नई दिल्ली (उत्तम हिन्दू न्यूज): भारतीय वायुसेना (IAF) की लड़ाकू क्षमता को कई गुना बढ़ाने और आसमान में अपनी धाक और मजबूत करने के लिए एक ऐतिहासिक महाडील पर काम तेज हो गया है। फ्रांस की मशहूर विमान निर्माता कंपनी डसॉल्ट एविएशन (Dassault Aviation) ने भारत को 114 मल्टीरोल राफेल फाइटर जेट्स (Rafale Jets) देने के लिए अपना तकनीकी और वाणिज्यिक प्रस्ताव भारत सरकार को सौंप दिया है। करीब 3.25 लाख करोड़ रुपये की इस संभावित डील की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इन विमानों का निर्माण सीधे तौर पर ‘मेक इन इंडिया’ पहल से जुड़ा होगा। इसके तहत 114 में से 94 लड़ाकू विमान भारत की सरजमीं पर ही एक भारतीय पार्टनर कंपनी के साथ मिलकर बनाए जाएंगे। रक्षा मंत्रालय की विंग और वायुसेना ने इस बेहद अहम प्रपोजल का बारीकी से मूल्यांकन भी शुरू कर दिया है।
अत्याधुनिक तकनीक का होगा ‘ट्रांसफर’, भारत में बनेंगे अहम पुर्जे
मई महीने में भारत द्वारा भेजे गए ‘लेटर ऑफ रिक्वेस्ट’ (LoR) के जवाब में फ्रांस ने जो प्रस्ताव दिया है, उसमें टेक्नोलॉजी ट्रांसफर (ToT) पर भारी जोर दिया गया है। भारत ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि यह डील ‘मेक इन इंडिया’ के बिना मुमकिन नहीं है। इस समझौते के तहत डसॉल्ट एविएशन के साथ-साथ इंजन बनाने वाली कंपनी सफरान (Safran), एवियोनिक्स देने वाली थेल्स (Thales) और हथियार निर्माता MBDA भी अपनी अहम तकनीक भारत को ट्रांसफर करेंगे। इस पूरी प्रक्रिया के बाद एयरफ्रेम, इंजन और एवियोनिक्स में 55% से 60% तक स्वदेशी तकनीक का इस्तेमाल सुनिश्चित किया जाएगा, जिससे भारत का रक्षा उद्योग आत्मनिर्भरता की ओर एक बड़ा कदम बढ़ाएगा।
स्वदेशी ‘अस्त्र’ मिसाइलों से लैस होंगे जेट्स, मिलेगी F-4 और F-5 की मारक क्षमता
फ्रांस के इस प्रस्ताव की जांच करते हुए भारत का खास फोकस इस बात पर है कि इन 114 जेट्स में अस्त्र (Astra) जैसी स्वदेशी मिसाइलों और हथियारों को आसानी से इंटिग्रेट किया जा सके। भारतीय वायुसेना वर्तमान में राफेल के ‘F3R’ संस्करण का इस्तेमाल कर रही है, लेकिन नई डील में डसॉल्ट के अपग्रेडेड ‘F-4’ और आने वाले ‘F-5’ वेरिएंट्स का शानदार मिश्रण शामिल होगा। इन नए विमानों में नेक्स्ट-जनरेशन AESA रडार मौजूद होगा, जो दुश्मनों को बहुत दूर से ही हवा में ट्रैक कर लेगा। साथ ही, इसमें इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर (EW) से बचने के लिए उन्नत आत्मरक्षा प्रणाली, बेहतर सैटेलाइट लिंक और पायलटों के तत्काल और सटीक निर्णय लेने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर आधारित आधुनिक तकनीकें भी होंगी।
घटती स्क्वाड्रन के बीच वायुसेना के लिए क्यों जरूरी है राफेल?
इस वक्त भारतीय वायुसेना के पास 36 राफेल फाइटर जेट्स की मजबूत फ्लीट मौजूद है, जिन्हें 2015 के सौदे के तहत शामिल किया गया था। इसके अलावा भारतीय नौसेना ने भी अपने युद्धपोतों के लिए 26 राफेल-एम (Rafale-M) जेट्स का ऑर्डर दिया है। वर्तमान में रूस निर्मित पुराने मिग (MiG) विमान लगातार रिटायर हो रहे हैं और स्वदेशी तेजस (LCA Mark 1A और Mark 2) के प्रोडक्शन में हो रही देरी की वजह से वायुसेना की स्क्वाड्रन की संख्या तेजी से घट रही है। ऐसे में 114 नए राफेल जेट्स वायुसेना की ताकत को फिर से चरम पर पहुंचा देंगे। एक ही तरह के लड़ाकू विमानों की संख्या बढ़ने से इनके मेंटेनेंस के खर्च में भी भारी कमी आएगी। खास बात यह है कि अंबाला एयरबेस पर पहले से ही राफेल की मेंटेनेंस, रिपेयर और ओवरहॉल (MRO) सुविधा मौजूद है, जहां बिना किसी देरी के 36 से 38 नए विमानों (करीब दो स्क्वाड्रन) को आसानी से तैनात किया जा सकता है।
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