रायपुर37 मिनट पहले
- कॉपी लिंक

ऐसे मिल रहा खारुन में नालों का पानी
कलेक्टर-निगम आयुक्त से मांगा जवाब, तीन सदस्यीय कमेटी जांचेगी, 6 हफ्ते में रिपोर्ट
खारुन को प्रदूषण से बचाने के लिए नगर निगम ने अमृत मिशन के तहत 235 करोड़ रुपए खर्च कर निमोरा, कारा और चंदनीडीह में कुल 200 एमएलडी क्षमता के तीन एसटीपी लगाए। उद्देश्य 11 नालों का गंदा पानी नदी में जाने से रोकना था, लेकिन नालों से सीवेज अब भी खारुन में पहुंच रहा है।
मामला एनजीटी पहुंचने पर सेंट्रल जोन बेंच भोपाल ने राज्य सरकार और नगर निगम से जवाब मांगा है। एनजीटी ने पर्यावरण और नगरीय प्रशासन विभाग के प्रमुख सचिव, छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल के सदस्य सचिव, रायपुर कलेक्टर और निगम आयुक्त को नोटिस जारी कर चार सप्ताह में जवाब देने कहा है।
मामला सामाजिक कार्यकर्ता राकेश चौबे की पत्र याचिका और प्रकाशित खबरों के आधार पर सामने आया। ट्रिब्यूनल ने पीहर नाला समेत दूसरे नालों से बिना ट्रीटमेंट सीवेज खारुन में पहुंचने का उल्लेख किया है। हटकेश्वरनाथ महादेव मंदिर में नदी के पानी के उपयोग को देखते हुए वहां स्वच्छ और सुरक्षित पानी की व्यवस्था के निर्देश भी दिए हैं।
प्रदेश में 600 एमएलडी सीवेज, ट्रीटमेंट सिर्फ 178.6 एमएलडी एनजीटी के सामने रखी रिपोर्ट के मुताबिक प्रदेश में रोज करीब 600 एमएलडी सीवेज निकलता है। एसटीपी की स्थापित क्षमता 360 एमएलडी है, लेकिन केवल 178.6 एमएलडी क्षमता का इस्तेमाल हो रहा है। यानी उपलब्ध ट्रीटमेंट क्षमता का भी आधा हिस्सा उपयोग में है। सीवर नेटवर्क अधूरा, 12.32 लाख घर सेप्टिक टैंक पर एनजीटी के मुताबिक अमृत योजना में प्रदेश में एक किमी भी सीवर लाइन नहीं बिछी। अमृत-2.0 में 16.65 किमी लाइन प्रस्तावित है, लेकिन काम शुरू नहीं हुआ है। 1,72,640 घर सीवर नेटवर्क से जुड़े हैं, जबकि 12,32,456 से ज्यादा घर सेप्टिक टैंक आधारित व्यवस्था पर निर्भर हैं। एसटीपी का 100% इस्तेमाल, टैंकरों की GPS ट्रैकिंग एनजीटी ने कलेक्टर और निगम आयुक्त को सेप्टिक टैंक साफ करने वाले सभी टैंकरों का रजिस्ट्रेशन और GPS ट्रैकिंग कराने, सीवेज को खुले में या नदी-नालों में डालने से रोकने और एसटीपी का 100% उपयोग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
रायपुर में एसटीपी क्षमता: निमोरा 90 MLD, चंदनीडीह 75 MLD, कारा 35 MLD, भाठागांव 6 MLD, महाराजबंध 3 MLD, नरैया तालाब 1 MLD और खो-खो तालाब 1 MLD खारुन से जुड़े एसटीपी: कुल क्षमता 206 MLD, इसमें करीब 170 MLD चालू। उद्योगों को 20 MLD ट्रीटेड पानी देने का एमओयू है, लेकिन अभी एपीआई स्पात और आलोक इंडस्ट्रीज करीब 8 MLD पानी ले रहे हैं।
खारुन समेत 6 नदियों के 10 हिस्से प्रदूषित प्रदूषण मंडल के 2022-23 के आंकड़ों के अनुसार शिवनाथ, हसदेव, खारुन, महानदी, अरपा और केलो नदियों के 10 हिस्से प्रदूषित पाए गए। खारुन में बी/सी से खापरी नाला तक का हिस्सा प्रायोरिटी-III में दर्ज है। एनजीटी ने नगरीय प्रशासन, पर्यावरण विभाग और सीईसीबी के एक-एक प्रतिनिधि की संयुक्त समिति बनाई है। सीईसीबी नोडल एजेंसी होगी। समिति मौके पर जांच कर छह सप्ताह में फैक्चुअल और एक्शन टेकन रिपोर्ट सौंपेगी। अगली सुनवाई 4 नवंबर 2026 को होगी।
.