कोटा- बागी की मदद से बन सकती है शहरी सरकार: वोट प्रतिशत लगभग पिछले चुनाव जैसा; 12 साल बाद 67% मतदान, बड़े चेहरों में कांटे की टक्कर - Kota News

Published on 11 सित॰ 2026

कोटा नगर निगम के चुनाव में 373 प्रत्याशियों की किस्मत ईवीएम में कैद हो गई है। शहर की सरकार तय करने के लिए इस बार 67.66% वोटिंग हुई है। वोट प्रतिशत लगभग पिछले चुनाव जैसा पिछले है। वोटिंग प्रतिशत ने दोनों प्रमुख दलों की धड़कनें बढ़ा दी है। दोनों ही पार्ट

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हालांकि 14 सितंबर को परिणामों के बाद तस्वीर साफ हो जाएगी। कोटा में साल 2014 में सबसे ज्यादा 67 प्रतिशत वोट पड़े थे। सम्भवतया वोटिंग प्रतिशत बढ़ने का कारण मोदी लहर का असर था।

कोटा में मतदान की रफ्तार शुरू से ही धीमी रही। सुबह 10 बजे तक पहले 3 घंटे में 18% मतदान हुआ। इसके बाद अगले 3 घंटे (1 बजे तक) में 20% बोट पड़े। दोपहर 1 से 3 बजे के बीच 12% ही मतदान हुआ। दोपहर 3 से शाम 6 बजे तक 16 % मतदान हुआ।

दोनों प्रमुख दलों की टीमों ने वोटर्स को घर निकालने में पूरी ताकत झोंक दी। पिछली बार के मुकाबले वोटिंग प्रतिशत नहीं बढ़ना, दोनों दलों की चिंता बढ़ा रहा हैं।

साल 2020 से अलग स्थिति

हालांकि पिछले बार (2020) के चुनाव के मुकाबले इस बार स्थिति अलग है। पिछली बार उत्तर व दक्षिण निगम में कुल 150 वार्ड थे। साल 2025 में कैथून नगर पालिका व आसपास के गांव शामिल होने से नगर निगम सीमा का विस्तार हुआ। लेकिन निगम एक हो गया। परिसीमन के बाद वार्ड 100 हो गए। जबकि करीब डेढ़ लाख वोटर बढ़ गए। पिछली बार कोटा में दो नगर निगम थे। दोनों में 65% से ऊपर मतदान हुआ था।

कोटा नगर निगम के क्षेत्र में देश व प्रदेश के कई बड़े नेताओं का वोट यहीं डला है। इनमें प्रमुख रूप से लोक सभा स्पीकर ओम बिरला, शिक्षा मंत्री मदन दिलावर, ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर, कोटा उत्तर विधायक व पूर्व यूडीएच मंत्री शांति धारीवाल, प्रहलाद गुंजल सहित अनेक पार्टी व संगठन के नेता शामिल हैं। दोनों ही दल मेयर की कुर्सी के लिए रणनीति बना रहे हैं।

पिछली बार कोटा दक्षिण में किंग मेकर बने थे निर्दलीय

साल 2020 में दोनों निगमों में 150 वार्ड मेंसे 17 निर्दलीय जीते थे। कोटा उत्तर में 9 व दक्षिण में 8 निर्दलीय जीते थे। कोटा उत्तर में कांग्रेस को बंपर जीत मिली। आसानी से मेयर बनाया। लेकिन दक्षिण में कांग्रेस व बीजेपी को 36-36 वार्डो में जीत मिली। सत्ता की चाबी निर्दलीयों के हाथ में रही। कांग्रेस ने निर्दलीयों की मदद से मेयर के पद पर कब्जा किया था।

इस बार भी दोनों दलों के बागियों ने ताल ठोकी। वोटिंग से पहले ही कांग्रेस व बीजेपी बागियों को मनाने में जुट गई थी। दोनों पार्टियों ने बागियों की रिपोर्ट प्रदेश मुख्यालय भेज दी। लेकिन कांग्रेस व बीजेपी ने बागियों के खिलाफ कोई एक्शन नहीं लिया। इस चुनाव में भी दोनों ही दलों के बागी मैदान में डटे रहे। कड़ी टक्कर दी। बीजेपी के कुछ बड़े चेहरों की सीट फंसी हैं। वोटिंग ट्रेंड को देखने से ऐसा लगता है कि इस बार मुकाबला कांटे का हैं। हालांकि पिछले बार के मुकाबले इस बार निर्दलीयों की संख्या कम रह सकती हैं।

कोटा में 4 बार भाजपा, 2 बार कांग्रेस का कब्जा

कोटा नगर निगम में अब तक के इतिहास में ज्यादातर मेयर बीजेपी के खेमें के रहे हैं। 1994 से 2020 तक 4 बार मेयर की कुर्सी पर भाजपा का कब्जा रहा। जबकि साल 2009 व साल 2020 में ( कोटा उत्तर व कोटा दक्षिण ) में कांग्रेस के मेयर बने। लोकसभा चुनाव से पहले कोटा दक्षिण के मेयर बीजेपी में शामिल हो गए। कोटा दक्षिण मेयर पद पर बीजेपी का कब्जा हो गया।

इस बार कोटा में मेयर हाईब्रिड सिस्टम से भी बनाया जा सकता है, यानी पार्षद का चुनाव लड़े बिना भी मेयर का नाम सामने आ सकता है। एक प्रमुख दल में ओबीसी वर्ग से जुड़े नेता की पत्नी का नाम चर्चाओं में हैं।

कांग्रेस से मेयर की दौड़ में 5 प्रमुख दावेदार

कांग्रेस में अमोलक देवी, देवबाई गुर्जर, आईना महक, सीमा यादव व सविता सुवालका मेयर पद की दौड़ में हैं। अमोलक देवी ( वार्ड 57) 2004 और 2009 में पार्षद रह चुकी हैं। साल 2020 में मामूली मतों से हारने के बाद भी मनोनीत पार्षद बनाया। अब चौथी बार मैदान में हैं। आईना महक (वार्ड 6) कैथून नगरपालिका की पूर्व चेयरपर्सन रही हैं। विधायक प्रत्याशी नईमुद्दीन गुड्डू गुट से हैं। देवबाई गुर्जर (वार्ड 2) पूर्व पार्षद धनराज चाची की पत्नी है। प्रहलाद गुंजल गुट की समर्थक हैं। पार्टी गुर्जर समाज के बड़े ज़नाधार को साधकर कर मेयर पद पर दाव खेल खेलती है तो देवबाई की दावेदारी मजबूत होगी। सीमा यादव (वार्ड 84,)पूर्व पार्षद एडवोकेट ज्ञान यादव की पत्नी हैं। एम.ए., बी.एड. तक पढ़ी-लिखी हैं। सविता सुवालका (वार्ड 71) पूर्व पार्षद राजेंद्र सुवालका की पत्नी और पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष व कांग्रेस नेता रामेश्वर सुवालका की भाभी हैं। परिवार का राजनीतिक रसूख ताकत है। कोटा उत्तर विधायक शांति धारीवाल खेमें से हैं।

भाजपा की 5 प्रमुख दावेदार

सीमा चौधरी (वार्ड 83)- लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला इसी वार्ड से हैं। पति धीरेंद्र चौधरी पूर्व पार्षद रहे हैं। बिरला के नजदीकी रणनीतिकारों में है। अनुसुइया गोस्वामी (वार्ड 98,) संगठन में कई अहम पदों पर जिम्मेदारी संभाल चुकीं हैं। वे लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला की भरोसेमंद मानी जाती हैं। प्रतिभा सुमन (वार्ड 64) इनकी सास और ससुर दोनों पार्षद रह चुके हैं। पति पुलिस में हैं। लाड़पुरा क्षेत्र में प्रभावशाली माली समाज को साधने के लिहाज से पार्टी इन पर दांव खेल सकती है।

पुष्पा चौधरी (वार्ड 87) पिछले कार्यकाल में पार्षद रह चुकी हैं। इनके पति देवेंद्र चौधरी दो बार पार्षद रहे हैं। इस बार महापौर बनने के लिए चुनावी मैदान में हैं। बिरला परिवार के नजदीकी माने जाते हैं। दीपा आर्य (वार्ड 77) पहली बार चुनावी मैदान में हैं इनके पति आत्मदीप आर्य सर्राफा बोर्ड व्यापार संघ के अध्यक्ष हैं। जिलाध्यक्ष के नजदीकियों में इनकी गिनती होती है।

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