Sep 08, 2026 04:39 pm ISTलाइव हिन्दुस्तान, कोलंबो

अल नीनो के कारण श्रीलंका के कई इलाकों में सूखा और गहरा गया है। अधिकारियों ने मंगलवार को बताया कि देश के सात जिलों में 1 लाख 15 हजार से अधिक लोग पीने के पानी की कमी से जूझ रहे हैं।
श्रीलंका में अल नीनो का असर
अल नीनो का असर दिखने लगा है। बढ़ते तापमान और कम बारिश के कारण श्रीलंका के कई इलाकों में सूखा और गहरा गया है। अधिकारियों ने मंगलवार को बताया कि द्वीप राष्ट्र में 1 लाख 15 हजार से अधिक लोग पीने के पानी की कमी से जूझ रहे हैं। मौसम विज्ञान विभाग के महानिदेशक अजीत विजेमन्ना के अनुसार अल नीनो की स्थिति विकसित हो रही है और यह मौजूदा मौसम पैटर्न को और प्रभावित कर सकती है।
आपदा प्रबंधन केंद्र (DMC) के अनुसार, देश के 25 प्रशासनिक जिलों में से सात जिलों में 1,15,586 लोग अल नीनो से जुड़े मौसम पैटर्न से प्रभावित हुए हैं। केंद्र की प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि भीषण गर्मी और बारिश की कमी ने कई क्षेत्रों में पानी की उपलब्धता को गंभीर चुनौती बना दिया है। डीएमसी अधिकारी प्रगीथ दाननसुरिया ने बताया कि फिलहाल 1,15,534 लोग पेयजल संकट से प्रभावित हैं।
जलस्तर में लगातार में गिरावट
सिंचाई अधिकारियों के अनुसार, उत्तर-मध्य अनुराधापुरा जिले में करीब 3500 एकड़-फीट क्षमता वाले एरुवेवा जलाशय का जलस्तर गिरकर लगभग 1000 एकड़-फीट रह गया है। मध्य क्षेत्र के मटाले और पूर्वोत्तर क्षेत्र के नंदिकदल समेत कई इलाकों में जलस्तर में गिरावट दर्ज की गई है। लंबे सूखे का असर अब सिर्फ पेयजल तक सीमित नहीं रहा। जलीय जीवन और वन्यजीव भी प्रभावित हो रहे हैं।
पूर्वोत्तर में स्थित मुल्लैथिवु झील में हजारों छोटी मछलियां मृत पाई गई हैं। अधिकारियों का अनुमान है कि खारे और मीठे पानी के मिश्रण से उनकी मौत हुई। कई इलाकों में प्राकृतिक जल स्रोत सूख रहे हैं, जिससे जंगली जानवर पानी के वैकल्पिक स्रोतों की तलाश में पलायन करने को मजबूर हो रहे हैं।
सूखे से कृषि क्षेत्र सबसे अधिक प्रभावित
सूखे ने कृषि क्षेत्र को भी नुकसान पहुंचाया है। धान, नारियल, केला और अमरूद जैसी फसलें पानी की कमी से क्षतिग्रस्त हुई हैं। किसानों की चिंता बढ़ गई है क्योंकि कई क्षेत्रों में सिंचाई के पारंपरिक स्रोत भी कमजोर पड़ गए हैं। विजेमन्ना ने कहा कि सितंबर के अंत से कुछ बारिश की संभावना है। अगर यह पूर्वानुमान सही रहा तो मौजूदा हालात में कुछ राहत मिल सकती है। फिलहाल प्रशासन प्रभावित जिलों में पानी की आपूर्ति और राहत उपायों पर नजर बनाए हुए है।