20 हजार से ज्यादा मरीजों का होता है रोज इलाज, फिर भी दिल्ली के 4 बड़े अस्पतालों में 1523 पद खाली

Published on 26 जुल॰ 2026

लोकसभा में सरकार ने खुद स्वीकार किया है कि देश के सबसे बड़े और सबसे व्यस्त सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों, नर्सिंग स्टाफ और पैरामेडिकल स्टाफ के हजारों पद खाली पड़े हैं. सांसद जय प्रकाश के एक सवाल के जवाब में स्वास्थ्य राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव ने 24 जुलाई 2026 को लोकसभा में बताया कि सफदरजंग अस्पताल, डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल, लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज और नजफगढ़ के RHTC जैसे चार बड़े केंद्रीय अस्पतालों में पिछले तीन वर्षों से वैकेंसी की स्थिति लगातार गंभीर बनी हुई है.

मंत्री के जवाब के मुताबिक, इन चारों अस्पतालों में कुल स्वीकृत, भरे और खाली पदों की संख्या में 2023-24 में 2015 पद खाली थे, जो 2025-26 में घटकर 1523 तो हुए मगर बड़े अस्पतालों के नजरिए से ये नंबर भी बड़ा है. सरकार ने दावा किया कि UPSC को समय पर वैकेंसी की रिपोर्टिंग, नर्सिंग ऑफिसर के लिए साल में दो बार होने वाली NORCET परीक्षा और ग्रुप बी व सी के गैर-शिक्षण पदों के लिए CRE व स्टाफ सिलेक्शन कमीशन जैसी प्रक्रियाओं के जरिए पद भरे जा रहे हैं, लेकिन आंकड़े बताते हैं कि इतने प्रयासों के बावजूद वैकेंसी अब भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है.

सफदरजंग अस्पताल

एशिया के सबसे बड़े मल्टी-स्पेशियलिटी अस्पतालों में गिने जाने वाले सफदरजंग अस्पताल (VMMC & SJH) पर मरीजों का दबाव सबसे ज्यादा है. यहां रोजाना करीब 10,000 से ज्यादा OPD मरीज इलाज कराने आते हैं और अस्पताल की बेड क्षमता 3,000 से अधिक है. आंकड़ों पर नजर डालें तो यहां डॉक्टरों के 2023-24 में 633 स्वीकृत पदों में से 475 भरे थे और 158 खाली थे. 2025-26 आते-आते स्वीकृत पद बढ़कर 638 हो गए, लेकिन भरे हुए पद घटकर 449 रह गए, यानी खाली पदों की संख्या बढ़कर 189 पहुंच गई. नर्सिंग स्टाफ की हालत भी बहुत अलग नहीं है. 2083 स्वीकृत पदों में से 2025-26 में सिर्फ 1912 भरे थे और 171 खाली हैं. पैरामेडिकल स्टाफ में स्थिति सबसे खराब है, जहां 1392 स्वीकृत पदों में से 514 पद अब भी खाली पड़े हैं, हालांकि यह संख्या 2023-24 के 944 खाली पदों से काफी कम है.

Staff Shortage

डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल

केंद्र सरकार के कर्मचारियों (CGHS) और VIP सेवाओं के लिए जाना जाने वाला RML अस्पताल (ABVIMS & Dr. RMLH) रोजाना 3,500 से 4,000 मरीजों को OPD सेवा देता है और इसकी बेड क्षमता 1,420 है. यहां डॉक्टरों के मामले में हालात कुछ बेहतर दिखते हैं. 2023-24 में 383 स्वीकृत पदों में से 58 खाली थे, जो 2025-26 में 453 स्वीकृत पदों के मुकाबले घटकर 82 रह गए. नर्सिंग स्टाफ में सुधार साफ नजर आता है, जहां 2023-24 के 20 खाली पदों की तुलना में 2025-26 में सिर्फ 4 पद खाली हैं. हालांकि, पैरामेडिकल स्टाफ में खाली पदों की संख्या 146 से बढ़कर 130 हुई है, जो अब भी एक बड़ा आंकड़ा है.

लेडी हार्डिंग अस्पताल

महिला और बाल रोग चिकित्सा के प्रमुख केंद्र लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज एवं संबद्ध अस्पताल में रोजाना 6,000 से ज्यादा मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं, जबकि इसकी बेड क्षमता 1,450 है. यहां डॉक्टरों के खाली पदों की संख्या 2023-24 के 30 से बढ़कर 2025-26 में 51 हो गई है, जबकि स्वीकृत पद 346 से बढ़कर 383 हुए हैं. नर्सिंग स्टाफ में भी खाली पदों की संख्या 129 से बढ़कर 139 पहुंच गई है. पैरामेडिकल स्टाफ में स्थिति थोड़ी सुधरी है, यहां खाली पद 191 से घटकर 154 रह गए हैं.

Patient Presure

RHTC नजफगढ़

ग्रामीण क्षेत्रों के लिए एकीकृत स्वास्थ्य और प्रशिक्षण केंद्र के रूप में काम करने वाला RHTC नजफगढ़ आकार में सबसे छोटा है, यहां रोजाना 400 से 600 मरीज आते हैं और बेड क्षमता 163 है, लेकिन वैकेंसी दर के हिसाब से यह सबसे ज्यादा प्रभावित केंद्रों में शामिल है. यहां नर्सिंग स्टाफ के 49 स्वीकृत पदों में से पिछले तीन साल से लगातार सिर्फ 7 पद ही भरे हैं, यानी 42 पद हर साल खाली रहे हैं. डॉक्टरों के मामले में भी 46 स्वीकृत पदों में से 2025-26 में 13 पद खाली हैं. पैरामेडिकल स्टाफ के 63 पदों में से 34 पद अब भी रिक्त हैं.

संख्या घटी, लेकिन चुनौती बरकरार

सरकार के आंकड़ों से यह साफ है कि पिछले तीन वर्षों में चारों केंद्रीय अस्पतालों में कुल खाली पदों की संख्या 2015 से घटकर 1523 हुई है, जो एक सकारात्मक संकेत है. लेकिन जिस रफ्तार से मरीजों की संख्या हर दिन बढ़ रही है. सफदरजंग में 10,000 से ज्यादा, RML में करीब 4,000, लेडी हार्डिंग में 6,000 से ज्यादा उस हिसाब से यह कमी अब भी मरीजों की देखभाल पर सीधा असर डाल रही है. खासतौर पर पैरामेडिकल स्टाफ और नर्सिंग की कमी, जो मरीजों की रोजमर्रा की देखभाल की रीढ़ होते हैं, इन अस्पतालों के लिए अब भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है.

देवेश कुमार पांडेय

देवेश कुमार पांडेय

देवेश कुमार पांडेय TV9 Hindi में बतौर सब-एडिटर काम कर रहे हैं. उत्तर प्रदेश के अमेठी के रहने वाले देवेश को राजनीति के अलावा इतिहास, साहित्य में दिलचस्पी है.  साल 2024 में भारतीय जन संचार संस्थान (IIMC) के अमरावती कैंपस से पत्रकारिता की पढ़ाई की है. देवेश को घूमना, लिखना, पढ़ना और पॉडकास्ट सुनना पसंद है.

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