झुंझुनूं की निकाय राजनीति में इस बार सिर्फ पार्षद नहीं बदले हैं, वोटर का मिजाज भी बदलता दिखाई दिया है। दशकों से शहरों की चुनावी राजनीति जाति, बिरादरी, परिवार, मोहल्ले की बैठकों और चौपालों के इर्द-गिर्द घूमती रही है, लेकिन निकाय चुनाव-2026 में पहली बा
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युवतियों ने युवकों को पीछे छोड़ा
18 से 25 वर्ष की उम्र में युवतियों का मतदान 81.16% और युवकों का 74.10% रहा। दोनों के बीच 7.06 प्रतिशत अंक का अंतर रहा। यानी जिस आयु वर्ग को अक्सर राजनीति से दूर समझा जाता है, उसी में युवतियों ने युवकों को मतदान में पीछे छोड़ दिया।
यह आंकड़ा सिर्फ वोटिंग प्रतिशत नहीं है। यह संकेत देता है कि शहरी निकाय चुनावों में नई पीढ़ी अब महज दर्शक नहीं रही। युवा उम्मीदवारों, स्थानीय मुद्दों और शहर की सुविधाओं को लेकर अपनी राय बना रहे हैं और मतदान के जरिए उसे जाहिर भी कर रहे हैं।

सड़क, सुरक्षा से लेकर कॉलेज और इंटरनेट तक मुद्दे
युवा महिलाओं के लिए शहर की सुविधाओं से जुड़े कई मुद्दे सीधे रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़े हैं। इनमें स्ट्रीट लाइट, सड़क, सार्वजनिक परिवहन, सुरक्षा, सफाई, कॉलेज तक पहुंच, लाइब्रेरी, इंटरनेट और सार्वजनिक स्थानों का माहौल शामिल हैं।
इसलिए युवतियों का इतना ज्यादा मतदान केवल चुनावी उत्साह नहीं माना जा सकता। यह स्थानीय शासन में अपनी हिस्सेदारी को लेकर बढ़ती जागरूकता का भी संकेत है।
टॉप-5 निकायों में खेतड़ी सबसे आगे
18 से 25 वर्ष के युवा मतदाताओं के मतदान प्रतिशत में जिले की तस्वीर भी दिलचस्प रही। खेतड़ी में सबसे ज्यादा 83.96% युवा मतदाताओं ने वोट डाला। इसके बाद उदयपुरवाटी में 82.15%, चिड़ावा में 80.18%, मलसीसर में 80.00% और बुहाना में 79.87% मतदान रहा।

मलसीसर में सबसे बड़ा अंतर
युवक-युवतियों के मतदान में सबसे बड़ा अंतर मलसीसर में रहा। यहां युवतियों ने युवकों से 16.16 प्रतिशत अंक ज्यादा मतदान किया। चिड़ावा में यह अंतर 10.31 प्रतिशत अंक और बुहाना में 9.99 प्रतिशत अंक रहा। उदयपुरवाटी में भी युवतियों ने युवकों से 0.47 प्रतिशत अंक ज्यादा मतदान किया।
वहीं खेतड़ी में तस्वीर अलग रही। यहां युवक 84.12% मतदान के साथ युवतियों के 83.76% से मामूली रूप से आगे रहे।
यानी जिले के सभी निकायों में युवा मतदान का व्यवहार एक जैसा नहीं रहा। स्थानीय सामाजिक संरचना, शिक्षा, रोजगार, परिवार की भूमिका और बाहर रहने वाले युवाओं की संख्या जैसे कारक भी इसका असर डाल सकते हैं।
खेतड़ी में युवक-युवतियों का मतदान लगभग बराबर
टॉप-5 में सबसे ज्यादा युवा मतदान खेतड़ी में 83.96% रहा। यहां खास बात कुल मतदान प्रतिशत के साथ युवक-युवतियों के बीच बेहद कम अंतर रहा।
खेतड़ी में युवकों का मतदान 84.12% और युवतियों का 83.76% रहा। दोनों के बीच अंतर महज 0.36 प्रतिशत अंक है।
इससे संकेत मिलता है कि कुछ निकायों में युवा पुरुषों की भागीदारी भी बेहद मजबूत रही। यानी युवा वोटर का उभार सिर्फ युवतियों की कहानी नहीं है, बल्कि पूरी 18 से 25 वर्ष की आयु श्रेणी चुनाव में सक्रिय हुई है।

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विद्याविहार और पिलानी में युवा मतदान कम
जहां खेतड़ी और उदयपुरवाटी में युवा मतदान 82% से ऊपर पहुंचा, वहीं कुछ निकायों में यह उत्साह अपेक्षाकृत कम रहा। विद्याविहार में 65.92% और पिलानी में 72.02% युवा मतदाताओं ने वोट डाला।
खासकर विद्याविहार का आंकड़ा जिले के युवा मतदान औसत 77.21% से काफी नीचे है।
युवकों के कम मतदान की एक वजह बाहर रहना
18 से 25 वर्ष की उम्र के युवकों के अपेक्षाकृत कम मतदान के पीछे एक बड़ा कारण उनका जिले से बाहर रहना माना जा सकता है। इस उम्र के कई युवक डिफेंस की तैयारी, इंजीनियरिंग और मेडिकल जैसी पढ़ाई, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी या निजी नौकरी के लिए दूसरे शहरों में रहते हैं।
कोटा, जयपुर, सीकर और दिल्ली जैसे शहरों में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवा भी बड़ी संख्या में रहते हैं। ऐसे में वोटर लिस्ट में नाम होने के बावजूद मतदान के दिन अपने गृह निकाय में मौजूद नहीं रहना उनके मतदान प्रतिशत को प्रभावित कर सकता है।
इसके उलट युवतियों की बड़ी संख्या अभी भी परिवार के साथ अपने गृह शहर में रहती है। इससे मतदान के दिन उनकी उपस्थिति अपेक्षाकृत अधिक हो सकती है।