Tiloi Assembly Caste Equations को समझने के लिए केवल पुराने जातीय आंकड़ों को देखना पर्याप्त नहीं है। तिलोई की सामाजिक संरचना में मुस्लिम, अनुसूचित जाति, ब्राह्मण, क्षत्रिय, यादव और दूसरे OBC समुदायों की उल्लेखनीय मौजूदगी रही है, लेकिन पुराने अनुमानों में इनकी संख्या को लेकर काफी अंतर मिलता है। 2026 की अंतिम मतदाता सूची के बाद यह सावधानी और जरूरी हो गई है, क्योंकि अब तिलोई विधानसभा में कुल 3,06,621 मतदाता हैं, जबकि SIR शुरू होने से पहले संख्या 3,48,696 थी। यानी मतदाता आधार में 42,075 की शुद्ध कमी, करीब 12.07 प्रतिशत, दर्ज हुई है।
उत्तर प्रदेश की 403 विधानसभा सीटों के जातिगत समीकरण / जातीय समीकरण और ‘सोशल इंजीनियरिंग’ पर चुनावी परिणाम काफी हद तक निर्भर करता है। राजनीतिक पर्यवेक्षकों की मानें तो उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 एक ऐसा निर्णायक अवसर है जो राज्य की दीर्घकालिक राजनीतिक दिशा को स्पष्ट करेगा।
तिलोई विधानसभा का क्रमांक 178 है। यह सामान्य श्रेणी की सीट है और अमेठी लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है। वर्तमान विधायक भाजपा के मयंकेश्वर शरण सिंह हैं। उनकी आधिकारिक विधानसभा प्रोफाइल में सामाजिक पृष्ठभूमि क्षत्रिय और शिक्षा स्नातक दर्ज है।
उत्तर प्रदेश एसआईआर (SIR) की अंतिम सूची 2026 के तहत राज्य के सभी 75 जिलों में विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान चलाया गया, जिसके परिणामस्वरूप कुल मतदाताओं की संख्या में कमी दर्ज की गई है।
अमेठी जिले के तिलोई विधानसभा के 2007 से 2022 तक का तुलनात्मक विश्लेषण, ताज़ा अपडेट, चुनावी इतिहास और पिछले चुनावों के नतीजे
उत्तर प्रदेश की सभी 403 विधानसभा सीटों के पिछले चुनावी नतीजों का 2007 से 2022 तक तुलनात्मक विश्लेषण, जिसमें प्रत्येक सीट का चुनावी इतिहास, विजेता और उपविजेता प्रत्याशी, मत प्रतिशत, जीत का अंतर और बदलते राजनीतिक समीकरण शामिल हैं।
तिलोई विधानसभा एक नजर में
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| विधानसभा | तिलोई |
| विधानसभा संख्या | 178 |
| जिला | अमेठी |
| लोकसभा क्षेत्र | अमेठी |
| आरक्षण | सामान्य |
| वर्तमान विधायक | मयंकेश्वर शरण सिंह |
| पार्टी | BJP |
| 2026 अंतिम मतदाता | 3,06,621 |
| पुरुष मतदाता | 1,65,232 |
| महिला मतदाता | 1,41,372 |
| थर्ड जेंडर | 17 |
| SIR पूर्व मतदाता | 3,48,696 |
| शुद्ध कमी | 42,075 |
| कमी प्रतिशत | 12.07% |
| महिला-पुरुष अनुपात | 856/1000 |
| 2022 कुल मतदाता | करीब 3,51,462 |
| 2022 विजेता | मयंकेश्वर शरण सिंह, BJP |
| 2022 उपविजेता | मोहम्मद नईम, SP |
| 2022 जीत का अंतर | 27,829 वोट |
| 2024 लोकसभा में तिलोई खंड | INC +18,118 वोट |
| प्रमुख पुराने सामाजिक समूह | मुस्लिम, SC/पासी, ब्राह्मण, क्षत्रिय, यादव, अन्य OBC |
2026 में तिलोई के 3,06,621 मतदाताओं में 1,65,232 पुरुष, 1,41,372 महिला और 17 थर्ड जेंडर मतदाता हैं। अमेठी जिले की चार विधानसभा सीटों में जगदीशपुर के बाद तिलोई की मतदाता संख्या दूसरी सबसे अधिक है।
Tiloi Assembly Caste Equations: पुराने जातीय अनुमान क्या बताते हैं?
Tiloi Assembly Caste Equations को लेकर उपलब्ध पुराने आंकड़ों में काफी अंतर है। एक पुराने विधानसभा-स्तरीय आकलन में करीब 3.40 लाख मतदाताओं के आधार पर मुस्लिम करीब 1.40 लाख, अनुसूचित जाति करीब 1 लाख, व्यापक OBC वर्ग करीब 80 हजार, ब्राह्मण 50 हजार, यादव 42 हजार और क्षत्रिय करीब 40 हजार बताए गए थे। इस डेटा में व्यापक श्रेणियां और उनकी उपजातियां एक-दूसरे से ओवरलैप करती हैं, इसलिए इन संख्याओं को जोड़कर कुल मतदाता निकालना सही नहीं होगा।
एक दूसरे पुराने राजनीतिक जनसांख्यिकीय मॉडल में तिलोई के लिए मुस्लिम करीब 30.89 प्रतिशत, पासी करीब 20.98 प्रतिशत, ब्राह्मण 9.47 प्रतिशत, क्षत्रिय 9.03 प्रतिशत और यादव करीब 6.52 प्रतिशत बताए गए थे। दोनों पुराने आकलनों में अंतर ही बताता है कि वर्तमान जाति-वार संख्या के रूप में किसी एक आंकड़े का इस्तेमाल सावधानी के बिना नहीं किया जाना चाहिए।
तिलोई का पुराना संकेतात्मक सामाजिक समीकरण
| सामाजिक समूह | पुराने अनुमानों में संकेत | डेटा नोट |
|---|---|---|
| मुस्लिम | करीब 31% से 1.40 लाख तक अलग अनुमान | पुराने गैर-आधिकारिक आंकड़ों में बड़ा अंतर |
| अनुसूचित जाति | एक पुराने अनुमान में करीब 1 लाख | 2011 जनसंख्या में SC हिस्सा 28.36% |
| पासी | दूसरे पुराने मॉडल में करीब 21% | SC के भीतर एक समुदाय; अलग श्रेणी नहीं जोड़ें |
| OBC | करीब 80 हजार का पुराना व्यापक अनुमान | यादव आदि इसमें ओवरलैप कर सकते हैं |
| ब्राह्मण | करीब 9.5% से 50 हजार | अलग-अलग पुराने अनुमान |
| क्षत्रिय/ठाकुर | करीब 9% से 40 हजार | पुराने अनुमान |
| यादव | करीब 6.5% से 42 हजार | OBC के भीतर शामिल |
| अन्य | विभिन्न समुदाय | वर्तमान विश्वसनीय संख्या उपलब्ध नहीं |
| 2026 कुल मतदाता | 3,06,621 | वर्तमान आधिकारिक कुल वोटर बेस |
इस तालिका का उद्देश्य वर्तमान जाति-वार मतदाता संख्या बताना नहीं, बल्कि उपलब्ध पुराने सामाजिक अनुमानों की सीमा दिखाना है। निर्वाचन नामावली में जाति या धर्म के आधार पर वर्तमान विधानसभा-वार वोटर संख्या प्रकाशित नहीं होती। इसलिए 2026 की 3,06,621 मतदाताओं वाली सूची पर पुराने सामाजिक प्रतिशतों को सीधे लागू करके नई संख्या निकालना तथ्यात्मक रूप से सही नहीं होगा।
तिलोई वोटर लिस्ट 2026: 3.48 लाख से घटकर 3.06 लाख
2027 के चुनाव से पहले तिलोई का सबसे महत्वपूर्ण नया आंकड़ा मतदाता सूची से आया है। SIR शुरू होने से पहले विधानसभा में 3,48,696 मतदाता दर्ज थे। प्रक्रिया के दौरान 2,84,779 मतदाताओं के फॉर्म का डिजिटाइजेशन हुआ, जबकि 63,917 फॉर्म प्राप्त नहीं हो सके। बाद में दावे-आपत्तियों और नए आवेदनों के बाद अंतिम सूची में संख्या 3,06,621 पहुंची।
तिलोई मतदाता सूची 2026
| विवरण | संख्या |
|---|---|
| SIR पूर्व मतदाता | 3,48,696 |
| प्रारंभिक डिजिटाइज्ड रिकॉर्ड | 2,84,779 |
| अंतिम मतदाता | 3,06,621 |
| पुरुष | 1,65,232 |
| महिला | 1,41,372 |
| थर्ड जेंडर | 17 |
| SIR के दौरान नए जुड़े नाम | 22,477 |
| बाद में विलोपित नाम | 635 |
| संशोधित प्रविष्टियां | 3,874 |
| SIR पूर्व से अंतिम शुद्ध कमी | 42,075 |
| कमी प्रतिशत | 12.07% |
| महिला-पुरुष अनुपात | 856/1000 |
यह अंतर किसी जाति, धर्म या पार्टी के मतदाताओं में समान अनुपात की कमी नहीं बताता। उपलब्ध आंकड़े यह नहीं बताते कि 42 हजार की शुद्ध कमी में कौन-से सामाजिक समूह कितनी संख्या में शामिल थे।
2022 के मुकाबले भी करीब 45 हजार छोटा वोटर बेस
2022 विधानसभा चुनाव में तिलोई में करीब 3,51,462 निर्वाचक थे और लगभग 2,04,940 वोट पड़े थे। मतदान प्रतिशत करीब 58.3 प्रतिशत रहा था। 2026 की अंतिम सूची 2022 के वोटर बेस से लगभग 44,841 मतदाता छोटी है।
दोनों अलग समय की निर्वाचक नामावलियां हैं, इसलिए अंतर को सीधे हटाए गए मतदाताओं की संख्या नहीं माना जाना चाहिए। फिर भी यह बदलाव 2027 की तुलना में महत्वपूर्ण है, क्योंकि पिछले चुनावों के कुल वोट और मार्जिन अब एक छोटे मतदाता आधार के संदर्भ में पढ़े जाएंगे।
तिलोई की करीब 95 प्रतिशत आबादी ग्रामीण
2011 की जनसंख्या पर आधारित विधानसभा प्रोफाइल के अनुसार तिलोई क्षेत्र की अनुमानित आबादी करीब 5,02,052 थी। इसमें लगभग 94.67 प्रतिशत आबादी ग्रामीण और केवल 5.33 प्रतिशत शहरी थी। अनुसूचित जाति की जनसंख्या हिस्सेदारी करीब 28.36 प्रतिशत थी। यह जनसंख्या डेटा है, वर्तमान वोटर प्रतिशत नहीं।
इस ग्रामीण स्वरूप का अर्थ है कि जातीय पहचान के साथ सड़क, कृषि, सिंचाई, स्वास्थ्य, पेयजल, गांवों की बाजार और तहसील से कनेक्टिविटी तथा स्थानीय रोजगार जैसे मुद्दे भी चुनावी माहौल का महत्वपूर्ण हिस्सा रहते हैं।
तिलोई विकासखंड में वर्तमान प्रशासनिक सूची के मुताबिक 59 ग्राम पंचायतें हैं। विधानसभा का भूगोल केवल तिलोई कस्बे तक सीमित नहीं है और अलग-अलग गांवों की सामाजिक संरचना में काफी भिन्नता हो सकती है।
मुस्लिम मतदाताओं को लेकर पुराने अनुमानों में सबसे ज्यादा अंतर
तिलोई के सामाजिक समीकरण में मुस्लिम आबादी का उल्लेख लगभग हर पुराने चुनावी प्रोफाइल में मिलता है। पुराने एक आकलन में संख्या 1.40 लाख तक बताई गई थी, जबकि दूसरे राजनीतिक मॉडल में हिस्सेदारी करीब 30.89 प्रतिशत रखी गई। पुराने परिसीमन पर आधारित ऐतिहासिक अध्ययनों में भी तिलोई को अपेक्षाकृत बड़ी मुस्लिम आबादी वाली सीट के रूप में दर्ज किया गया था।
हालांकि पुराने परिसीमन और वर्तमान सीट को एक जैसा नहीं माना जा सकता। 2008 के बाद विधानसभा की सीमाएं बदलीं और मौजूदा तिलोई को क्रमांक 178 मिला। इसलिए पुराने सामाजिक प्रतिशतों की सीधी तुलना भी सीमित है।
2012 में कांग्रेस के डॉ. मोहम्मद मुस्लिम ने विधानसभा चुनाव जीता था, जबकि 2022 में SP के मोहम्मद नईम दूसरे स्थान पर रहे। इन प्रत्याशियों के कुल वोट से मुस्लिम मतदाताओं का वास्तविक पार्टीवार मतदान नहीं निकाला जा सकता।
अनुसूचित जाति की आबादी भी तिलोई की बड़ी सामाजिक परत
2011 आधारित जनसंख्या प्रोफाइल में तिलोई की 28.36 प्रतिशत आबादी अनुसूचित जाति की थी। पुराने राजनीतिक अनुमानों में भी SC को सीट के बड़े सामाजिक समूहों में रखा गया था।
अनुसूचित जाति कोई एक जाति नहीं है। पासी, जाटव/चमार और दूसरे समुदाय अलग-अलग इलाकों में मौजूद हैं। इसलिए व्यापक SC प्रतिशत और किसी एक दल या प्रत्याशी के वोट को एक जैसा मानना उचित नहीं होगा।
एक पुराने राजनीतिक मॉडल में पासी करीब 20.98 प्रतिशत बताए गए थे, लेकिन इसे वर्तमान वोटर संख्या नहीं समझना चाहिए।
ब्राह्मण और क्षत्रिय भी पुराने समीकरण के बड़े हिस्से
एक पुराने अनुमान में ब्राह्मण मतदाता करीब 50 हजार और क्षत्रिय करीब 40 हजार बताए गए थे। दूसरे मॉडल में दोनों की हिस्सेदारी क्रमशः लगभग 9.47 और 9.03 प्रतिशत रखी गई।
मौजूदा विधायक मयंकेश्वर शरण सिंह की आधिकारिक सामाजिक पृष्ठभूमि क्षत्रिय दर्ज है, लेकिन 2022 में उन्हें मिले 99,472 वोट को किसी एक सामाजिक समूह का वोट नहीं माना जा सकता। उनका कुल मतदान कई समुदायों और क्षेत्रों से मिले समर्थन का aggregate परिणाम है।
तिलोई के पुराने चुनावी इतिहास में भी अलग-अलग सामाजिक पृष्ठभूमि के प्रत्याशी जीतते रहे हैं, जिससे उम्मीदवार, पार्टी और स्थानीय नेटवर्क की भूमिका स्पष्ट होती है।
यादव और दूसरे OBC समुदाय
पुराने एक अनुमान में यादव मतदाता करीब 42 हजार बताए गए थे, जबकि दूसरे मॉडल में इनकी हिस्सेदारी 6.52 प्रतिशत रखी गई। व्यापक OBC संख्या को एक पुराने प्रोफाइल में करीब 80 हजार बताया गया था।
यहां व्यापक OBC और यादव आंकड़ों को जोड़ना गलत होगा, क्योंकि यादव स्वयं OBC श्रेणी का हिस्सा हैं। इसी तरह क्षेत्र में अन्य पिछड़े समुदायों की अलग-अलग मौजूदगी है, जिनकी वर्तमान विधानसभा-वार विश्वसनीय संख्या उपलब्ध नहीं है।
कृषि प्रधान ग्रामीण क्षेत्र होने के कारण OBC या किसी दूसरे समुदाय के मतदाताओं के लिए भी खेती, स्थानीय बाजार, सिंचाई, खाद-बीज, सड़क और रोजगार जैसे साझा मुद्दे सामाजिक पहचान के समानांतर मौजूद रहते हैं।
मयंकेश्वर शरण सिंह: तिलोई के पुराने राजनीतिक चेहरों में
मयंकेश्वर शरण सिंह तिलोई की राजनीति के लंबे समय से सक्रिय चेहरों में हैं। उनकी आधिकारिक प्रोफाइल में जन्म 17 जून 1969, शिक्षा स्नातक और व्यवसाय कृषि दर्ज है। मौजूदा समय में वह भाजपा विधायक और प्रदेश सरकार में स्वास्थ्य राज्यमंत्री हैं।
उनकी राजनीतिक यात्रा की खास बात यह है कि उन्होंने अलग-अलग दौर में अलग पार्टी के साथ भी तिलोई से चुनाव जीता। 2007 में वह SP प्रत्याशी के रूप में केवल 457 वोट से जीते थे। 2017 में BJP प्रत्याशी के तौर पर उनका जीत का अंतर 44,047 और 2022 में 27,829 वोट रहा।
2022 में BJP ने 27,829 वोट से जीती सीट
2022 विधानसभा चुनाव में BJP के मयंकेश्वर शरण सिंह को 99,472 वोट, यानी 48.54 प्रतिशत मत मिले।
SP के मोहम्मद नईम को 71,643 वोट, यानी करीब 34.96 प्रतिशत वोट मिले।
कांग्रेस के प्रदीप सिंघल को 21,978 और BSP के रघुवंश को 6,120 वोट मिले। जीत का अंतर 27,829 वोट रहा।
तिलोई विधानसभा चुनाव 2022
| प्रत्याशी | पार्टी | वोट | वोट प्रतिशत |
|---|---|---|---|
| मयंकेश्वर शरण सिंह | BJP | 99,472 | 48.54% |
| मोहम्मद नईम | SP | 71,643 | 34.96% |
| प्रदीप सिंघल | INC | 21,978 | 10.72% |
| रघुवंश | BSP | 6,120 | 2.99% |
| NOTA | — | 1,810 | 0.88% |
| BJP की जीत | — | 27,829 | 13.58 प्रतिशत अंक |
कुल लगभग 2,04,940 वोट पड़े और मतदान प्रतिशत करीब 58.31 प्रतिशत रहा।
2017 में जीत का अंतर 44,047 वोट था
2017 में भी BJP के मयंकेश्वर शरण सिंह विजयी हुए थे। उन्हें 96,119 वोट, यानी करीब 49.11 प्रतिशत मत मिले।
BSP के मोहम्मद सऊद को 52,072 वोट और कांग्रेस के विनोद कुमार मिश्रा को 35,837 वोट मिले। BJP ने 44,047 वोट से चुनाव जीता।
तिलोई विधानसभा चुनाव 2017
| प्रत्याशी | पार्टी | वोट | वोट प्रतिशत |
|---|---|---|---|
| मयंकेश्वर शरण सिंह | BJP | 96,119 | 49.11% |
| मोहम्मद सऊद | BSP | 52,072 | 26.61% |
| विनोद कुमार मिश्रा | INC | 35,837 | 18.31% |
| अन्य | — | शेष | — |
| BJP की जीत | — | 44,047 | 22.50 प्रतिशत अंक |
2017 के मुकाबले 2022 में विजेता के वोट लगभग 3,353 बढ़े, लेकिन मुख्य प्रतिद्वंद्वी का वोट अधिक बढ़ा, जिससे जीत का अंतर 44 हजार से घटकर करीब 28 हजार रह गया।
2017 से 2022 में मुकाबला कैसे बदला?
| संकेतक | 2017 | 2022 |
|---|---|---|
| BJP वोट | 96,119 | 99,472 |
| BJP में बदलाव | — | +3,353 |
| मुख्य प्रतिद्वंद्वी | BSP 52,072 | SP 71,643 |
| कांग्रेस | 35,837 | 21,978 |
| BSP | 52,072 | 6,120 |
| जीत का अंतर | 44,047 | 27,829 |
यह बदलाव केवल aggregate party/candidate vote दिखाता है। इससे यह तय नहीं किया जा सकता कि किसी जाति या धर्म के मतदाता एक पार्टी से दूसरी पार्टी की ओर किस अनुपात में गए।
2012 में सिर्फ 2,710 वोट से जीती थी कांग्रेस
2012 विधानसभा चुनाव तिलोई के सबसे करीबी चुनावों में था।
कांग्रेस के डॉ. मोहम्मद मुस्लिम को 61,249 वोट, यानी 33.12 प्रतिशत मत मिले।
SP के मयंकेश्वर शरण सिंह को 58,539 वोट, यानी 31.65 प्रतिशत मिले।
BSP के नदीम अशरफ को 24,027 वोट मिले।
कांग्रेस की जीत का अंतर केवल 2,710 वोट था।
तिलोई विधानसभा चुनाव 2012
| प्रत्याशी | पार्टी | वोट | वोट प्रतिशत |
|---|---|---|---|
| डॉ. मोहम्मद मुस्लिम | INC | 61,249 | 33.12% |
| मयंकेश्वर शरण सिंह | SP | 58,539 | 31.65% |
| नदीम अशरफ | BSP | 24,027 | 13.00% |
| अन्य | — | शेष | — |
| कांग्रेस की जीत | — | 2,710 | 1.46 प्रतिशत अंक |
2012 में विजेता और उपविजेता के बीच डेढ़ प्रतिशत अंक से भी कम का अंतर था। इसके बाद 2017 में मुकाबले का स्वरूप पूरी तरह बदल गया और BJP ने लगभग आधे वोट हासिल किए।
2007 में सिर्फ 457 वोट से तय हुई थी सीट
2007 का चुनाव भी बेहद करीबी था। उस समय परिसीमन से पहले तिलोई विधानसभा का क्रमांक 92 था।
SP के मयंकेश्वर शरण सिंह को 44,513 वोट, यानी करीब 31.66 प्रतिशत मिले।
कांग्रेस के डॉ. मोहम्मद मुस्लिम को 44,056 वोट, यानी करीब 31.34 प्रतिशत वोट मिले।
BSP के दिनेश प्रताप सिंह को 31,257 वोट मिले।
SP ने मात्र 457 वोट से चुनाव जीता।
तिलोई विधानसभा चुनाव 2007
| प्रत्याशी | पार्टी | वोट | वोट प्रतिशत |
|---|---|---|---|
| मयंकेश्वर शरण सिंह | SP | 44,513 | 31.66% |
| डॉ. मोहम्मद मुस्लिम | INC | 44,056 | 31.34% |
| दिनेश प्रताप सिंह | BSP | 31,257 | करीब 22.2% |
| SP की जीत | — | 457 | 0.32 प्रतिशत अंक |
2008 के परिसीमन के बाद तिलोई को वर्तमान विधानसभा क्रमांक 178 मिला। इसलिए 2007 की बूथ और सामाजिक संरचना की 2012 के बाद के नतीजों से सीधी तुलना सावधानी से करनी चाहिए।
2007 से 2022 तक तिलोई का चुनावी इतिहास
| चुनाव | विजेता | पार्टी | वोट | जीत का अंतर |
|---|---|---|---|---|
| 2007* | मयंकेश्वर शरण सिंह | SP | 44,513 | 457 |
| 2012 | डॉ. मोहम्मद मुस्लिम | INC | 61,249 | 2,710 |
| 2017 | मयंकेश्वर शरण सिंह | BJP | 96,119 | 44,047 |
| 2022 | मयंकेश्वर शरण सिंह | BJP | 99,472 | 27,829 |
*2007 परिसीमन से पहले का चुनाव था।
यह क्रम तिलोई की राजनीति के दो अलग दौर दिखाता है। 2007 और 2012 में चुनाव बेहद करीबी थे, जबकि 2017 और 2022 में जीत का अंतर अपेक्षाकृत बड़ा रहा।
2019 लोकसभा चुनाव में BJP 15,164 वोट आगे
तिलोई विधानसभा अमेठी लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है।
2019 लोकसभा चुनाव में तिलोई विधानसभा खंड में BJP की स्मृति ईरानी को 96,292 वोट, जबकि कांग्रेस के राहुल गांधी को 81,128 वोट मिले।
BJP की विधानसभा-खंड बढ़त 15,164 वोट रही।
तिलोई विधानसभा खंड: लोकसभा चुनाव 2019
| प्रत्याशी | पार्टी | वोट | वोट प्रतिशत |
|---|---|---|---|
| स्मृति ईरानी | BJP | 96,292 | करीब 50.6% |
| राहुल गांधी | INC | 81,128 | करीब 42.7% |
| BJP की बढ़त | — | 15,164 | करीब 8 प्रतिशत अंक |
2019 में पूरे अमेठी लोकसभा क्षेत्र में भी BJP विजयी हुई थी। तिलोई उन विधानसभा खंडों में था जहां BJP प्रत्याशी को बढ़त मिली थी।
2024 लोकसभा में कांग्रेस 18,118 वोट आगे
2027 से पहले तिलोई का सबसे महत्वपूर्ण हालिया राजनीतिक संकेत 2024 लोकसभा चुनाव से मिलता है।
अमेठी लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के किशोरी लाल शर्मा को तिलोई विधानसभा खंड में 1,01,405 वोट, यानी करीब 51.58 प्रतिशत मत मिले।
BJP की स्मृति ईरानी को 83,287 वोट, यानी करीब 42.36 प्रतिशत मिले।
कांग्रेस की बढ़त 18,118 वोट रही।
तिलोई विधानसभा खंड: लोकसभा चुनाव 2024
| प्रत्याशी | पार्टी | वोट | वोट प्रतिशत |
|---|---|---|---|
| किशोरी लाल शर्मा | INC | 1,01,405 | 51.58% |
| स्मृति ईरानी | BJP | 83,287 | 42.36% |
| BSP प्रत्याशी | BSP | 5,077 | करीब 2.58% |
| कांग्रेस की बढ़त | — | 18,118 | करीब 9.22 प्रतिशत अंक |
पूरे अमेठी लोकसभा क्षेत्र में भी कांग्रेस ने 2024 में जीत दर्ज की।
2019 से 2024 में विधानसभा खंड की बढ़त पलटी
| चुनाव | BJP | कांग्रेस | राजनीतिक बढ़त |
|---|---|---|---|
| 2019 लोकसभा | 96,292 | 81,128 | BJP +15,164 |
| 2024 लोकसभा | 83,287 | 1,01,405 | INC +18,118 |
पांच वर्षों में तिलोई विधानसभा खंड में लोकसभा चुनाव की बढ़त की दिशा बदल गई। 2019 में BJP 15,164 वोट आगे थी, जबकि 2024 में कांग्रेस 18,118 वोट आगे रही।
इसे किसी जाति अथवा धार्मिक समुदाय के वोट ट्रांसफर का प्रमाण नहीं माना जा सकता। दोनों चुनावों में उम्मीदवार, गठबंधन और राष्ट्रीय राजनीतिक परिस्थितियां अलग थीं।
2022 विधानसभा और 2024 लोकसभा ने दिए अलग संकेत
| चुनाव | पहला स्थान | दूसरा स्थान | अंतर |
|---|---|---|---|
| 2022 विधानसभा | BJP 99,472 | SP 71,643 | BJP +27,829 |
| 2024 लोकसभा खंड | INC 1,01,405 | BJP 83,287 | INC +18,118 |
2022 में BJP ने विधानसभा सीट स्पष्ट अंतर से जीती थी। दो साल बाद लोकसभा चुनाव में कांग्रेस उसी भौगोलिक खंड में आगे रही।
दोनों परिणामों को साथ देखने पर इतना जरूर स्पष्ट है कि तिलोई का मतदान व्यवहार विधानसभा और लोकसभा चुनाव में एक जैसा नहीं रहा। इसलिए 2024 के संसदीय परिणाम को 2027 का सीधा पूर्वानुमान मानना उचित नहीं होगा।
तिलोई मेडिकल कॉलेज 2027 से पहले सबसे बड़ा विकास प्रोजेक्ट
तिलोई के विकास से जुड़ा सबसे बड़ा प्रोजेक्ट स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय है। करीब 16.5 एकड़ भूमि पर लगभग 300 करोड़ रुपये की लागत से मेडिकल कॉलेज और अस्पताल परिसर विकसित किया जा रहा है। 2025 में कॉलेज को पहले 50 और बाद में 100 MBBS सीटों की अनुमति मिली।
हालांकि निर्माण का एक महत्वपूर्ण हिस्सा निर्धारित समय से पीछे रहा। मार्च 2026 तक मुख्य अस्पताल भवन पूरा नहीं हो सका था। पहले जनवरी और फिर मार्च तक काम पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था। जून 2026 में भी परियोजना की प्रगति की प्रशासनिक समीक्षा और निरीक्षण हुआ।
2027 तक मेडिकल कॉलेज का अस्पताल पूरी क्षमता से कितना काम करता है, डॉक्टर और जांच सुविधाएं कितनी उपलब्ध होती हैं और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों को कितनी प्रत्यक्ष स्वास्थ्य सुविधा मिलती है—यह स्थानीय विकास के मूल्यांकन का बड़ा विषय रहेगा।
मेडिकल कॉलेज ने तिलोई को स्वास्थ्य केंद्र के रूप में नई पहचान दी
2026 में अमेठी और आसपास के कई गंभीर मरीजों को उपचार के लिए तिलोई मेडिकल कॉलेज रेफर किए जाने की खबरें सामने आईं। इससे यह संस्थान जिले के स्वास्थ्य ढांचे में धीरे-धीरे बड़ा रेफरल केंद्र बनता दिखाई देता है।
यह विकास तिलोई की पुरानी ग्रामीण पहचान में एक नया संस्थागत पहलू जोड़ता है। मेडिकल कॉलेज के पूरी तरह विकसित होने पर स्वास्थ्य के साथ स्थानीय रोजगार, किराये के आवास, बाजार और परिवहन पर भी व्यापक असर पड़ सकता है।
सड़क और एक्सप्रेसवे कनेक्टिविटी का सवाल
तिलोई के कई ग्रामीण क्षेत्रों के लिए बड़ी सड़कों तक पहुंच आज भी महत्वपूर्ण स्थानीय प्रश्न है। इन्हौना से पूर्वांचल एक्सप्रेसवे की ओर जाने वाली करीब तीन किलोमीटर सड़क की खराब हालत को लेकर स्थानीय लोगों ने मरम्मत की मांग उठाई थी। इसी तरह खानापुर चपरा-शंकरगंज मार्ग पर गड्ढों और खराब सड़क के कारण स्कूली बच्चों और स्थानीय यात्रियों की परेशानी की शिकायतें सामने आईं।
तिलोई की करीब 95 प्रतिशत ग्रामीण आबादी को देखते हुए गांवों को राष्ट्रीय राजमार्ग, पूर्वांचल एक्सप्रेसवे, बाजार, स्कूल और अस्पताल से जोड़ने वाले संपर्क मार्ग बड़े हाईवे जितने ही महत्वपूर्ण हैं।
2027 में सड़क का सवाल केवल कितने किलोमीटर मार्ग बने, इस आधार पर नहीं बल्कि उनकी गुणवत्ता और रोजाना इस्तेमाल की वास्तविक स्थिति पर भी आंका जाएगा।
पेयजल और जल जीवन मिशन की जमीनी स्थिति
ग्रामीण पेयजल भी तिलोई के स्थानीय मुद्दों में शामिल है। जून 2026 में तिलोई तहसील के पाकर गांव से जल जीवन मिशन की पाइपलाइन होने के बावजूद कुछ घरों तक घरेलू कनेक्शन नहीं पहुंचने की शिकायत दर्ज हुई थी। बाद में शिकायत को निस्तारित दिखाया गया।
एक या कुछ गांवों की शिकायत से पूरे विधानसभा क्षेत्र की स्थिति तय नहीं होती, लेकिन यह दिखाता है कि पाइपलाइन बिछने के बाद अंतिम घर तक कनेक्शन, नियमित जलापूर्ति और रखरखाव भी योजनाओं की वास्तविक सफलता के पैमाने होंगे।
खेती और ग्रामीण रोजगार अभी भी मूल आर्थिक सवाल
तिलोई की 94 प्रतिशत से अधिक ग्रामीण आबादी के कारण कृषि यहां की सामाजिक-आर्थिक संरचना का केंद्रीय हिस्सा है। मौजूदा विधायक की आधिकारिक प्रोफाइल में भी व्यवसाय कृषि दर्ज है।
किसानों के लिए सिंचाई, खाद-बीज, फसल मूल्य, आवारा पशु, ग्रामीण सड़क और स्थानीय बाजार तक पहुंच जैसे मुद्दे अलग-अलग जातीय समुदायों में साझा हो सकते हैं।
मेडिकल कॉलेज और बेहतर सड़क कनेक्टिविटी जैसे नए संस्थागत प्रोजेक्ट क्षेत्र की अर्थव्यवस्था में धीरे-धीरे गैर-कृषि रोजगार के विकल्प भी बढ़ा सकते हैं, लेकिन 2027 तक उनका वास्तविक प्रभाव अलग से देखने योग्य होगा।
महिला मतदाता 1.41 लाख से ज्यादा
2026 की अंतिम सूची में तिलोई में 1,41,372 महिला मतदाता हैं, जबकि पुरुष मतदाता 1,65,232 हैं। महिला-पुरुष अनुपात करीब 856 महिलाएं प्रति 1,000 पुरुष मतदाता है।
इस संख्या को किसी एक राजनीतिक रुझान के रूप में नहीं देखा जा सकता। स्वास्थ्य, पेयजल, सड़क, स्कूल, सार्वजनिक परिवहन, परिवार की आय और स्थानीय रोजगार जैसे मुद्दे अलग-अलग सामाजिक समूहों के परिवारों के चुनावी मूल्यांकन का हिस्सा हो सकते हैं।
नई सूची में पुरुष और महिला दोनों मतदाताओं का कुल आकार पुराने जातीय अनुमानों से काफी अलग संदर्भ तैयार करता है।
2026 की नई सूची ने पुराने जातीय गणित को कितना बदला?
तिलोई का मतदाता आधार पिछले वर्षों में इस तरह बदला है:
| वर्ष/सूची | कुल मतदाता |
|---|---|
| पुराने जातीय अनुमान का दौर | करीब 3.40 लाख |
| 2017 विधानसभा | 3,39,377 |
| 2022 विधानसभा | करीब 3,51,462 |
| 2024 मतदाता सूची | करीब 3,47,746 |
| SIR पूर्व 2026 | 3,48,696 |
| 2026 अंतिम सूची | 3,06,621 |
2017 से 2024 तक सीट का कुल वोटर बेस लगभग 3.4 से 3.5 लाख के बीच रहा। 2026 में यह पहली बार घटकर करीब 3.07 लाख रह गया।
इसका अर्थ यह नहीं कि सभी पुरानी जातीय संख्याएं समान 12 प्रतिशत घट गई हैं। SIR के सामाजिक समूहवार आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं। इसलिए पुराने मुस्लिम, पासी, ब्राह्मण, क्षत्रिय या यादव अनुमानों को उसी अनुपात में घटाकर 2027 की संख्या बनाना उचित नहीं होगा।
तिलोई में चुनावी मार्जिन लगातार बदलता रहा
| चुनाव | राजनीतिक बढ़त |
|---|---|
| 2007 विधानसभा* | SP +457 |
| 2012 विधानसभा | INC +2,710 |
| 2017 विधानसभा | BJP +44,047 |
| 2019 लोकसभा खंड | BJP +15,164 |
| 2022 विधानसभा | BJP +27,829 |
| 2024 लोकसभा खंड | INC +18,118 |
*2007 वर्तमान परिसीमन से पहले का चुनाव था।
यह इतिहास तिलोई के बदलते चुनावी चरित्र की स्पष्ट तस्वीर देता है। 2007 में केवल 457 और 2012 में 2,710 वोट से चुनाव तय हुआ था। 2017 में मार्जिन अचानक 44 हजार से ऊपर पहुंचा। 2022 में यह 27,829 रहा और 2024 के लोकसभा चुनाव में खंड स्तर पर बढ़त की दिशा फिर बदल गई।
2027 में तिलोई विधानसभा का चुनावी गणित क्या कहता है?
2027 से पहले तिलोई की राजनीतिक तस्वीर में पहला बड़ा तथ्य 3,06,621 मतदाताओं वाली नई सूची है। SIR से पहले सीट पर 3,48,696 मतदाता थे। यानी अगले विधानसभा चुनाव का वोटर बेस पिछले चुनावों की तुलना में स्पष्ट रूप से छोटा है।
दूसरा तथ्य 2022 का विधानसभा परिणाम है। मयंकेश्वर शरण सिंह ने BJP से 99,472 वोट लेकर SP के मोहम्मद नईम को 27,829 वोट से हराया था। 2017 के मुकाबले BJP की जीत का अंतर घटा, लेकिन पार्टी ने सीट बरकरार रखी।
तीसरा बड़ा संकेत 2024 लोकसभा चुनाव है। 2019 में BJP तिलोई खंड में 15,164 वोट आगे थी, जबकि 2024 में कांग्रेस 18,118 वोट आगे रही। संसदीय और विधानसभा चुनाव अलग प्रकृति के होते हैं, इसलिए यह केवल हालिया aggregate political context देता है, 2027 की निश्चित दिशा नहीं।
चौथा पहलू विकास का है। करीब 300 करोड़ रुपये का मेडिकल कॉलेज, 100 MBBS सीटों की मान्यता, अस्पताल भवन के निर्माण में देरी, ग्रामीण सड़क कनेक्टिविटी और पेयजल योजनाओं की अंतिम घर तक पहुंच—ये सभी 2027 तक क्षेत्र के विकास मूल्यांकन का हिस्सा रहेंगे।
पुराने सामाजिक अनुमानों में मुस्लिम, अनुसूचित जाति/पासी, ब्राह्मण, क्षत्रिय, यादव और दूसरे OBC समुदाय तिलोई की विविध संरचना का हिस्सा दिखाई देते हैं। लेकिन पुराने अनुमानों में काफी अंतर है और वर्तमान जाति-वार सरकारी वोटर डेटा उपलब्ध नहीं है। चुनाव परिणाम भी यह नहीं बताते कि किसी जाति या धर्म ने किस प्रत्याशी को कितने वोट दिए।
इसलिए 2027 में तिलोई को केवल पुराने जातीय आंकड़ों से पढ़ना पर्याप्त नहीं होगा। 3,06,621 मतदाताओं वाली नई सूची, 2022 का 27,829 वोट का विधानसभा अंतर, 2024 लोकसभा खंड में 18,118 वोट की उलटी बढ़त, उम्मीदवार की स्थानीय स्वीकार्यता, मतदान प्रतिशत और मेडिकल कॉलेज, सड़क, पेयजल तथा ग्रामीण रोजगार जैसे मुद्दे मिलकर मुकाबले का व्यापक संदर्भ तय करेंगे।
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