Aug 04, 2026 09:22 am ISTलाइव हिन्दुस्तान
2025 विधानसभा चुनाव में प्रशांत किशोर की जनसुराज पार्टी सभी 238 सीटों पर चुनाव हार गई थी। वहीं 236 प्रत्याशियों की जमानत जब्त हो गई थी। एक साल के बाद पीके ने बांकीपुर में जनता से कैसे संवाद स्थापित किया कि उन्होंने बीजेपी का किला ही ढहा दिया।

प्रशांत किशोर की पार्टी को 2025 के विधानसभा चुनाव में मिली थी करारी हार
प्रशांत किशोर की जिस ''जनसुराज पार्टी' को एक साल पहले विधानसभा चुनाव में खाता खोलना भी मुश्किल हो गया था, उसी ने बांकीपुर विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में बीजेपी का किला ढहा दिया। यह सीट नितिन नबीन को राज्यसभा सांसद बनाए जाने के बाद खाली हुई थी। इस सीट पर बीजेपी का करीब तीन दशक से कब्जा था। इतना ही नहीं बांकीपुर सीट पर आरजेडी की प्रत्याशी की जमानत जब्त हो गई। ऐसे में इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि प्रशांत किशोर ने ना केवल बीजेपी के वोट कम किए हैं बल्कि आरजेडी के वोटबैंक में बड़ी सेंध लगा दी है।
2014 में शुरू हुआ राजनीतिक सफर
प्रशांत किशोर ने राजनीति के क्षेत्र में काम करना 2014 में शुरू किया था।उन्होंने बीजेपी के लिए लोकसभा चुनाव की रणनीति तैयार की और इसके बाद नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बीजेपी को बड़ी सफलता हासिल हुई। इसके बाद ही उन्होंने अपनी कंपनी I-PAC बनाई जो कि अलग-अलग पार्टियों के लिए चुनावी रणनीति बनाने का काम करती थी। प्रशांत किशोर की कंपनी ने टीएमसी समेत कई दलों के लिए काम किया और इसके बाद 2018 में वह जेडीयू में शामिल हो गए। उन्हें जेडीयू का उपाध्यक्ष बनाया गया। हालांकि तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के साथ उनकी नहीं जमी।
जेडीयू से लगा झटका तो बनाया अपना दल
सीएए और एनआरसी को लेकर उनका नीतीश कुमार से मतभेद हो गया। 2020 में उन्हें आरजेडी से निष्कासित कर दिया गया। इसके बाद प्रशांत किशोर ने फैसला किया कि वह किसी अन्य राजनीतिक दल का हिस्सा नहीं बनेंगे बल्कि अपना दल अलग बनाएएँगे। जन सुराज का गठन करने के बाद प्रशांत किशोर ने बिहार में पदयात्रा की और लोगों को समझाने की कोशिश की कि जातिवाद के पीछ कई अहम मुद्दे छिप जाते हैं। उन्होंने स्वास्थ्य, रोजगार, शिक्षा और बिहार से पलायन का मुद्दा उठाया। 2024 में उन्होंने अपने संगठन को राजनीतिक दल के रूप में ब दल दिया। प्रशांत किशोर ने कहा कि यह बिहार के लोगों के लिए एक विकल्प है।
क्यों विधानसभा चुनाव में मिली थी करारी हार
बिहार विधानसभा चुनाव में कुल 243 सीटों में से जनसुराज ने 238 उम्मीदवार उतारे थे। इस चुनाव में प्रशांत किशोर के लिए खाता खोलना तो दूर 236 उम्मीदवारों की जमानत भी नहीं बच पाई। यह उनके लिए बड़ा झटका था। जानकारों का कहना है कि जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं की कमी और पहचान की कमी की वजह से विधानसभा चुनाव में उन्हें कोई सफलता नहीं मिली। इसके अलावा एक बड़ी वजह यह भी रही कि प्रशांत किशोर खुद चुनाव में नहीं उतरे। ऐसे में पार्टी की ओर से जनता को कोई बड़ा चेहरा नहीं नजर आ रहा था।
बांकीपुर में कैसे जीत गए प्रशांत किशोर
बांकीपुर का उपचुनाव एकदम अलग था। पहली बात तो यह कि इसका सरकार से ज्यादा कोई लेना-देना नीहं था। वहीं बांकीपुर के चुनाव में जनता का सीधा प्रशांत किशोर से संपर्क हुआ और वे उन्हें जानने लगे। वहीं बीजेपी के प्रत्याशी प्रशांत किशोर के आगे हलके पड़ रहे थे। जानकारों का कहना है कि हाल ही में हुए युवाओं के आंदोलन का भी असर लोगों पर पड़ा और वे विकल्प तलाशने लगे। अब प्रशांत किशोर ने जब पहला चुनाव लड़ा तो उन्हें बड़ी सफलता मिली। प्रशांत किशोर बिहार को विकल्प देने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे।
