बृजेश गंझू के मारे जाने के बाद 10 लाख का इनामी शशिकांत गंझू बना TSPC का नया सुप्रीमो

Published on 21 सित॰ 2026

Chatra News : वाराणसी में टीएसपीसी सुप्रीमो बृजेश गंझू उर्फ गोपाल सिंह भोक्ता के यूपी एटीएस के साथ मुठभेड़ में मारे जाने के बाद प्रतिबंधित नक्सली संगठन तृतीय सम्मेलन प्रस्तुति कमेटी (TSPC) को बड़ा झटका लगा है. बृजेश के खात्मे के बाद 10 लाख रुपये का इनामी शशिकांत गंझू संगठन का नया सुप्रीमो बन गया है. संगठन में सक्रिय बचे प्रमुख कमांडरों में शशिकांत को सबसे अहम माना जा रहा है. अब टीएसपीसी को दोबारा खड़ा करने की जिम्मेदारी उसके कंधों पर आ गई है.

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पलामू के मनातू थाना क्षेत्र के केदल गांव का रहने वाला शशिकांत गंझू लंबे समय से सुरक्षा एजेंसियों के निशाने पर है. झारखंड सरकार ने उस पर 10 लाख रुपये का इनाम घोषित कर रखा है. एनआईए के मामलों में भी वह वांटेड बताया जाता है. पलामू, गढ़वा, लातेहार, चतरा और हजारीबाग समेत झारखंड के कई इलाकों के अलावा उत्तर प्रदेश में भी उसके खिलाफ 50 से अधिक मामले दर्ज होने की बात सामने आई है.

13 बार मुठभेड़ में बच निकला शशिकांत

शशिकांत गंझू का नक्सली सफर 2000 के दशक में शुरू हुआ था. वह पहले माओवादियों के ओए सदस्य के रूप में सक्रिय था. बाद में बृजेश गंझू के संपर्क में आने के बाद टीएसपीसी में शामिल हो गया. पलामू और चतरा का इलाका उसकी गतिविधियों का प्रमुख क्षेत्र रहा है. पुलिस के अनुसार वह अत्याधुनिक हथियार, खासकर एके-47 लेकर चलता है.

2010 के बाद से पुलिस के साथ करीब 13 मुठभेड़ों में उसके बच निकलने की जानकारी सामने आई है. सितंबर 2025 में पलामू के मनातू थाना क्षेत्र के केदल में पुलिस और टीएसपीसी उग्रवादियों के बीच मुठभेड़ हुई थी. इस दौरान शशिकांत बच निकला था, जबकि पुलिस के दो जवान शहीद हो गए थे. यही वजह है कि सुरक्षा एजेंसियों के लिए शशिकांत लंबे समय से चुनौती बना हुआ है.

बृजेश के बाद शशिकांत के हाथों में संगठन की कमान

बृजेश गंझू के मारे जाने के बाद टीएसपीसी के प्रमुख कमांडरों में अब शशिकांत ही सबसे सक्रिय चेहरा माना जा रहा है. संगठन के कई अन्य कमांडर या तो जेल में हैं या सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में मारे जा चुके हैं. हाल में जेल से बाहर आया नथुनी सिंह भी शशिकांत के साथ जुड़ा है. ऐसे में सुरक्षा एजेंसियों को आशंका है कि शशिकांत संगठन के बचे हुए कैडर को एकजुट करने की कोशिश कर सकता है.

झारखंड पुलिस की जांच में शशिकांत के अंधविश्वास से जुड़े होने की बात भी सामने आ चुकी है. पुलिस के अनुसार किसी बड़ी घटना के बाद उसके द्वारा बलि दिए जाने की जानकारी मिली थी. पलामू का केदल इलाका लंबे समय तक उसका सुरक्षित ठिकाना माना जाता रहा है.

यूपी में भी टीएसपीसी कमांडरों पर नजर

टीएसपीसी के कमांडरों की गतिविधियां झारखंड तक सीमित नहीं रही हैं. इससे पहले 2025 में पलामू में सुरक्षा बलों से बच निकला टीएसपीसी कमांडर नगीना उत्तर प्रदेश के वाराणसी इलाके में पकड़ा गया था. बाद में झारखंड पुलिस ने उससे पूछताछ की थी.

पूछताछ में शशिकांत और नगीना के उत्तर प्रदेश में प्रवेश करने से जुड़ी जानकारी भी सामने आई थी. इसी दौरान यूपी एटीएस की कार्रवाई में नगीना पकड़ा गया, जबकि शशिकांत वहां से निकलने में सफल रहा था.

इसके बाद से यूपी पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां टीएसपीसी से जुड़े लोगों की गतिविधियों पर नजर बनाए हुए थीं. इसी बीच वाराणसी में यूपी एटीएस की कार्रवाई में टीएसपीसी सुप्रीमो बृजेश गंझू मारा गया.

अब शशिकांत की तलाश में सुरक्षा एजेंसियां

बृजेश गंझू के एनकाउंटर के बाद अब झारखंड पुलिस के साथ एनआईए और अन्य केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों की निगाहें शशिकांत गंझू पर टिक गई हैं. 10 लाख रुपये के इनामी शशिकांत की गतिविधियों और उसके संपर्कों की जानकारी जुटाई जा रही है. एजेंसियों के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती टीएसपीसी के बचे नेटवर्क को खंगालने के साथ शशिकांत तक पहुंचने की है. बृजेश के बाद संगठन की कमान संभालने वाले शशिकांत पर सुरक्षा एजेंसियों की नजर कितनी कड़ी होती है और उसे कब गिरफ्तार किया जाता है, इस पर सभी की निगाहें टिकी हैं.

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