Uttarakhand Government: सेना में चार साल की सेवा पूरी करने के बाद अग्निवीरों की दूसरी पारी को लेकर उत्तराखंड सरकार ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं. राज्य सरकार ने केंद्र को अग्निवीरों के लिए आरक्षित 181 रिक्त पदों का विभागवार ब्योरा भेज दिया है. इनमें सबसे ज्यादा 130 पद पुलिस विभाग के हैं. इसके अलावा वन, परिवहन, आबकारी और सचिवालय सेवा से जुड़े पद भी इसमें शामिल हैं. सरकार का यह कदम उन अग्निवीरों के लिए रोजगार के अवसर तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जो सैन्य सेवा पूरी करने के बाद राज्य की सरकारी सेवाओं में आना चाहते हैं.
उत्तराखंड में पूर्व अग्निवीरों के लिए सरकारी सेवाओं में 10 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण की व्यवस्था की गई है. इसके दायरे में पुलिस आरक्षी, उपनिरीक्षक, प्लाटून कमांडर, अग्निशामक, बंदी रक्षक, वन आरक्षी, वन दरोगा, आबकारी सिपाही, प्रवर्तन सिपाही और सचिवालय रक्षक जैसे पद शामिल हैं. सरकार ने वर्दीधारी सेवाओं में अग्निवीरों के लिए आरक्षण से जुड़े नियम भी लागू किए हैं. अब इसी व्यवस्था के तहत विभागों में उपलब्ध रिक्तियों का आंकड़ा जुटाकर केंद्र सरकार को भेजा गया है. गृह सचिव शैलेश बगौली ने भी रिक्त पदों का ब्योरा केंद्र को भेजे जाने की पुष्टि की है.
अग्निवीरों के लिए अलग रोजगार सेल भी बनेगा
सरकार ने सिर्फ आरक्षण और रिक्तियों तक ही अपनी तैयारी सीमित नहीं रखी है. अगस्त 2026 में उत्तराखंड कैबिनेट ने अग्निवीर रोजगार सेल बनाने को मंजूरी दी थी. इसके जरिए सेना की सेवा पूरी करने वाले युवाओं को रोजगार, उच्च शिक्षा और स्वरोजगार से जोड़ने की व्यवस्था की जाएगी. उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, उत्तराखंड ऐसा रोजगार सेल बनाने वाला पहला राज्य है. यह सेल मुख्यमंत्री कार्यालय के अधीन काम करेगा.
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सरकार की योजना है कि सैन्य सेवा के दौरान हासिल प्रशिक्षण और कौशल का इस्तेमाल अग्निवीरों को आगे के करियर में भी मिले. खास तौर पर अनुशासन, तकनीकी दक्षता और आपदा प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में उनके अनुभव को सरकारी और अन्य रोजगार के अवसरों से जोड़े जाने पर जोर दिया जा रहा है.
भर्ती प्रक्रिया में भी मिल सकती है राहत
अग्निवीरों को सरकारी सेवाओं में अवसर देने के लिए भर्ती नियमों में भी कुछ राहत की तैयारी चल रही है. सितंबर 2026 में सामने आई जानकारी के मुताबिक, केंद्र के गृह मंत्रालय की सिफारिश के बाद राज्य सरकार अग्निवीरों को कुछ भर्तियों में लिखित और शारीरिक दक्षता परीक्षा से छूट देने के लिए नियमों में बदलाव पर विचार कर रही है.
पहली खेप की वापसी से पहले तैयारी तेज
अग्निपथ योजना के तहत चार साल की सेवा पूरी करने वाले अग्निवीरों की पहली खेप अब सेवा समाप्त कर वापस लौटने लगी है. उत्तराखंड में भी इसे देखते हुए सरकारी सेवाओं में उनके लिए अवसर तैयार करने की प्रक्रिया तेज की गई है. मई 2026 की एक रिपोर्ट के मुताबिक, प्रदेश के 4,500 से अधिक युवा उस समय अग्निवीर के रूप में सेना में सेवाएं दे रहे थे.
सितंबर 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, नौसेना और वायुसेना के अग्निवीरों की पहली खेप नवंबर-दिसंबर 2026 से वापस आनी शुरू होगी, जबकि सेना से पहली बड़ी खेप जनवरी 2027 में लौटेगी. ऐसे में 181 आरक्षित पदों का ब्योरा भेजना और रोजगार सेल की स्थापना राज्य सरकार की तैयारियों का हिस्सा है.
सरकारी नौकरी के साथ रोजगार के दूसरे विकल्प भी
उत्तराखंड सरकार का फोकस केवल सरकारी नौकरी तक सीमित नहीं है. रोजगार सेल के जरिए पूर्व अग्निवीरों को उच्च शिक्षा और स्वरोजगार से जोड़ने की योजना भी बनाई गई है. इससे सेना में मिले प्रशिक्षण और अनुभव को आगे के करियर में इस्तेमाल करने के विकल्प बढ़ेंगे.
इस तरह अग्निवीरों की सेवा अवधि पूरी होने के बाद उनके सामने सरकारी सेवाओं में आरक्षण, विभिन्न विभागों में उपलब्ध पद, भर्ती नियमों में प्रस्तावित राहत और रोजगार-शिक्षा से जुड़े विकल्प मौजूद रहेंगे. 181 पदों की जानकारी केंद्र को भेजे जाने के बाद अब अगला चरण संबंधित भर्ती प्रक्रिया और पात्र अभ्यर्थियों को इन अवसरों से जोड़ने का होगा.
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