260 करोड़ के वाटिका ग्रुप प्लॉट घोटाले में ED की बड़ी कार्रवाई, कंपनी के CMD अनिल भल्ला और प्रमोटर गौतम भल्ला गिरफ्तार

Published on 30 सित॰ 2026

260 करोड़ के वाटिका ग्रुप प्लॉट घोटाले में ED की बड़ी कार्रवाई, कंपनी के CMD अनिल भल्ला और प्रमोटर गौतम भल्ला गिरफ्तार

260 करोड़ के वाटिका ग्रुप प्लॉट घोटाले में ED की बड़ी कार्रवाई

Vatika Group Scam: प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने 260 करोड़ रुपये के कथित प्लॉट घोटाले में वाटिका लिमिटेड के चेयरमैन-कम-मैनेजिंग डायरेक्टर अनिल भल्ला समेत कंपनी के प्रमोटर गौतम भल्ला को गिरफ्तार कर लिया गया है. ED ने दोनों को प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत 28 सितंबर 2026 को पकड़ा. इसके बाद 29 सितंबर को उन्हें गुरुग्राम की स्पेशल PMLA कोर्ट में पेश किया गया. अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए दोनों को 3 अक्टूबर तक ED की रिमांड में भेज दिया है. ED की जांच में पता चला है कि ये पूरा मामला दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) में दर्ज कई एफआईआर से जुड़ा है. इन मामलों में धोखाधड़ी, प्लॉट की डिलीवरी न देने, पैसों की हेराफेरी जैसी गंभीर शिकायतें दर्ज की गई थीं.

14 साल का लंबा इंतजार

ये घोटाला साल 2010 से 2012 के बीच शुरू हुआ था. उस वक्त सात अलग-अलग खरीदार संस्थाओं ने गुरुग्राम के सेक्टर 84, 85 स्थित ‘Vatika India Next’ के साथ ही सेक्टर 88A के ‘Vatika India Next-2’ प्रोजेक्ट में रेजिडेंशियल प्लॉट बुक किए थे. खरीदारों ने प्लॉट की पूरी कीमत एडवांस में चुका दी थी, जो करीब 260 करोड़ रुपये थी. साल 2014-2015 में इसके एग्रीमेंट भी हो गए. लेकिन खेल यहीं से शुरू हुआ.

ED का कहना है कि कंपनी ने चुपके से प्रोजेक्ट का लेआउट बदल दिया. जिन प्लॉट का आवंटन हो चुका था, उनका नंबर बदला गया. यहां तक कि उनकी लोकेशन भी बदल दी गई. इसके बाद उसी जमीन को दूसरे लोगों को बेच दिया गया. हैरानी की बात ये है कि 14 साल बीत जाने के बाद भी Vatika India Next-2 के खरीदारों को 90 करोड़ रुपये के प्लॉट नहीं मिले हैं. वहीं Vatika India Next प्रोजेक्ट में भी करीब 140.73 करोड़ रुपये के प्लॉट की डिलीवरी फंसी हुई है.

22 फर्जी कंपनियों का जाल

जांच में अनिल भल्ला की भूमिका बेहद अहम पाई गई है. वो विवादित लेनदेन से जुड़े हर बड़े फैसले की खुद निगरानी करते थे. गौतम भल्ला पर आरोप है कि उन्होंने कई अहम एग्रीमेंट किए, जमीनों का मालिकाना हक रखने वाली कंपनियों में डायरेक्टर की भूमिका निभाई.

ED ने जब गहराई से पड़ताल की, तो 22 ऐसी ग्रुप कंपनियों का खुलासा हुआ जिनका कोई कर्मचारी नहीं था. इन कंपनियों में कोई कारोबारी गतिविधि भी नहीं हो रही थी. इनका मुख्य काम सिर्फ जमीन का बैंक मैनेज करना, कॉरपोरेट गारंटी देना, जमीनों को गिरवी रखना था. खरीदारों से जो पैसा मिला, उसे प्रोजेक्ट में लगाने के बजाय दूसरी ऐसी ग्रुप कंपनियों में ट्रांसफर किया गया जिनका इस प्रोजेक्ट से कोई सीधा संबंध नहीं था.

स्केलर वेंचर्स से धोखाधड़ी का मामला

ED ने जांच का दायरा बढ़ाया तो साल 2024 की एक और संदिग्ध ट्रांजैक्शन सामने आई. स्केलर वेंचर्स ने सेल एग्रीमेंट, बाय-बैक एग्रीमेंट के तहत वाटिका को 473.18 करोड़ रुपये दिए थे. इसमें से 165 प्लॉट में से 15 वापस खरीदे गए. इसके बाद बचे 150 प्लॉट में से 14 प्लॉट को बिना स्केलर वेंचर्स की जानकारी के तीसरे पक्ष को करीब 13.62 करोड़ रुपये में बेच दिया गया. अब तक की जांच में ED ने अपराध से जुड़ी रकम (Proceeds of Crime) 154.36 करोड़ रुपये आंकी है.

छापेमारी में मिली बेशकीमती चीजें

ED इस मामले में पहले भी PMLA की धारा 17 के तहत सात जगहों पर तलाशी अभियान चला चुकी है. जांच एजेंसी के मुताबिक, एक आरोपी के घर से मर्सिडीज बेंज GLC 300 कार मिली थी. इसके साथ ही 1.3 किलो से ज्यादा सोने, हीरे की ज्वेलरी भी जब्त की गई थी, जिसकी बाजार कीमत लगभग 1.55 करोड़ रुपये है. कार्रवाई के दौरान करीब 3.04 करोड़ रुपये के बैंक खाते, फिक्स्ड डिपॉजिट को भी फ्रीज किया गया था. अब रिमांड के दौरान दोनों आरोपियों से कई और बड़े खुलासे होने की उम्मीद है.

जीतेन्द्र भाटी

जीतेन्द्र भाटी

करीब डेढ़ दशक से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय. राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में पॉलिटिक्स, क्राइम, सामाजिक और मानवीय मुद्दों पर रिपोर्टिंग. BAG Films की नर्सरी से IBN7, आज़ाद न्यूज़, प्रज्ञा TV, 4 रियल न्यूज, Focus News और न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया होते हुए देश के सबसे बड़े न्यूज नेटवर्क TV9 भारतवर्ष में खबरों के बीच सफर जारी.

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