लंबे समय तक बैठकर काम करने वालों के लिए डोलासन एक बेहद आसान और असरदार योगासन है। यह न सिर्फ पीठ और कमर के दर्द को कम करता है, बल्कि शरीर को तुरंत एक्टिव और फ्लेक्सिबल बनाने में मदद करता है।
Dolasana Yoga Benefits : आजकल की बिगड़ी लाइफस्टाइल और लगातार घंटों कुर्सी पर बैठकर काम करने की आदत ने कमर दर्द, कंधों में जकड़न और थकावट जैसी समस्याएं आम कर दी हैं।
जब शरीर लंबे समय तक एक ही पोजीशन में रहता है, तो रीढ़ की हड्डी और मांसपेशियों का लचीलापन धीरे-धीरे कम होने लगता है। ऐसे में डोलासन (Dolasana) आपके शरीर को दोबारा एक्टिव और ऊर्जावान बनाने में मदद कर सकता है।
हठयोग का यह आसन बेहद आसान है और इसे करने में ज्यादा समय भी नहीं लगता।
क्या है डोलासन?
‘डोलासन’ शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है— ‘डोल’ यानी झूलना और ‘आसन’ यानी मुद्रा। इस योगासन के दौरान शरीर का ऊपरी हिस्सा घड़ी के पेंडुलम (Pendulum) की तरह दाएं-बाएं झूलता है।
इसी वजह से इसे अंग्रेजी में ‘पेंडुलम पोज’ भी कहा जाता है। डेस्क जॉब करने वाले लोगों के लिए यह आसन किसी क्विक-रिलैक्स थेरेपी से कम नहीं है।
शरीर को मिलते हैं ये बड़े फायदे
कमर और रीढ़ को राहत: लगातार बैठने से पीठ के निचले हिस्से में जो खिंचाव और दर्द बनता है, यह आसन उसे कम करने में मदद करता है। रीढ़ की हड्डी की नसें एक्टिव होती हैं, जिससे पीठ में लचीलापन आता है।
कोर और जांघों की मजबूती: झूलने की गति से पेट (कोर) और जांघों के पीछे की मांसपेशियों (हैमस्ट्रिंग) पर काम होता है, जिससे वे टोन होती हैं।
मानसिक थकान और सिरदर्द से आराम: इस अभ्यास से शरीर में खून का बहाव बेहतर होता है, जिससे दिनभर की मानसिक थकान और तनाव में राहत मिलती है।
डोलासन करने का सही तरीका (Step-by-Step)
शुरुआती मुद्रा: सबसे पहले जमीन पर सीधे खड़े हो जाएं और दोनों पैरों के बीच थोड़ी दूरी बना लें।
हाथों की स्थिति: गहरी सांस लेते हुए दोनों हाथों की उंगलियों को आपस में फंसाएं (इन्टरलॉक करें) और सिर के पीछे रखें।
झूलने की क्रिया: अब सांस छोड़ते हुए अपने धड़ यानी कमर से ऊपर के हिस्से को पेंडुलम की तरह धीरे-धीरे दाएं से बाएं और फिर बाएं से दाएं झुलाएं।
समय: शुरुआत में इसे 1 से 2 मिनट तक करें। जैसे-जैसे अभ्यास बढ़ेगा, यह आपकी दिनचर्या का सहज हिस्सा बन जाएगा।
किन बातों का ध्यान रखना जरूरी है?
खानपान का संतुलन: योगासन के साथ-साथ सही और संतुलित खानपान भी जरूरी है, तभी शरीर को इसका पूरा फायदा मिलता है।
हाई ब्लड प्रेशर में बचें: अगर आपको हाई बीपी (उच्च रक्तचाप) की शिकायत है, तो इसे करने से पहले विशेषज्ञ की सलाह लें।
हर्निया और गंभीर दर्द: हर्निया के मरीज या जिन्हें पीठ में अत्यधिक गंभीर दर्द हो, वे डॉक्टर या योग ट्रेनर से पूछकर ही इसका अभ्यास करें।