सितारगंज तहसील में 14 हजार रुपये की रिश्वत के मामले में विजिलेंस द्वारा दो कर्मियों को पकड़े जाने के बाद राजस्व कर्मियों ने जमकर विरोध प्रदर्शन किया और तहसील गेट पर ताला जड़ दिया। करीब 20 घंटे तक चले इस गतिरोध और प्रशासनिक वार्ता के बाद विजिलेंस टीम ने दोनों कर्मचारियों को रिहा कर दिया जिसके बाद कामकाज सामान्य हो सका।
सितारगंज, 30 जुलाई 2026 (दून हॉराइज़न)।
Sitarganj Tehsil Vigilance : खटीमा से आई विजिलेंस टीम को सितारगंज तहसील में दो तहसील कर्मियों को रिश्वत के मामले में गिरफ्तार करना काफी भारी पड़ गया। विजिलेंस की इस कार्रवाई को पूरी तरह गलत और नियम विरुद्ध बताते हुए तमाम राजस्व कर्मियों ने भारी आक्रोश जताया। कर्मियों ने एकजुट होकर तहसील के मुख्य गेट पर भारी ताला जड़ दिया और जोरदार आंदोलन शुरू कर दिया।
कार्रवाई के विरोध में राजस्व कर्मियों के आक्रामक रुख के चलते विजिलेंस टीम रातभर तहसील परिसर के अंदर ही कैद होकर रह गई। बाहर से गेट बंद होने के कारण टीम के सदस्य चाहकर भी बाहर नहीं निकल सके। परिसर के भीतर का माहौल पूरी तरह तनावपूर्ण बना रहा और दोनों पक्षों के बीच कशमकश जारी रही।
उच्चाधिकारियों के साथ कई दौर की लंबी बातचीत चली जिसके बाद आखिरकार यह पूरा गतिरोध समाप्त हो सका। आपसी सहमति और तमाम शर्तों के तय होने के बाद पकड़े गए दोनों राजस्व कर्मियों को विजिलेंस टीम ने छोड़ दिया। इसके बाद कर्मचारियों ने अपना धरना समाप्त किया और तहसील के मुख्य गेट पर लगा ताला खोलकर नियमित कार्य शुरू कर दिया।
सितारगंज तहसील में विजिलेंस की इस कार्रवाई के विरोध में राजस्व कर्मियों का धरना-प्रदर्शन और अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार लगभग बीस घंटे तक लगातार जारी रहा। गुरुवार को दोनों पक्षों के बीच बनी सहमति के बाद ही यह बड़ा आंदोलन वापस लेने की औपचारिक घोषणा की गई।
मूल मामले के अनुसार उनतीस जुलाई यानी बुधवार को विजिलेंस टीम ने तहसील परिसर में एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया था। टीम ने एक वरिष्ठ सहायक और एक संग्रह अमीन को चौदह हजार रुपये की रिश्वत लेने के पुख्ता आरोपों के आधार पर दबोच लिया था। इस कार्रवाई की भनक लगते ही बड़ी संख्या में राजस्व कर्मी मौके पर एकजुट हो गए और परिसर में ही धरना लगाकर बैठ गए।
धरना दे रहे कर्मचारियों ने कड़ा आरोप लगाया कि पूरी कार्रवाई एकतरफा तरीके से की गई है और इसमें तमाम विभागीय प्रक्रियाओं की पूरी अनदेखी की गई है। इसी बात से नाराज होकर उन्होंने तत्काल प्रभाव से संपूर्ण कार्य बहिष्कार का ऐलान कर दिया। विरोध प्रदर्शन को और तेज करते हुए उन्होंने तहसील कार्यालय के मुख्य प्रवेश द्वार पर मजबूत ताला जड़ दिया जिससे स्थिति पूरी तरह बिगड़ गई।
इस अप्रत्याशित धरने के चलते पूरे तहसील कार्यालय का कामकाज पूरी तरह ठप पड़ गया और दूर-दूर तक सन्नाटा पसर गया। नामांतरण, आय प्रमाण पत्र, जाति प्रमाण पत्र, निवास प्रमाण पत्र, खतौनी की नकल और भूमि संबंधी अन्य जरूरी अभिलेखों के कार्य पूरी तरह प्रभावित हो गए। दूर-दराज के ग्रामीण अंचलों से सुबह-सुबह तहसील पहुंचे आम लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा और अंततः बिना काम कराए ही वापस लौटना पड़ा।
आम जनता को हुई इस भीषण परेशानी को देखते हुए प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया और अधिकारी हरकत में आ गए। गतिरोध को किसी भी तरह समाप्त कराने के लिए बुधवार देर रात से लेकर गुरुवार तक प्रशासनिक अधिकारियों और विभिन्न कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधियों के बीच लगातार बैठकें हुईं। उच्चाधिकारियों के स्तर पर ठोस समाधान निकलने के बाद ही दोनों पक्षों के बीच आपसी सहमति बन पाई।
सहमति बनने के तुरंत बाद कर्मचारियों ने अपने आंदोलन को समाप्त करने का ऐलान किया और विजिलेंस टीम ने गिरफ्तार किए गए दोनों कर्मचारियों को रिहा कर दिया। कर्मचारियों के बाहर आते ही धरना स्थल का माहौल बदला और मुख्य गेट का ताला खोल दिया गया। इसके बाद तमाम अधिकारी और कर्मचारी अपने-अपने कमरों में लौटे और नियमित सरकारी कार्यों में जुट गए।
करीब बीस घंटे तक पूरी तरह ठप पड़े तहसील के कामकाज के दोबारा सुचारू रूप से शुरू होने से आम जनता ने बहुत बड़ी राहत की सांस ली। हालांकि कर्मचारी संगठनों ने यह साफ चेतावनी दी है कि भविष्य में यदि उनकी मांगों की अनदेखी की गई या कर्मचारियों के हितों के खिलाफ कोई कदम उठाया गया तो वे दोबारा कड़ा आंदोलन शुरू कर देंगे।
एसडीएम तुषार सैनी ने स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया कि सभी पक्षों के साथ सार्थक बातचीत के माध्यम से उचित समाधान निकाल लिया गया है। तहसील परिसर में अब पूरी तरह सामान्य व्यवस्था बहाल कर दी गई है और दूर-दराज से अपने जरूरी कागजात बनवाने आ रहे लोगों को अब किसी प्रकार की असुविधा नहीं हो रही है। विजिलेंस की यह नाटकीय कार्रवाई पूरे क्षेत्र में चर्चा का बड़ा विषय बनी रही।