1500 सिक्के 5 लोगों में बांटे गए थे: विद्याधर का रास्ता में खुदाई में निकली थी चांदी - Jaipur News

Published on 18 अग॰ 2026

हवेली की खुदाई में चांदी की सिल्लियों पर लंदन के सेंट्रल बैंक की साल 1860 की मुहर लगी... सवाल-70 किलो चांदी किसकी?

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त्रिपोलिया बाजार के विद्याधर का रास्ता स्थित पुरानी हवेली की खुदाई में निकली चांदी की सिल्लियों का रहस्य और गहरा गया है। जांच में आया है कि बरामद सिल्लियों पर लगी मुहर 170 साल पुरानी है। यह मुहर आजादी से पहले इंग्लैंड में लंदन बैंक की है।

इससे अनुमान है कि सिल्लियां 1855 से 1860 के बीच की हैं। मामले की शुरुआत हवेली की खुदाई में चांदी मिलने के बाद हुई थी। बापू नगर निवासी राहुल सेठी ने मामला दर्ज कराया था। पुलिस ने जांच के बाद मंडी खटीकान निवासी महेश मल्होत्रा, जगदीश राजोरिया, ओमप्रकाश खींची, रजनी मल्होत्रा और लक्ष्मीनारायणपुरी निवासी अनुज अरोड़ा को गिरफ्तार किया था। 70 किलो की चांदी की दो सिल्लियां बरामद हुई थीं। पूछताछ के बाद पुलिस को पांच किलो की एक और सिल्ली मिली है।

पुलिस के अनुसार आरोपी जगदीश ने पुराने चांदी के सिक्के एक ज्वैलर से गलवाकर सिल्ली बनवाई थी। पुलिस ने 15 पुराने सिक्के बरामद किए हैं। इस तरह हवेली से निकले खजाने की कहानी में दो दौर की चांदी सामने आई है। एक 170 साल सिल्लियां और दूसरी तरफ सिक्कों को गलाकर तैयार कराई सिल्ली। पुलिस यह पता लगाने में जुटी रही कि हवेली में मूल रूप से कितनी चांदी निकली और उसका कितना हिस्सा अलग-अलग लोगों तक पहुंचा।

पुलिस का कहना है कि हवेली मालिक ने कीमती सामान चोरी का मामला दर्ज कराया था। जांच में चांदी की सिल्लियां बरामद कर ली। अब कोर्ट तय करेगा कि मालिक कौन?

ठेकेदार के घर हुआ था बंटवारा, एक मजदूर को कम मिला तो खोला था राज हवेली तोड़ने वाला ठेकेदार महेश खुदाई में मिले चांदी के सिक्के ले गया था। काम में ठेकेदार सहित 5 लोग थे। सभी को 300-300 सिक्के मिले। महेश मल्होत्रा उर्फ छोटू ने मजदूर अनुज के साथ सिक्कों को गला दिया फिर 9 लाख में बेच दिया। दूसरे मजदूर जगदीश ने सिक्के बेचकर बेटी की शादी कर दी। तीसरे मजदूर ओमप्रकाश ने 4.5 लाख रुपए का कर्ज उतार दिया। ज्वेलर्स के पास सिक्के बेचने गया। लेकिन किसी ने नहीं खरीदा। पैसे खत्म होने पर रामगंज स्थित शराब की दुकान पर पहुंचा। सेल्समैन को चांदी का एक सिक्का देकर शराब की बोतल खरीदी। पुलिस को 12 के सिक्के मिले।

पुलिस परिवादी की रिपोर्ट पर चोरी का सामान जब्त करती है तो कोर्ट उसे प्राप्त कर सकते हैं। लेकिन जमीन, नींव या दीवार में छिपी मिली मूल्यवान वस्तु के मामले में सुपुर्दगी का अधिकार कलेक्टर द्वारा अपनाई जाने वाली प्रक्रिया से तय होगा। कलेक्टर को देखना होगा कि संपति 100 वर्ष से अधिक समय से छुपी हुई या नहीं एवं ऐसी संपत्ति के संबंध में भारतीय खजाना अधिनियम-1878 के प्रावधान लागू होंगे।-दीपक चौहान, अधिवक्ता हाई कोर्ट