फरीदाबाद के सेक्टर-65 निवासी पैरा शूटर मनीष नरवाल ने जापान के आइची-नागोया में आयोजित 2026 एशियन पैरा गेम्स में पुरुषों की 10 मीटर एयर पिस्टल SH1 स्पर्धा में रजत पदक जीता है। उन्होंने इस स्पर्धा में रजत पदक के साथ 2028 लॉस एंजेलिस पैरालंपिक के लिए भार
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मनीष ने आठ खिलाड़ियों के फाइनल में 233.7 अंक हासिल किए। दक्षिण कोरिया के जो जियोंगदू ने 241.3 अंकों के साथ स्वर्ण पदक जीता, जबकि चीन के यांग चाओ 213.6 अंकों के साथ तीसरे स्थान पर रहे। भारत के एक अन्य निशानेबाज रुद्रांश खंडेलवाल सातवें स्थान पर रहे।
मनीष इससे पहले भी पैरा एशियन और पैरालंपिक गेम्स में पदक जीत चुके है। इस दौरान वह टाइफाइड, धुंधली नजर और कंधे की सूजन से जूझ रहे थे। लेकिन उन्होंने अपना अभ्यास जारी रखा। मनीष की इस जीत पर परिवार में खुशी का माहौल है।

जापान में दूसके खिलाड़ियों के साथ मनीष
तीसरी बार पैरा एशियन गेम्स में जीता पदक
मनीष नरवाल ने लगातार तीसरी बार पैरा एशियन गेम्स में पदक जीता है। वर्ष 2018 में जकार्ता में आयोजित पैरा एशियन गेम्स में उन्होंने 10 मीटर एयर पिस्टल में स्वर्ण, साल 2021 में टोक्यो पैरालंपिक में आयोजित 50 मीटर मिश्रित पिस्टल स्पर्धा में रजत पदक जीता था। साल 2024 में पेरिस पैरालंपिक में 10 मीटर एयर पिस्टल SH1 स्पर्धा में रजत पदक जीता था।
मनीष ने अपनी जीत का श्रेय कोच राकेश ठाकुर को दिया। उन्होंने कहा कि कोच ने हमेशा उनका उत्साह बढ़ाया है। प्रतियोगिता के दौरान राकेश ठाकुर जापान में ही मौजूद थे और मनीष का प्रदर्शन देख रहे थे।

मनीष को पदक मिलने पर मिठाई खिलाते हुए परिवार के लोग
छोटा भाई और बहन भी हैं शूटर
मनीष के छोटे भाई शिवा और बहन शिखा नरवाल भी उनसे काफी प्रभावित हैं। मनीष को देखकर दोनों ने भी शूटिंग में करियर बनाने का फैसला किया और आज दोनों अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी हैं। शिवा नरवाल ने वर्ष 2023 के एशियन गेम्स में 10 मीटर एयर पिस्टल के टीम इवेंट में स्वर्ण पदक हासिल किया था। इसी प्रकार शिखा नरवाल भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना चुकी हैं।

मनीष इससे पहले भी तीन बार पदक जीत चुके है।
2028 पैरालंपिक के लिए भी अहम उपलब्धि
इस पदक के साथ मनीष ने लॉस एंजेलिस में होने वाले 2028 पैरालंपिक खेलों के लिए भारत का कोटा स्थान हासिल किया। वह इस स्पर्धा में पैरालंपिक कोटा हासिल करने वाले तीसरे भारतीय पैरा निशानेबाज बने। हालांकि, कोटा स्थान हासिल करना और अंतिम खिलाड़ी के रूप में चयनित होना अलग-अलग बातें हैं