भारी और असमान बारिश से खरीफ फसलों की बुवाई में देरी, पिछले साल के मुकाबले 16% की गिरावट, धान पिछले साल से 8% कम

Published on 14 जुल॰ 2026

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ज्यादा बारिश का असर, खरीफ की बुआई में 16% की कमी

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Monsoon: देश के कई हिस्सों में इस महीने हुई भारी और असमान मानसूनी बारिश के कारण मुख्य खरीफ फसलों धान, दालें, तिलहन और कपास की बुवाई में काफी देरी देखने को मिल रही है। केंद्रीय कृषि मंत्रालय द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, इस सीजन में अब तक कुल बुवाई का क्षेत्रफल 53.12 मिलियन हेक्टेयर दर्ज किया गया है, जो पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले 16% कम है। मंत्रालय के मुताबिक 10 जुलाई तक हुई कुल बुवाई खरीफ (kharif crop sowing) सीजन के सामान्य 110 मिलियन हेक्टेयर क्षेत्र का करीब 48% ही है। जबकि पिछले साल इसी समय तक औसत मानसूनी बारिश के चलते 57% से अधिक सामान्य क्षेत्र में बुवाई पूरी हो चुकी थी। हालांकि, राहत की बात यह है कि पिछले हफ्ते बुवाई में गिरावट का यह आंकड़ा 21% पर था, जिसमें अब थोड़ा सुधार हुआ है।

धान की बुवाई में 8.6% की गिरावट, पूर्वी भारत में कम बारिश का असर

खरीफ सीजन की सबसे मुख्य फसल धान (चावल) की बुवाई अब तक 11.46 मिलियन हेक्टेयर क्षेत्र में की गई है, जो पिछले साल के मुकाबले 8.6 प्रतिशत कम है। धान की बुवाई में आई इस कमी का मुख्य कारण पूर्वी भारत, विशेषकर बिहार और झारखंड में मानसून की शुरुआती कमी को माना जा रहा है। आमतौर पर देश में धान की बुवाई का औसत क्षेत्रफल 41.2 मिलियन हेक्टेयर रहता है। हालांकि, कृषि एक्सपर्ट्स का कहना है कि स्थिति में सुधार हो रहा है, क्योंकि एक सप्ताह पहले धान का रकबा 2025 के स्तर से 13% नीचे चल रहा था, जो अब घटकर 8.6% पर आ गया है।

दालों और तिलहन के रकबे में भारी कमी, महाराष्ट्र-कर्नाटक में देरी

जून के अंत तक मध्य भारत में हुई कम बारिश के कारण दालों के रकबे को बड़ा झटका लगा है। दलहन फसलों की बुवाई इस बार 5.66 मिलियन हेक्टेयर में हुई है, जो पिछले साल की तुलना में 23% की भारी गिरावट दर्शाती है। खरीफ की मुख्य दाल 'तुअर' (अरहर) की बुवाई अब तक 1.95 मिलियन हेक्टेयर में हुई है, जो पिछले साल से 30% से भी अधिक कम है। इसका मुख्य कारण महाराष्ट्र और कर्नाटक में इस सीजन में मानसून का देर से पहुंचना है।

इसके साथ ही, सोयाबीन और मूंगफली जैसी तिलहन फसलों की बुवाई भी पिछले साल से 21% पीछे चल रही है, जिसका सबसे ज्यादा असर गुजरात और मध्य प्रदेश में देखा जा रहा है। हालांकि, 1 से 10 जुलाई के बीच मध्य भारत के प्रमुख कृषि क्षेत्रों में मानसून के 'सक्रिय' होने से जून के अंत तक बना 50% से अधिक का बारिश घाटा घटकर अब केवल 8% रह गया है। इससे आने वाले हफ्तों में दालों और तिलहन की बुवाई में तेजी आने की उम्मीद है।

कपास और गन्ने की स्थिति: मौसम विभाग का आगे का अनुमान

अन्य नकदी फसलों की बात करें तो कपास का रकबा भी पिछले साल के मुकाबले 15 प्रतिशत घटकर 7.95 मिलियन हेक्टेयर रह गया है। इस पूरे खरीफ सीजन में केवल गन्ने की फसल ही ऐसी रही है, जिसके रकबे में बढ़ोतरी देखी गई है। चूंकि गन्ने की बुवाई काफी पहले शुरू हो जाती है, इसलिए इस पर शुरुआती मानसूनी उतार-चढ़ाव का कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ा।

दूसरी ओर, भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, 1 जून से 13 जुलाई के बीच देश में कुल 222.4 मिमी बारिश दर्ज की गई है, जो सामान्य से 19.4% कम है और यह अभी भी कमी की श्रेणी में आता है। मौसम विभाग ने अनुमान जताया है कि अगले 6-7 दिनों के दौरान उत्तर-पश्चिम भारत के मैदानी इलाकों, पश्चिमी, मध्य और दक्षिणी प्रायद्वीपीय भारत में मानसूनी गतिविधियां थोड़ी 'धीमी' पड़ सकती हैं। हालांकि, कृषि अधिकारियों का भरोसा है कि देश के अधिकांश हिस्सों में पर्याप्त नमी होने के कारण अगले दो हफ्तों में बुवाई के आंकड़ों में भारी उछाल आएगा।

Ramanuj Singh

रामानुज सिंह author

रामानुज सिंह पत्रकारिता में दो दशकों का व्यापक और समृद्ध अनुभव रखते हैं। उन्होंने टीवी और डिजिटल—दोनों ही प्लेटफॉर्म्स पर काम करते हुए बिजनेस, पर्सनल ... और देखें

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