तबाही के बाद भी नहीं टला खतरा, फुटेज में देंखे चीन सीमा के पास बनीं 2 नई झीलें; 633 मौतें, हजारों लापता

Published on 29 अग॰ 2026

तबाही के बाद भी नहीं टला खतरा, फुटेज में देंखे चीन सीमा के पास बनीं 2 नई झीलें; 633 मौतें, हजारों लापता

नेपाल और तिब्बत में 26 अगस्त को आई भीषण बाढ़ और भूस्खलन के बाद हालात अब भी बेहद गंभीर बने हुए हैं। चीन-नेपाल सीमा के पास भूस्खलन और मलबे के कारण बनी दो नई जलराशियों ने अधिकारियों की चिंता बढ़ा दी है। हालांकि एक झील का पानी धीरे-धीरे निकल रहा है और उसका आकार घटा है, लेकिन दूसरी बड़ी जलराशि अब भी खतरा पैदा कर रही है। अधिकारियों को आशंका है कि यदि पानी अचानक बाहर निकला तो फिर से बाढ़ आ सकती है।

दो नई झीलों से फिर बाढ़ का खतरा

नेपाल-चीन सीमा के पास बुधवार को ग्लेशियर और मलबे के खिसकने के बाद अचानक आई बाढ़ ने भारी तबाही मचाई थी। तेज बहाव अपने साथ पानी के अलावा कीचड़, रेत, बजरी और बड़ी चट्टानें लेकर नीचे की ओर आया। इससे रास्ते, पुल, इमारतें और सीमावर्ती ढांचा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुआ।ताजा स्थिति में अधिकारियों की निगरानी दो नई बनी जलराशियों पर है। चीन की ओर से मिली जानकारी के मुताबिक एक झील धीरे-धीरे खाली हो रही है और उसका क्षेत्रफल करीब 21 हजार वर्ग मीटर कम हुआ है। इससे तत्काल झील फटने का खतरा कुछ कम हुआ है। हालांकि दूसरी बड़ी जलराशि की गहराई और उसके भीतर जमा पानी की पूरी स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है।

आपदा का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। नेपाल और तिब्बत को मिलाकर मृतकों की संख्या कम से कम 633 तक पहुंच गई है, जबकि करीब 2,500 से 3,000 लोग लापता बताए जा रहे हैं। आंकड़े लगातार अपडेट हो रहे हैं और दुर्गम इलाकों में राहत एवं बचाव अभियान जारी है।नेपाल में कई इलाकों तक पहुंचना बेहद मुश्किल हो गया है। सड़कें और पुल टूटने के कारण राहत दलों को प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचने में परेशानी हो रही है। खराब मौसम और भूस्खलन के खतरे के बीच हेलिकॉप्टर और अन्य माध्यमों से राहत सामग्री पहुंचाई जा रही है।

320 भारतीय नागरिक भी लापता

इस त्रासदी में बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक भी प्रभावित हुए हैं। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार करीब 320 भारतीय नागरिक लापता बताए गए हैं। इसके अलावा चीन के तिब्बत क्षेत्र में फंसे भारतीयों को निकालने के प्रयास भी जारी हैं। भारत ने नेपाल को मानवीय सहायता भेजी है और प्रभावित लोगों की मदद के लिए अभियान चलाया जा रहा है।

नई सरकार के सामने आर्थिक चुनौती

बाढ़ और भूस्खलन ने नेपाल की नई सरकार के सामने सिर्फ मानवीय संकट ही नहीं, बल्कि बड़ी आर्थिक चुनौती भी खड़ी कर दी है। सीमावर्ती इलाकों में सड़क, पुल, बिजली परियोजनाओं और व्यापारिक ढांचे को नुकसान पहुंचने से आर्थिक गतिविधियों पर असर पड़ने की आशंका है।नेपाल की अर्थव्यवस्था विदेशी सहायता, विदेशों में काम करने वाले नेपाली नागरिकों की ओर से भेजे जाने वाले पैसे और भारत-चीन के साथ व्यापार पर काफी निर्भर रहती है। ऐसे में इस स्तर की प्राकृतिक आपदा से पुनर्निर्माण पर भारी खर्च आने के साथ-साथ व्यापार और पर्यटन को भी झटका लग सकता है।फिलहाल सबसे बड़ी प्राथमिकता लापता लोगों की तलाश, प्रभावित नागरिकों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाना और नई बाढ़ की आशंका को रोकना है। अधिकारियों की नजर सीमा क्षेत्र में बनी जलराशियों और पहाड़ी इलाकों में होने वाली नई हलचल पर बनी हुई है।

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