18 साल पुराने मनरेगा घोटाले में एक्शन : पूर्व जिला पंचायत CEO समेत 8 अधिकारियों के खिलाफ 6,000 पन्नों का चालान पेश - Haribhoomi

Published on 27 जुल॰ 2026

18 साल पुराने मनरेगा घोटाले में EOW ने ₹1.69 करोड़ की अनियमितता मामले में पूर्व जिला पंचायत CEO समेत 8 अधिकारियों के खिलाफ 6,000 पन्नों का चालान पेश किया है।

A 6,000-page challan has been filed against eight officials, including the former District Panchayat

पूर्व जिला पंचायत CEO समेत 8 अधिकारियों के खिलाफ 6,000 पन्नों का चालान पेश

  • Published: 27 Jul 2026, 07:12 PM IST
  • Last Updated: 27 Jul 2026, 07:12 PM IST

रायपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित 18 वर्ष पुराने राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) में वित्तीय अनियमितता के मामले में राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) ने बड़ी कार्रवाई की है। ब्यूरो ने तत्कालीन जिला पंचायत कांकेर के बर्खास्त मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) के.पी. देवांगन समेत आठ अधिकारियों के खिलाफ 6,000 पृष्ठों का चालान विशेष न्यायालय में पेश किया है। आरोप है कि वर्ष 2006-07 और 2007-08 के दौरान नियमों की अनदेखी कर सामग्री खरीदी में ₹1.69 करोड़ से अधिक की आर्थिक अनियमितता की गई, जिससे शासन को भारी नुकसान पहुंचा।

EOW के अनुसार, यह चालान 27 जुलाई 2026 को विशेष न्यायाधीश (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम), कांकेर की अदालत में प्रस्तुत किया गया। मामला अपराध क्रमांक 31/2008 के तहत भारतीय दंड संहिता की धारा 120-बी, 409, 420 तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की विभिन्न धाराओं में दर्ज है।

नियमों को दरकिनार कर हुई केंद्रीकृत खरीदी
जांच में सामने आया कि मनरेगा के तहत फ्लेक्सी बोर्ड, मस्टर रोल सत्यापन पत्रक, रोजगार गारंटी योजना मार्गदर्शिका, रोजगार उपलब्धता पंजी, फ्लेक्सी कोबरा फाइल कवर, मस्टर रोल पत्रक और श्रमिक जानकारी पत्रक सहित कई सामग्रियों की खरीदी निर्धारित प्रक्रिया के विपरीत की गई। विवेचना में पाया गया कि तत्कालीन जिला पंचायत CEO के.पी. देवांगन ने जिला स्तर पर केंद्रीकृत खरीदी कराई, जबकि शासन के नियमों के अनुसार सामग्री खरीदने का अधिकार संबंधित जनपद पंचायतों और ग्राम पंचायतों को दिया गया था। इसके अलावा निविदा प्रक्रिया, भंडार क्रय नियम और पंचायत सामग्री क्रय नियमों का भी पालन नहीं किया गया।

सात जनपद पंचायतों में भी मिली अनियमितताएं
जांच में जिला पंचायत कांकेर के साथ-साथ कांकेर, नरहरपुर, चारामा, अंतागढ़, कोयलीबेड़ा, भानुप्रतापपुर और दुर्गकोंदल जनपद पंचायतों में भी अनियमितताएं सामने आईं। आरोप है कि सभी अधिकारियों ने आपसी सांठगांठ और षड्यंत्र के तहत शासकीय धन का दुरुपयोग किया।

अनियमित व्यय का विवरण इस प्रकार है-
जिला पंचायत कांकेर – ₹39,90,252
जनपद पंचायत कोयलीबेड़ा – ₹51,98,192
जनपद पंचायत चारामा – ₹22,92,277
जनपद पंचायत नरहरपुर – ₹20,62,847
जनपद पंचायत अंतागढ़ – ₹19,91,631
जनपद पंचायत कांकेर – ₹7,55,156
जनपद पंचायत भानुप्रतापपुर – ₹4,51,592
जनपद पंचायत दुर्गकोंदल – ₹1,72,300

इन सभी को मिलाकर ₹1,69,14,247 की शासकीय राशि के अनियमित व्यय, अपव्यय और अमानत में खयानत के साक्ष्य मिले हैं।

इन अधिकारियों के खिलाफ पेश हुआ चालान
EOW ने जिन अधिकारियों को आरोपी बनाया है, उनमें तत्कालीन जिला पंचायत CEO के.पी. देवांगन के अलावा तत्कालीन जनपद पंचायत CEO राधाकांत कर, गोवर्धन गजबल्ला, परदेशी राम मरकाम, भारत राम नेताम, रामकिशुन ध्रुव, जी.आर. ठाकुर और संवालदास बघेल शामिल हैं।

के.पी. देवांगन पर पहले से भी दर्ज हैं भ्रष्टाचार के मामले
जांच एजेंसी के अनुसार मुख्य आरोपी के.पी. देवांगन के खिलाफ यह पहला मामला नहीं है। उनके विरुद्ध पहले से भ्रष्टाचार और शासकीय पद के दुरुपयोग से जुड़े दो अन्य मामले भी दर्ज हैं। एक मामले में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर भर्ती प्रक्रिया में अपात्र अभ्यर्थियों को लाभ पहुंचाने का आरोप है, जबकि दूसरे मामले में ₹8.44 करोड़ से अधिक के लोकधन के कथित दुरुपयोग का आरोप लगाया गया है। दोनों मामलों में भी न्यायालय में अंतिम प्रतिवेदन और चालान प्रस्तुत किए जा चुके हैं।

चालान पेश होने के बाद शुरू होगी सुनवाई 
18 साल पुराने इस मामले में 6,000 पन्नों का चालान पेश होने के बाद अब विशेष न्यायालय में सुनवाई होगी। यह कार्रवाई मनरेगा में कथित वित्तीय अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के खिलाफ EOW की सबसे महत्वपूर्ण कार्रवाइयों में से एक मानी जा रही है।

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