कुरुक्षेत्र की अंतरराष्ट्रीय जाट धर्मशाला में बैठक करते किसान मजदूर संघर्ष मोर्चा के बैनर तले किसान संगठन।
धान खरीद को लेकर किसानों और सरकार के बीच टकराव बढ़ता जा रहा है। आज कुरुक्षेत्र की अंतरराष्ट्रीय जाट धर्मशाला में किसान मजदूर संघर्ष मोर्चा हरियाणा की बैठक में 9 किसान संगठनों ने एकजुट होकर सरकार की खरीद व्यवस्था के खिलाफ आंदोलन तेज करने का फैसला लिया
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किसानों ने साफ कहा कि धान खरीद पर लगाई गई कैपिंग हटानी होगी। अगर सरकार ने मांगों पर ध्यान नहीं दिया तो 4 अक्टूबर को प्रदेशभर में सरकार के पुतले फूंके जाएंगे और मार्केट कमेटी कार्यालयों का घेराव कर धरना दिया जाएगा। इसके अलावा दूसरे जिले में धान बेचने की छूट दी जाए।

बैठक में हिस्सा लेते विभिन्न किसान संगठनों के पदाधिकारी।
ज्यादा पैदावार पर लिमिट क्यों- एडवोकेट संजू
शहीद भगत किसान यूनियन के जिला प्रधान एडवोकेट संजू नंबरदार ने धान खरीद की लिमिट को लेकर सरकार पर सवाल उठाए। कहा कि अलग-अलग यूनिवर्सिटी और सर्टिफाइड कंपनियां धान की किस्मों के इस तरह बीज तैयार कर रही हैं, जिनसे पैदावार ज्यादा होती है।
सरकार खुद किसानों को ज्यादा पैदावार के लिए प्रोत्साहित करती है। अब जब किसान ज्यादा पैदावार ले रहा है तो खरीद के समय उसी फसल पर लिमिट लगाना गलत है। एक तरफ पैदावार बढ़ाने वाली किस्मों को बढ़ावा दिया जा रहा है और दूसरी तरफ मंडी में खरीद पर लिमिट लगाई जा रही है। वास्तविक पैदावार के हिसाब से खरीद हो और कैपिंग हटाई जाए।
दूसरे जिले में हो खरीद- जगदीप औलख
सर छोटूराम किसान यूनियन करनाल के प्रधान जगदीप औलख ने कहा कि कई बार किसान की अपने जिले की मंडी नजदीक नहीं होती। दूसरे जिले की मंडी उसके खेत या गांव के ज्यादा पास होती है। इसलिए किसान पास की मंडी में अपनी फसल बेचने जाएगा और सरकार खुद दाना खरीद का दावा कर रही है। फिर भी उन पर शर्त थोपी जा रही है।

सर छोटूराम किसान यूनियन के करनाल जिला प्रधान जगदीप औलख बोले- दूसरे जिले में फसल बेचने की मिले छूट।
20 किलोमीटर की छूट मिले
औलख ने कहा कि किसान को अपने खेत या गांव से 20 किलोमीटर के दायरे में आने वाली किसी भी मंडी में धान बेचने की इजाजत दी जाए, चाहे वह मंडी दूसरे जिले में ही क्यों न आती हो। मंडी की सीमा जिले के आधार पर तय करने के बजाय किसान के लिए दूरी को आधार बनाया जाना चाहिए।
वेरिफिकेशन सिस्टम तुरंत ठीक हो
बैठक में धान खरीद से जुड़े वेरिफिकेशन सिस्टम को भी आसान करने की मांग उठाई। खरीद व्यवस्था में ऐसी प्रक्रिया नहीं होनी चाहिए जिससे मंडी में फसल लेकर पहुंचने के बाद किसान को अनावश्यक परेशानी उठानी पड़े। अगर उनकी मांग पर गौर नहीं किया गया, तो 4 अक्टूबर को मार्केट कमेटी पर धरना दिया जाएगा।