Aug 18, 2026 05:40 am ISTलाइव हिन्दुस्तान
मुख्य बातें
- Crude Oil Price: लगभग छह महीने से जारी इस युद्ध ने कच्चे तेल की कीमतों पर गहरा असर डाला है
- ब्रेंट क्रूड ने 100 की गिनती शुरू कर दी है
- तेल की कीमतों में तेजी की मुख्य वजह अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव को लेकर बढ़ती अनिश्चितता है

फिर $100 की ओर चला कच्चा तेल, पेट्रोल-डीजल के सस्ता होने की उम्मीदें टूटीं
पेट्रोल-डीजल के रेट कम होने की उम्मीदों पर पानी फिरता नजर आ रहा है। क्योंकि, ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल के दामों में लगातार तीसरे कारोबारी दिन उछाल जारी रहा। अब यह 90 डॉलर के पार चला गया है। यानी ब्रेंट क्रूड ने 100 की गिनती शुरू कर दी है। तेल की कीमतों में तेजी की मुख्य वजह अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव को लेकर बढ़ती अनिश्चितता है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ किया है कि वे ईरान के साथ हुए समझौते की अवधि बढ़ाने के पक्ष में नहीं हैं, जिससे बाजार में नई चिंताएं पैदा हो गई हैं।
वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड का भाव 85 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार कर गया है। यह पिछले महीने के आखिरी सप्ताह के बाद का सबसे ऊंचा स्तर है। वहीं ब्रेंट क्रूड का भाव 91 डॉलर प्रति बैरल के करीब कारोबार कर रहा है। जून में साइन किया गया समझौता सोमवार को तकनीकी रूप से समाप्त हो गया है और अब इसके आगे बढ़ने को लेकर कोई स्पष्टता नहीं दिख रही है।
होर्मुज स्ट्रेट पर रार जारी
अमेरिका और ईरान के बीच कई मुद्दों पर मतभेद बने हुए हैं, खासकर होर्मुज स्ट्रेट को लेकर। यह रणनीतिक जलमार्ग दुनिया के कुल तेल व्यापार का एक बड़ा हिस्सा संभालता है। ईरान इस महत्वपूर्ण जलमार्ग के प्रबंधन को लेकर ओमान के साथ बातचीत कर रहा है, लेकिन इनमें अमेरिका शामिल नहीं है। इससे क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर चिंताएं और बढ़ गई हैं।
क्या है अमेरिका की रणनीति
अमेरिकी अधिकारियों ने संकेत दिया है कि वे इस संघर्ष को जल्दी खत्म करने की जल्दी में नहीं हैं। ऊर्जा सचिव क्रिस राइट ने फॉक्स न्यूज को बताया कि अमेरिका ईरान के साथ लंबी अवधि की रणनीति अपना रहा है। वहीं अमेरिकी दूत कुशनर ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप किसी भी सौदे को लेकर धैर्य बरतेंगे। इससे साफ है कि अमेरिका फिलहाल सैन्य कार्रवाई के बजाय आर्थिक दबाव के जरिये ईरान को झुकाने की कोशिश करेगा।
युद्ध के छह महीने, तेल की कीमतों पर गहरा असर
लगभग छह महीने से जारी इस युद्ध ने कच्चे तेल की कीमतों पर गहरा असर डाला है। इस साल अब तक क्रूड के दाम करीब 50 फीसदी बढ़ चुके हैं। मध्य पूर्व से ऊर्जा की सप्लाई बाधित हो रही है, जिससे वैश्विक बाजार में तेल की किल्लत महसूस हो रही है। हालांकि, फारस की खाड़ी के उत्पादक देश होर्मुज के रास्ते तेल पहुंचाने में तेजी से माहिर होते जा रहे हैं। सऊदी अरब ने अब होर्मुज के बाहर से भी तेल की खेप उपलब्ध कराना शुरू कर दिया है।
यह संकेत है कि सऊदी अरब संयुक्त अरब अमीरात के रास्ते पर चलते हुए अपने तेल निर्यात को सुरक्षित करने का प्रयास कर रहा है। इससे वैश्विक आपूर्ति पर कुछ राहत मिल सकती है, लेकिन बाजार में अस्थिरता बनी हुई है।
अमेरिका का आर्थिक दबाव और नए प्रतिबंध
अमेरिका ने क्लियर किया है कि वह आर्थिक दबाव के जरिये ईरान को समर्पण के लिए मजबूर करना चाहता है। हालांकि, अमेरिकी नौसेना ईरान के बंदरगाहों की पूरी नाकाबंदी किए हुए है, लेकिन अब सैन्य बल के बजाय आर्थिक प्रतिबंधों पर जोर दिया जा रहा है। ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने हाल ही में कहा कि जल्द ही ऐसे नए उपायों की घोषणा की जाएगी, जो पहले कभी नहीं देखे गए हैं। इससे बाजार में और उथल-पुथल की संभावना बढ़ गई है।
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Drigraj Madheshia
दृगराज मद्धेशिया पिछले 21 वर्षों से पत्रकारिता जगत का एक विश्वसनीय चेहरा हैं। वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' की बिजनेस टीम के एक महत्वपूर्ण सदस्य के रूप में, वे शेयर बाजार, कमोडिटी, पर्सनल फाइनेंस और यूटिलिटी सेक्टर पर अपनी गहरी पकड़ रखते हैं। वह कलम से बाजार की नब्ज टटोलने वाले एक पत्रकार हैं, जो शेयर बाजार से लेकर आपकी जेब (Personal Finance) तक, हर खबर को आसान बनाते हैं। टीवी, प्रिंट और डिजिटल मीडिया के अपने विस्तृत अनुभव के साथ, दृगराज जटिल मार्केट डेटा को आम पाठकों के लिए 'कुछ अलग' और आसान भाषा में पेश करने के लिए पहचाने जाते हैं। उन्होंने अपने करियर में हिन्दुस्तान, सहारा समय, दैनिक जागरण और न्यूज नेशन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। मूलत: उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले के रहने वाले दृगराज मैथ्स बैकग्राउंड होने के कारण डेटा और कैलकुलेशन में माहिर हैं, जो बिजनेस पत्रकारिता के लिए एक बड़ा प्लस पॉइंट है। उन्होंने कॅरियर की शुरुआत गोरखपुर से सहारा समय साप्ताहिक से बतौर फ्रीलांसर की और बहुत ही जल्द सहारा समय उत्तर प्रदेश/उत्तराखंड के हिस्सा बन गए। इसके बाद छत्तीसगढ़ में वॉच न्यूज से जुड़े। टीवी को छोड़ हिन्दुस्तान अखबार के बरेली एडिशन की लॉन्चिंग टीम का हिस्सा बने। साढ़े सात साल की मैराथन पारी के बाद अगला पड़ाव न्यूज नेशन डिजिटल रहा। इसके बाद एक बार फिर हिन्दुस्तान दिल्ली से जुड़े और अब डिजिटल टीम का हिस्सा हैं। और पढ़ें
