पंजाब में सेप्सिस और सेप्टिक शॉक को लेकर सरकार अलर्ट, 12 हजार से ज्याजा मरीजों पर खर्च हुए 51 करोड़ रुपये

Published on 1 सित॰ 2026

पंजाब की मुख्यमंत्री सेहत योजना ((Mukh Mantri Sehat Yojana) ) के तहत 1 सितंबर तक सेप्सिस और सेप्टिक शॉक के 12,467 उपचार दर्ज किए गए हैं. बताया जा रहा है कि इन पर 51.58 करोड़ की राशि खर्च हुई है. इनमें से सीवियर सेप्सिस के 10,961 उपचारों पर 44.33 करोड़ वहीं सेप्टिक शॉक के 1,506 उपचारों पर 7.25 करोड़ खर्च हुए है. यह आंकड़ा इस स्थिति से जुड़े चिकित्सा और वित्तीय बोझ, दोनों को दर्शाता है.

अमेरिका के सेंटर्स फॉर डिजीस कंट्रोल एंड प्रिवेंशन(CDC) के मुताबिक सेप्सिस संक्रमण के प्रति शरीर की अत्यधिक प्रतिक्रिया है, जो तेज़ी से ऊतकों (टिश्यूज) को नुकसान पहुंचाती है. इससे शरीर के अंग काम करना बंद कर सकते हैं, वहीं यह मौत का कारण भी बन सकती है. लगभग किसी भी प्रकार का संक्रमण सेप्सिस को ट्रिगर कर सकता है. फेफड़ों, यूरिनरी ट्रैक्ट, त्वचा और गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल ट्रैक्ट के संक्रमण इसके सामान्य स्रोतों में शामिल हैं.

शरीर के अंगों में पड़ता है असर

सेप्सिस केवल एक संक्रमण नहीं है. जब संक्रमण के प्रति शरीर की प्रतिक्रिया अनियंत्रित हो जाती है, तो अंगों के कामकाज में गड़बड़ी शुरू हो सकती है. गंभीर मामलों में रक्तचाप कम होने और रक्त प्रवाह पर्याप्त न रहने की स्थिति सेप्टिक शॉक में बदल सकती है.

धीरे-धीरे गंभीर रूप लेता है

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने समय पर पहचान के महत्त्व पर जोर देते हुए कहा ‘सेप्सिस धीरे-धीरे अधिक गंभीर रूप ले सकता है. जब इसके कारण रक्त संचार संबंधी गंभीर समस्याएं उत्पन्न होती हैं और महत्त्वपूर्ण अंगों तक पर्याप्त रक्त प्रवाह नहीं पहुंचता तो मरीज सेप्टिक शॉक की स्थिति में पहुंच सकता है’.

गहन चिकित्सा की जरूरत

सेप्टिक शॉक से पीड़ित मरीजों को गहन चिकित्सा देखभाल, इंट्रावेनस फ्लूइड्स, एंटीबायोटिक्स, रक्तचाप को बनाए रखने वाली दवाएं , ऑक्सीजन या मैकेनिकल वेंटिलेशन और कुछ मामलों में काम करना बंद कर रहे अंगों के लिए सहायक उपचार की आवश्यकता पड़ सकती है. ऐसे उपचार का खर्च तेज़ी से बढ़ सकता है, जिससे परिवारों के लिए वित्तीय सुरक्षा विशेष रूप से महत्त्वपूर्ण हो जाती है.

10 लाख तक का कैशलेस कवर

मुख्यमंत्री सेहत योजना पात्र परिवारों को प्रति परिवार प्रति वर्ष 10 लाख तक का कैशलेस स्वास्थ्य कवर प्रदान करती है, जिससे गंभीर उपचार के दौरान वित्तीय बाधा को कम करने में मदद मिलती है. इस योजना के तहत सेप्सिस के आंकड़े यह दर्शाते हैं कि जब उपचार की ज़रूरत तेज़ी से बढ़ती है, तब ऐसी वित्तीय सुरक्षा परिवारों के लिए कितनी महत्त्वपूर्ण हो सकती है.

नवजात शिशुओं को ज्यादा खतरा

यह खतरा नवजात शिशुओं में विशेष रूप से गंभीर होता है. गुरु गोबिंद सिंह मेडिकल कॉलेज, फरीदकोट के बाल रोग विभाग के प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष डॉ. शशि कांत धीर ने कहा कि नवजात शिशु के व्यवहार में होने वाले मामूली बदलावों को भी नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए.उन्होंने कहा ‘नवजात शिशुओं में व्यवहार में छोटा-सा बदलाव भी एक महत्त्वपूर्ण चेतावनी संकेत हो सकता है’. उन्होंने बताया कि समय से पहले जन्मे और कम वजन वाले शिशुओं की स्थिति कुछ ही घंटों में तेज़ी से बिगड़ सकती है.

ये लक्षण दिखने पर इलाज जरूरी

दूध पीने/पोषण लेने में कमी, असामान्य रूप से अधिक नींद आना, शरीर का ठंडा महसूस होना और सांस लेने में बदलाव नवजात शिशु में गंभीर बीमारी के संकेत हो सकते हैं और ऐसी स्थिति में तत्काल चिकित्सकीय जांच आवश्यक है. ताकि समय रहते इलाज हो सके.

एंटीबायोटिक्स से बढ़ सकता है खतरा

जब बैक्टीरियल संक्रमण की आशंका हो या इसकी पुष्टि हो जाए, तब एंटीबायोटिक्स आवश्यक होते हैं, लेकिन इनका अनुचित इस्तेमाल एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस को बढ़ावा दे सकता है. बिना चिकित्सकीय सलाह के एंटीबायोटिक्स लेना, बची हुई एंटीबायोटिक दवाओं का इस्तेमाल करना या उपचार बीच में रोक देना संक्रमण का इलाज मुश्किल बना सकता है.

चिकित्सकीय सहायता लेना जरूरी

सेंटर्स फॉर डिजीस कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (CDC) के अनुसार, भ्रम की स्थिति, सांस लेने में कठिनाई, अत्यधिक दर्द या बेचैनी, बुख़ार या शरीर का असामान्य रूप से कम तापमान, चिपचिपी त्वचा और तेज हृदय गति ऐसे चेतावनी संकेतों में शामिल हैं, जिनमें तत्काल चिकित्सकीय सहायता लेना जरूरी है.

इलाज और वित्तीय सुरक्षा दोनों जरूरी

इसलिए सेप्सिस से निपटने के लिए दो मोर्चों पर तेज़ी से कार्रवाई ज़रूरी है. समय पर चिकित्सकीय पहचान और उपचार और अत्यधिक स्वास्थ्य खर्च से वित्तीय सुरक्षा. मुख्यमंत्री सेहत योजना के आंकड़े इस स्थिति के वित्तीय बोझ के पैमाने को दर्शाते हैं, जबकि चिकित्सकीय संदेश स्पष्ट है. संक्रमण से पीड़ित मरीज की स्थिति अचानक बिगड़ने पर देरी से इलाज की कीमत केवल पैसे के रूप में नहीं, बल्कि उससे भी अधिक महत्त्वपूर्ण एक जीवन के रूप में चुकानी पड़ सकती है.