पेरिस में बना फ्रांस का पहला पारंपरिक हिंदू मंदिर, 1970 के संकल्प से 2026 तक ऐसे पूरा हुआ सफर

Published on 8 सित॰ 2026

Updated: Tuesday, September 8, 2026, 16:41 [IST]

BAPS Paris First Hindu Mandir: फ्रांस की राजधानी पेरिस में रविवार को पारंपरिक हिंदू मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा पूरी हो गई। इसके साथ ही मंदिर को श्रद्धालुओं और दर्शनार्थियों के लिए खोल दिया गया। इस खास मौके पर भारत समेत दुनिया के कई देशों से संत, श्रद्धालु और मेहमान पहुंचे। मंदिर का निर्माण भारतीय वास्तुकला और वैदिक शिल्प परंपरा को ध्यान में रखकर किया गया है, जिसमें फ्रांस की आधुनिक तकनीक का भी इस्तेमाल हुआ है। पेरिस में बने इस मंदिर को भारतीय संस्कृति, धर्म और कला को दुनिया तक पहुंचाने की दिशा में एक खास कदम माना जा रहा है। 13 दिनों तक चले मंदिर महोत्सव में 40 से ज्यादा देशों से लोग शामिल हुए। मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के दौरान अलग-अलग देवी-देवताओं की मूर्तियों की विधि-विधान से स्थापना की गई और विश्व शांति, आपसी प्रेम तथा सभी के कल्याण के लिए प्रार्थना की गई।

Paris Hindu Temple
फोटो क्रेडिट: इंस्टाग्राम@bapsparis

वैदिक मंत्रों के बीच हुई प्राण प्रतिष्ठा

सुबह वरिष्ठ संतों ने वैदिक मंत्रों के साथ महापूजा की शुरुआत की। इसके बाद BAPS अक्षरधाम संस्था के वर्तमान गुरु परम पूज्य महंतस्वामी महाराज के हाथों प्राण प्रतिष्ठा की विधि पूरी हुई। मंदिर में श्री अक्षरपुरुषोत्तम महाराज, श्री घनश्याम महाराज, श्री राधा-कृष्ण, श्री सीता-राम के साथ श्री लक्ष्मण और श्री हनुमान, श्री पार्वती-शंकर के साथ श्री कार्तिकेय और श्री गणेश, श्री पद्मावती वेंकटेश्वर, श्री अय्यप्पा स्वामी और श्री नीलकंठवर्णी महाराज की मूर्तियों की भी विधि-विधान से प्रतिष्ठा की गई। इसके साथ गुरु परंपरा की मूर्तियों की भी स्थापना हुई। प्राण प्रतिष्ठा पूरी होने के बाद महंतस्वामी महाराज ने मंदिर में पहली प्रार्थना की। इसमें दुनिया में शांति बनी रहे, सभी धर्मों के बीच प्रेम और भाईचारा बढ़े और सभी लोगों का कल्याण हो, ऐसी कामना की गई।

14 रथों के साथ निकली भव्य नगर यात्रा

प्राण प्रतिष्ठा से पहले पेरिस में एक भव्य नगर यात्रा भी निकाली गई। इसमें 14 सजे हुए रथ शामिल थे, जिन पर हिंदू देवी-देवताओं की मूर्तियां रखी गई थीं। पारंपरिक कपड़ों में तैयार कलाकारों ने नृत्य और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं। यह यात्रा एफिल टावर और एकोल मिलिटेर से होते हुए प्लास द ला कॉनकॉर्ड तक पहुंची। रास्तेभर भारतीय संगीत, कला और धार्मिक प्रस्तुतियों ने लोगों का ध्यान खींचा। इस आयोजन के जरिए फ्रांस की धरती पर भारतीय संस्कृति और हिंदू परंपराओं की झलक देखने को मिली।

1970 में देखा गया सपना 2026 में हुआ पूरा

पेरिस में एक बड़े हिंदू मंदिर के निर्माण का संकल्प गुरु योगीजी महाराज ने 1970 में लिया था। इसके बाद प्रमुख स्वामी महाराज ने अपनी विदेश यात्राओं के दौरान फ्रांस में सत्संग को आगे बढ़ाया और अपने गुरु के इस संकल्प को आगे ले जाने का काम किया। मंदिर के निर्माण की दिशा में साल 2021 में भूमि पूजन हुआ। इसके बाद 2022 में शिलान्यास की विधि पूरी की गई। कई वर्षों की मेहनत के बाद 2026 में मंदिर का निर्माण पूरा हुआ और अब इसे श्रद्धालुओं के लिए खोल दिया गया है।

5000 वर्गमीटर में फैला है मंदिर परिसर

यह पूरा मंदिर परिसर करीब 5000 वर्गमीटर में बना है। ऊपर के हिस्से में पारंपरिक हिंदू मंदिर है, जबकि नीचे सांस्कृतिक केंद्र के रूप में एक सुंदर हवेली बनाई गई है। मंदिर के निर्माण में भारत, इटली, ग्रीस और वियतनाम से मंगाए गए संगमरमर के साथ ग्वालियर के बलुआ पत्थर का इस्तेमाल किया गया है। मंदिर में 5 शिखर, 10 बड़े गुंबद, 20 नक्काशीदार स्तंभ, 120 गवाक्ष, 49 चरित्र शिल्प प्रतिमाएं और 4 सुसज्जित छतरियां बनाई गई हैं।
परिसर में सिर्फ पूजा की व्यवस्था ही नहीं है। यहां सभागृह, कक्षाएं, खेलकक्ष, प्रदर्शनी स्थल और कार्यालय जैसी सुविधाएं भी मौजूद हैं।

मंदिर में दिखेगी भारतीय कला और फ्रांसीसी तकनीक

मंदिर को तैयार करते समय प्राचीन भारतीय वास्तुकला और वैदिक शिल्पशास्त्र का ध्यान रखा गया है। इसके साथ फ्रांस की आधुनिक तकनीक और निर्माण क्षमता का भी इस्तेमाल हुआ है। मंदिर की खासियत यह भी है कि इसके निर्माण में भारत के कारीगरों और अलग-अलग देशों से आए पत्थरों का इस्तेमाल किया गया। इसी वजह से इसे भारतीय परंपरा और फ्रांसीसी आधुनिक तकनीक के मेल का उदाहरण बताया जा रहा है।

पीएम मोदी ने वीडियो संदेश से दी शुभकामनाएं

इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वीडियो संदेश के जरिए अपनी शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि स्वामी प्रभुपाद ने भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत को दुनिया तक पहुंचाने का अभियान शुरू किया था और आज उसका प्रभाव यूरोप सहित पूरी दुनिया में दिखाई दे रहा है। पीएम मोदी ने BAPS स्वामीनारायण संस्था और सभी हरि भक्तों को इस अवसर पर बधाई दी। उन्होंने कहा कि BAPS के मंदिर भारत के प्राचीन विचारों और मानवीय मूल्यों को लोगों तक पहुंचाने का काम कर रहे हैं। उन्होंने 2024 में अबू धाबी में बने भव्य हिंदू मंदिर का भी जिक्र किया और कहा कि ऐसे मंदिर संतों की संकल्प शक्ति का उदाहरण हैं।

'मेड इन इंडिया, बिल्ट इन फ्रांस' का दिया संदेश

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि कई दशक पहले स्वामी प्रभुपाद के फ्रांस आने से भारत और फ्रांस के बीच आध्यात्मिक जुड़ाव का एक नया दौर शुरू हुआ था। आज योग भी दोनों देशों के लोगों को जोड़ने का एक बड़ा माध्यम बन चुका है। उन्होंने पेरिस के इस मंदिर को 'मेड इन इंडिया, बिल्ट इन फ्रांस' का उदाहरण बताया। पीएम मोदी के अनुसार, मंदिर में इस्तेमाल किए गए पत्थरों को भारत में तराशा गया और भारतीय कारीगरों की कला को फ्रांस की आधुनिक इंजीनियरिंग के साथ जोड़ा गया। उन्होंने कहा कि यह मंदिर आने वाले लंबे समय तक भारत और फ्रांस के बीच सहयोग, संस्कृति और आपसी संबंधों का प्रतीक बना रहेगा। साथ ही यह सेवा और समाज कल्याण से जुड़े कामों का केंद्र भी बन सकता है।