रायबरेली: उत्तर प्रदेश के आगामी 2027 के विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए समाजवादी पार्टी (SP) ने अपनी चुनावी तैयारियों को पूरी तरह से धार देनी शुरू कर दी है। इसी कड़ी में समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने गुरुवार को ऐतिहासिक भूमि रायबरेली से ‘पीडीए रथयात्रा’ का भव्य आगाज किया। एक विशेष रूप से डिजाइन और सुसज्जित रथ पर सवार होकर जैसे ही अखिलेश रायबरेली की धरती पर पहुंचे, वहां मौजूद जनसमूह में भारी उत्साह देखने को मिला।
विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए सपा प्रमुख ने एक तरफ जहां भारतीय जनता पार्टी की सरकार को जमकर आड़े हाथों लिया, वहीं दूसरी तरफ वर्ष 2022 के विधानसभा चुनावों को लेकर निर्वाचन आयोग पर भी बहुत गंभीर और तीखे आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि यदि पिछले चुनाव में पीडीए वर्ग के वोटों की कथित तौर पर चोरी नहीं की गई होती, तो आज उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी की पूर्ण बहुमत की सरकार सत्ता में होती।
अपने संबोधन को आगे बढ़ाते हुए अखिलेश यादव ने स्पष्ट किया कि वर्ष 2027 का आगामी विधानसभा चुनाव समाजवादी पार्टी अपने राजनीतिक सहयोगियों के साथ मिलकर एक मजबूत गठबंधन के रूप में लड़ेगी। सीटों के बंटवारे पर खुलकर बात करते हुए उन्होंने कहा कि गठबंधन के भीतर सीटों की संख्या कोई प्राथमिक मुद्दा नहीं होगा, बल्कि जिस भी दल या उम्मीदवार के चुनाव जीतने की प्रबल संभावना होगी, उसी आधार पर सीटों का अंतिम फैसला तय किया जाएगा। उन्होंने दोहराया कि सपा अपने सभी सहयोगी दलों को साथ लेकर आगे बढ़ेगी और जीत ही सीटों के निर्धारण का मुख्य पैमाना बनेगी।
पीडीए फॉर्मूले को बनाया चुनावी अभियान का केंद्रबिंदु
रायबरेली की इस जनसभा के माध्यम से अखिलेश यादव ने अपने ‘PDA’ (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) समीकरण के जरिए समाज के इन उपेक्षित वर्गों को अपने साथ जोड़ने की अपनी राजनीतिक रणनीति को पूरी ताकत से जनता के सामने रखा। उन्होंने परिभाषित करते हुए कहा कि जो भी व्यक्ति समाज में पीड़ित है, दुखी है या अपमानित महसूस कर रहा है, वह प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से पीडीए का ही एक अभिन्न हिस्सा है। उन्होंने भाजपा पर इन वर्गों के साथ लगातार अन्याय करने का कड़ा आरोप लगाया और विश्वास जताया कि आने वाले 2027 के चुनाव में पीडीए परिवार के तमाम लोग देश के संविधान और आरक्षण व्यवस्था की रक्षा के लिए पूरी मजबूती से खड़े नजर आएंगे।
मौजूदा सरकार की कार्यशैली पर प्रहार करते हुए उन्होंने भाजपा की चर्चित ‘बुलडोजर नीति’ को भी आड़े हाथों लिया। अखिलेश ने तंज कसते हुए कहा कि जिन लोगों ने बुलडोजर की राजनीति को बढ़ावा दिया है, इस बार उनके खिलाफ आम जनता के वोटों का बुलडोजर पूरी ताकत से चलेगा। उन्होंने बड़े चुनावी वादे करते हुए यह घोषणा भी की कि वर्ष 2027 में राज्य में समाजवादी पार्टी की सरकार बनते ही बुलडोजर नीति को पूरी तरह से समाप्त कर दिया जाएगा, साथ ही शिक्षा के प्रसार के लिए नए स्कूल खोले जाएंगे और सरकारी कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन योजना (OPS) को तुरंत बहाल किया जाएगा। इसके अलावा, युवाओं के भविष्य से जुड़े मुद्दों पर बोलते हुए उन्होंने अग्निवीर योजना और आउटसोर्सिंग की व्यवस्था को भी जड़ से समाप्त करने का संकल्प लिया।
रायबरेली से रथयात्रा की शुरुआत के सियासी मायने
पीडीए रथयात्रा के लिए रायबरेली जैसे वीआईपी क्षेत्र का चयन किए जाने के पीछे एक गहरा और दूरगामी राजनीतिक संदेश निहित है। यह बात किसी से छिपी नहीं है कि रायबरेली लोकसभा क्षेत्र देश के शीर्ष कांग्रेस नेता राहुल गांधी का संसदीय क्षेत्र रहा है। वर्तमान में इस जिले की कुल पांच विधानसभा सीटों में से तीन सीटों (बछरावां, हरचंदपुर और सरेनी) पर समाजवादी पार्टी के अपने विधायक काबिज हैं, जबकि रायबरेली सदर और ऊंचाहार सीटें भारतीय जनता पार्टी के पास हैं। ऐसे में आगामी 2027 के चुनाव को लेकर चल रही सपा-कांग्रेस के बीच सीट शेयरिंग की संभावित चर्चाओं के दौर के बीच अखिलेश यादव द्वारा सीधे यहीं से अपने अभियान का श्रीगणेश करना राजनीतिक गलियारों में चर्चा का सबसे बड़ा विषय बन गया है।
कार्यकर्ताओं को मिला बूथ स्तर तक संगठन को धार देने का संदेश
अपनी इस यात्रा के दौरान अखिलेश यादव ने पार्टी के तमाम जमीनी कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों का आह्वान किया कि वे अभी से कमर कस लें और वर्ष 2027 के चुनावों के मद्देनजर बूथ स्तर तक पार्टी संगठन को बेहद मजबूत बना लें। एक रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत बूथ स्तर पर ज्यादा से ज्यादा नए मतदाताओं को जोड़ने पर विशेष जोर दिया और पार्टी के संगठनात्मक ढांचे को पूरी तरह सक्रिय करने का स्पष्ट निर्देश दिया। इस रथयात्रा के माध्यम से पार्टी की सीधी पहुंच गांवों और कस्बों के अंतिम छोर तक बढ़ाने तथा पीडीए के इस मजबूत सामाजिक गठजोड़ को धरातल पर और अधिक पुख्ता करने की रणनीति साफ तौर पर दिखाई दे रही है।
रायबरेली पहुंचने से पहले के घटनाक्रम पर नजर डालें तो, बछरावां क्षेत्र में ही अखिलेश यादव विशेष रूप से तैयार पीडीए रथ पर सवार हो गए थे। रास्ते भर जगह-जगह पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने उनका अभूतपूर्व और गर्मजोशी के साथ स्वागत किया। इसके बाद वे सीधे रायबरेली जनसभा स्थल पर पहुंचे। मौसम की खराबी और झमाझम बारिश के बावजूद हजारों की संख्या में पार्टी कार्यकर्ता और आम लोग इस विशाल सभा में डटे रहे, जो सपा के बढ़ते सियासी तेवर को बयां करता है।
चुनाव आयोग पर साधा निशाना, 2022 के मुद्दों को फिर उछाला
अपने इस सियासी भाषण के दौरान अखिलेश ने चुनाव आयोग की भूमिका पर भी तीखी टिप्पणियां कीं। उन्होंने एक बार फिर से वर्ष 2022 के विधानसभा चुनावों के दौरान पीडीए वर्ग के वोटों की कथित सुनियोजित चोरी का पुराना मुद्दा उठाया और दोहराया कि यदि ऐसा न हुआ होता तो आज प्रदेश की तस्वीर कुछ और होती और सूबे में समाजवादी पार्टी की सरकार होती। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इन बयानों के जरिए सपा ने अभी से चुनाव के एजेंडे को सेट करना शुरू कर दिया है।
इस पीडीए रथयात्रा के आगाज के साथ ही समाजवादी पार्टी ने वर्ष 2027 के चुनावी रण के लिए अपने मुख्य मुद्दों, तेवरों और मजबूत सामाजिक समीकरणों की पूरी रूपरेखा जनता के बीच रख दी है। दूसरी तरफ, सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी की तरफ से भी अखिलेश यादव के इस अभियान और उनके तमाम सियासी बयानों पर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी हैं, जिससे यह साफ संकेत मिल रहे हैं कि मुख्य चुनाव से काफी पहले ही उत्तर प्रदेश का सियासी पारा बेहद हाई होने वाला है और दोनों प्रमुख दलों के बीच जुबानी जंग और तेज होगी।