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1984 में श्री अकाल तख्त साहिब के नीचे मनियारा, शहीद मार्केट और थड़ा साहिब में दुकानें गंवाने वाले 133 दुकानदारों की 42 साल पुरानी कानूनी लड़ाई खत्म हो गई है। हाईकोर्ट की डबल बेंच ने अमृतसर इम्प्रूवमेंट ट्रस्ट को इन दुकानदारों को 1 हजार रुपए प्रति गज की दर से दुकानों के लिए जगह देने के आदेश दिए हैं। 7 नवंबर से पहले आदेश की पालना करनी होगी। इतने लंबे समय से ट्रस्ट का पक्ष था कि 1 हजार रुपए प्रति गज की दर से जमीन नहीं दी जा सकती। फैसले के बाद दुकानदारों को दोबारा कारोबार शुरू होने की उम्मीद बंधी है।
1984 में ऑपरेशन ब्लू स्टार के दौरान इनकी दुकानें और उनमें रखा सामान उजड़ गया था। इसके बाद परिवारों की रोजी-रोटी भी बदल गई। कोई गांवों में फेरी लगाने लगा तो किसी ने घर-घर जाकर सामान बेचना शुरू किया। दुकानदारों का कहना है कि बाद में गलियारा योजना के दौरान हटाए गए करीब 1200 दुकानदारों को वैकल्पिक जगह मिल गई, लेकिन 1984 में दुकान और सामान गंवाने वाले 133 परिवारों को स्थायी दुकान नहीं मिल सकी।
ब्लू स्टार शॉपकीपर टेनेंट्स सफर्स एसोसिएशन के प्रधान परविंदर सिंह अरोड़ा के अनुसार, गलियारा योजना में करीब 1200 दुकानदारों को आईडीएच मार्केट, पिंक प्लाजा, गोल्डन टेंपल क्लॉथ मार्केट, सिटी सेंटर और गुरु नानक मार्केट समेत अलग-अलग जगह दुकानें दी गईं। जमीन का रेट 4 हजार रुपए प्रति गज रखा गया था। 3 हजार रुपए की सब्सिडी के बाद दुकानदारों से 1 हजार रुपए प्रति गज लिया गया।
इसी आधार पर 1984 में उजड़े दुकानदारों ने भी समान दर पर जगह देने की मांग की। वर्ष 2000 में उन्होंने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। लंबी कानूनी लड़ाई के बाद वर्ष 2012 में इम्प्रूवमेंट ट्रस्ट ने मॉल मंडी में जगह देने की प्रक्रिया शुरू की। दुकानदारों के अनुसार, यहां 38,400 रुपए प्रति गज का रेट बताया गया। 1984 में दुकान और सामान दोनों गंवा चुके दुकानदारों ने इतनी रकम देने में असमर्थता जताई। इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा।
दुकानदारों के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट की कार्रवाई के दौरान 22.68 गज जगह के लिए 10 हजार रुपए प्रति गज के हिसाब से 2 लाख 26 हजार 800 रुपए जमा कराने की बात आई। 133 में से 42 दुकानदारों ने 2015 में यह रकम जमा भी कराई। इसके बाद इम्प्रूवमेंट ट्रस्ट ने मॉल मंडी-जैन मंदिर के पास खोखे अलॉट किए। दुकानदारों के अनुसार 122 को जगह मिली, जबकि 11 को बाद में वैकल्पिक जगह देने की बात कही गई। इसके बाद रेट तय करने के अधिकार को लेकर विवाद फिर हाईकोर्ट पहुंचा। ट्रस्ट की ओर से पक्ष रखा गया कि रेट तय करने का फैसला हाईकोर्ट ने नहीं किया था, इसलिए सुप्रीम कोर्ट इस पर फैसला नहीं कर सकती।
इम्प्रूवमेंट ट्रस्ट के ईओ राजेश कुमार ने कहा कि 1984 में उजड़े 133 दुकानदारों वाली फाइल चल रही है। हाईकोर्ट के फैसले के बारे में पूछने पर भी उन्होंने कहा कि इसी संबंध में कार्रवाई चल रही है। इम्प्रूवमेंट ट्रस्ट के चेयरमैन करमजीत सिंह रिंटू ने कहा कि हाईकोर्ट ने मामले में जो फैसला दिया है, उसी के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।