महाराष्ट्र के पुणे में छोटे बच्चों में हाथ-पैर-मुंह की बीमारी (Hand Foot Mouth Disease) के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। डॉक्टरों के अनुसार, इस साल खासतौर पर 2 से 7 साल की उम्र के बच्चों में यह संक्रमण ज्यादा देखा जा रहा है। चिंता की बात यह है कि कुछ मामलों में एक ही बच्चे को दो से तीन बार इस बीमारी की चपेट में आने की जानकारी सामने आई है।
चिकित्सकों का कहना है कि यह बीमारी आमतौर पर छोटे बच्चों में वायरल संक्रमण के कारण होती है। इसमें बच्चों के हाथ, पैर और मुंह के आसपास छोटे-छोटे दाने या छाले हो सकते हैं। कई बार बच्चों को बुखार, गले में दर्द और खाना खाने में परेशानी जैसी समस्याएं भी होती हैं।
एक ही बच्चे में दो-तीन बार संक्रमण
डॉक्टरों के मुताबिक, इस साल पहली बार ऐसे मामले ज्यादा देखने को मिले हैं, जिनमें एक बच्चे को ठीक होने के बाद दोबारा या तीसरी बार भी हाथ-पैर-मुंह की बीमारी हुई। विशेषज्ञों के अनुसार, इसके पीछे अलग-अलग वायरस स्ट्रेन या बच्चों में संक्रमण के प्रति प्रतिरोधक क्षमता से जुड़े कारण हो सकते हैं।
यह बीमारी संक्रमित बच्चे के संपर्क में आने, खांसने-छींकने से निकलने वाली बूंदों और संक्रमित सतहों के संपर्क से फैल सकती है। स्कूल, प्ले स्कूल और डे-केयर सेंटर जैसी जगहों पर बच्चों के बीच संपर्क अधिक होने के कारण संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ जाता है।
डॉक्टरों ने दी सावधानी बरतने की सलाह
चिकित्सकों ने अभिभावकों को बच्चों की साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखने की सलाह दी है। बच्चों को नियमित रूप से हाथ धोने की आदत डालना, संक्रमित बच्चे से दूरी बनाए रखना और उनके खिलौने व इस्तेमाल की चीजों को साफ रखना जरूरी बताया गया है।
अगर बच्चे में बुखार, मुंह में छाले, हाथ-पैर पर लाल चकत्ते या खाने-पीने में परेशानी जैसे लक्षण दिखाई दें तो डॉक्टर से सलाह लेने की सलाह दी गई है।
आमतौर पर गंभीर नहीं, लेकिन देखभाल जरूरी
विशेषज्ञों के अनुसार, हाथ-पैर-मुंह की बीमारी ज्यादातर मामलों में गंभीर नहीं होती और कुछ दिनों में ठीक हो जाती है। लेकिन छोटे बच्चों में पानी की कमी और कमजोरी जैसी समस्या हो सकती है। इसलिए बीमारी के दौरान बच्चे को पर्याप्त तरल पदार्थ देना और उनकी स्थिति पर नजर रखना जरूरी है।
पुणे में बढ़ते मामलों को देखते हुए डॉक्टरों ने अभिभावकों से सतर्क रहने और बच्चों में लक्षण दिखने पर समय पर इलाज कराने की अपील की है।