
जज दिनेश गुप्ता रिटायरImage Credit source: TV9
राजस्थान की न्यायिक व्यवस्था में अपने फैसलों और कामकाज को लेकर चर्चाओं में रहे जज दिनेश गुप्ता बुधवार को रिटायर हो गए. रिटायरमेंट से करीब डेढ़ महीने पहले 13 अगस्त को उनकी कोर्ट का स्टेनोग्राफर बकाया भुगतान नहीं होने पर काम छोड़कर चला गया था. बताया जा रहा है कि राज्य सरकार ने कोर्ट में दूसरा स्टेनोग्राफर नहीं लगाया. इसके कारण रिटायरमेंट के एक दिन पहले तक जज ने 159 फैसले अपने हाथ से लिखे.
इस समस्या को लेकर जज सुप्रीम कोर्ट तक भी गए थे. लेकिन कोर्ट ने उनके रिटायरमेंट के 4 दिन पहले मामले की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट के समक्ष बात रखने को कही थी. दरअसल, कॉर्मिशियल कोर्ट में जज रहते हुए दिनेश गुप्ता ने एक बिजनेस ग्रुप के खिलाफ फैसला दिया था. इसके बाद उनका जयपुर से ब्यावर ट्रांसफर कर दिया गया था, लेकिन कुछ दिनों बाद ही उनका ब्यावर से जालोर ट्रांसफर कर दिया गया. हाईकोर्ट के इस प्रशासनिक आदेश के खिलाफ दिनेश गुप्ता ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करके कहा- रिटायरमेंट के 10 महीने पहले बार-बार ट्रांसफर करके उन्हें परेशान किया जा रहा है.
प्रतिभाशाली जज के चलते दी गई पोस्टिंग
इस पर सीजेआई जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाला बागची और जस्टिस विपुल एम.पंचोली की बेंच ने कहा था कि इस बात में कोई संदेह नहीं है कि गुप्ता एक प्रतिभाशाली जज हैं. इसी वजह से उन्हें जेडीए में निदेशक विधि व विधिक सेवा प्राधिकरण में पोस्टिंग दी गई थी.
SC के हस्तक्षेप पर लेबर कोर्ट में ट्रांसफर
सुप्रीम कोर्ट ने गुप्ता की गंभीर सेहत के कारण जयपुर में निरंतर इलाज चलने, रिटायरमेंट में मात्र 10 महीने बचने और टीचर वाइफ के रिटायरमेंट में भी कम समय होने का हवाला देते हुए हाईकोर्ट को दो हफ्ते में सहानुभूतिपूर्वक विचार करने के लिए कहा था. इसके बाद उनका जयपुर की लेबर कोर्ट में ट्रांसफर कर दिया गया था.
5 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट सुनवाई
जज दिनेश गुप्ता ने अन्य राज्यों की तरह राजस्थान में भी जिला न्यायिक अधिकारियों की रिटायरमेंट उम्र 60 से 62 साल करने के लिए सुप्रीम कोर्ट में प्रार्थना पत्र दायर कर रखा है. इस मामले में 5 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट सुनवाई करेगा.

ध्वज आर्य
राजस्थान में 2008 से पत्रकारिता के सफर की शुरुआत. 18 वर्षों के पत्रकारिता करियर में राजनीति, सामाजिक मुद्दे, विकास, अपराध और ग्राउंड रिपोर्टिंग पर काम. खबर की तह तक जाने, तथ्यों की पुष्टि करने और जटिल विषयों को सरल भाषा में जनता तक पहुंचाने में विशेषज्ञता. प्रिंट से डिजिटल मीडिया तक के बदलाव को करीब से देखा. प्रिंट ,डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के प्लेटफार्म पर काम का अनुभव. पत्रकारिता की शुरुआत के 10 साल क्राइम रिपोर्टिंग की. पूर्व में समाचार प्लस, इंडिया न्यूज, दैनिक भास्कर और अब नेशनल चैनल TV9 भारतवर्ष में राजस्थान ब्यूरो चीफ की जिम्मेदारी. इस सफर के दौरान ब्रेकिंग न्यूज से लेकर इन्वेस्टिगेशन स्टोरी के साथ कई बड़े खुलासे, कई बड़े चुनाव, आपदा, बड़े आंदोलनों की ग्राउंड ज़ीरो से कवरेज समेत भारत पाकिस्तान युद्ध (ऑपरेशन सिंदूर) को कवर किया. क्राइम की खबरों, बड़े राजनीतिक घटनाक्रम और युद्ध कवरेज में सबसे ज्यादा रूचि. मेरा मानना है कि खबर सिर्फ एक घटना नहीं है, उसके पीछे का सच भी है. पत्रकारिता का काम सत्ता पक्ष से सवाल पूछना और जनता की आवाज़ बनना है. निष्पक्षता, गति और सटीकता मेरी रिपोर्टिंग के तीन स्तंभ हैं.
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