर-उज्जैन 6-लेन: इसका काम 15 जनवरी 2025 से शुरू हो चुका है। कॉरिडोर पर तीन फ्लाईओवर, छह अंडरपास और आठ जंक्शन बनाए जा रहे हैं।
  • उज्जैन-जावरा ग्रीनफील्ड: यह उज्जैन को जावरा के रास्ते दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे से जोड़ेगा। इसे सिंहस्थ शुरू होने से तीन महीने पहले पूरा करने का लक्ष्य है।

विधानसभा चुनाव 2028: किन क्षेत्रों को सड़क प्रोजेक्ट्स से फायदा?

इन सड़क परियोजनाओं का असर 2028 के विधानसभा चुनाव में भी दिखाई दे सकता है।

  • उज्जैन उत्तर/दक्षिण: बायपास, एलिवेटेड कॉरिडोर और फ्लाईओवर से इन क्षेत्रों की कनेक्टिविटी बेहतर होने की उम्मीद है।
  • इंदौर: इंदौर-उज्जैन 6-लेन और नए फ्लाईओवर्स से ट्रैफिक दबाव कम करने में मदद मिल सकती है।
  • नागदा-खाचरौद व रतलाम: उज्जैन-जावरा ग्रीनफील्ड कॉरिडोर से इन क्षेत्रों की दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे तक कनेक्टिविटी बेहतर होगी।
  • धार व खरगोन: बदनावर और धामनोद-बड़वाह कनेक्टिविटी से मालवा-निमाड़ के सड़क संपर्क में सुधार होगा।
  • भोपाल व देवास: भोपाल-देवास 6-लेन और पश्चिमी बायपास से मालवा की कनेक्टिविटी बेहतर होने की उम्मीद है।