भीड़ का रोमांच या मजबूरी? नूंह में 'जिंदा समाधि' का खतरनाक खेल, 3 दिन बाद गड्ढे से निकली स्टंटमैन दीपक की लाश... सर्कस में सुरक्षा इंतजामों पर सवाल

Published on 29 जुल॰ 2026

Nuh circus incident: तालियों की गूंज, भीड़ का रोमांच और कुछ रुपये कमाने की मजबूरी… हरियाणा के नूंह के एक गांव में सर्कस के दौरान एक स्टंटमैन की दर्दनाक मौत हो गई. जिस ‘जिंदा समाधि’ वाले करतब को देखने के लिए लोग जमा हुए थे, वही खेल 27 साल के दीपक की मौत की वजह बन गया. दावा था कि वह जमीन के अंदर जाने के बाद कुछ समय बाद जिंदा बाहर निकलेगा, लेकिन जब गड्ढा खोदा गया तो अंदर से निकली उसकी लाश ने हर किसी को सन्न कर दिया.

घटना हरियाणा के नूंह जिले के खोरी गांव की है. यहां एक खाली प्लॉट में चल रहे ट्रैवलिंग बाइसिकल सर्कस में दीपक बतौर कलाकार और आयोजक के तौर पर जुड़ा हुआ था. फरीदाबाद के गौंची गांव का रहने वाला दीपक साइकिल से कई खतरनाक करतब दिखाने में माहिर था. घटना से पहले भी उसने दर्शकों का मनोरंजन करने के लिए कई स्टंट किए. कभी हैंडलबार पर संतुलन बनाकर साइकिल चलाई तो कभी बिना नीचे देखे साइकिल दौड़ाई. चलती साइकिल पर खड़े होकर करतब दिखाने के बाद अब बारी थी उस स्टंट की, जिसने उसकी जान ले ली.

बोरी में खुद घुसा, गड्ढे में उतरा और ऊपर डाल दी गई मिट्टी

सर्कस के अंत में दीपक ने ‘लाइव समाधि’ का खतरनाक स्टंट करने का ऐलान किया. दीपक खुद एक बोरी के अंदर गया और उसे पहले से खोदे गए गड्ढे में उतार दिया गया. इसके बाद ऊपर से मिट्टी डालकर उसे जमीन के अंदर बंद कर दिया गया. दर्शकों को उम्मीद थी कि कुछ समय बाद दीपक सकुशल बाहर आएगा और यह करतब तालियों के साथ खत्म होगा. लेकिन वक्त गुजरता गया और जब उसे बाहर निकालने की कोशिश की गई तो हालात बदल चुके थे. बताया जा रहा है कि करीब तीन दिन बाद जब सर्कस के दूसरे कलाकारों ने गड्ढा खोदा तो अंदर दीपक का शव मिला.

आयोजकों ने दर्शकों से दावा किया था कि स्टंटमैन दीपक को 24 घंटे बाद सुरक्षित बाहर निकाला जाएगा. लेकिन प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि तय समय पर ऐसा नहीं हुआ और वह करीब 36 घंटे तक जमीन के अंदर ही दबा रहा. प्रत्यक्षदर्शी संचित सिंह के मुताबिक, सर्कस के दौरान घोषणा की गई थी कि जब तक दर्शकों से 7,100 रुपये की राशि एकत्र नहीं हो जाती, तब तक दीपक को बाहर नहीं निकाला जाएगा. इसी वजह से उसे निर्धारित समय से काफी देर बाद बाहर निकाला गया. जब गड्ढा खोदा गया तो दीपक मृत अवस्था में मिला.

आखिर किसकी लापरवाही से गई जान?

दीपक की मौत के बाद सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि इतने जोखिम भरे स्टंट की अनुमति किसने दी और सुरक्षा के क्या इंतजाम किए गए थे. पुलिस मामले की जांच कर रही है और सर्कस से जुड़े कलाकारों व ग्रामीणों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं. पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि दीपक को कितने समय के लिए जमीन के अंदर रखा जाना था और क्या स्टंट तय समय से ज्यादा लंबा खिंच गया था.

जमीन के नीचे रहकर जिंदा रहने वाला स्टंट बेहद जोखिम भरा होता है. इसके लिए वर्षों की ट्रेनिंग, सांस पर नियंत्रण और बेहद सावधानी से तैयारी की जरूरत होती है. बोरी में हवा आने-जाने के लिए छोटे छेद और मिट्टी के बीच से हवा पहुंचाने की व्यवस्था की जाती है. इसके बावजूद आमतौर पर कलाकार कुछ घंटों या अधिकतम एक दिन तक ही इस तरह के स्टंट करते हैं. लंबे समय तक जमीन के अंदर रहना जानलेवा साबित हो सकता है.

नट समुदाय के कलाकारों की मजबूरी

पुलिस के अनुसार दीपक खानाबदोश ‘नट’ समुदाय से जुड़ा था. इस समुदाय के कई लोग गांवों और छोटे कस्बों में कलाबाजी, साइकिल स्टंट और सर्कस जैसे करतब दिखाकर अपनी आजीविका चलाते हैं. एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि सूचना मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया.

(नूंह से अनिल की रिपोर्ट)

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