रायपुर: बस्तर की फूलमती दीदी का कमाल, आधुनिक खेती से उगाईं 10 क्विंटल से ज्यादा सब्जियां

Published on 18 अक्टू॰ 2026

रायपुर: बस्तर की फूलमती दीदी का कमाल, आधुनिक खेती से उगाईं 10 क्विंटल से ज्यादा सब्जियां

18 अक्टूबर 2026, रायपुर: रायपुर: बस्तर की फूलमती दीदी का कमाल, आधुनिक खेती से उगाईं 10 क्विंटल से ज्यादा सब्जियां – छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले के ग्राम ईरिकपाल की फूलमती दीदी ने आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाकर सब्जी उत्पादन में सफलता हासिल की है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) के तहत इंटीग्रेटेड फार्मिंग क्लस्टर (IFC) से जुड़कर वे वैज्ञानिक तरीके से खेती कर रही हैं। मां दंतेश्वरी उमा स्वयं सहायता समूह की सक्रिय सदस्य फुलमती दीदी अब तक 10 क्विंटल से अधिक हरी सब्जियों का उत्पादन कर चुकी हैं। उनकी यह पहल ग्रामीण महिलाओं के लिए आत्मनिर्भरता की मिसाल बन रही है।

मचान विधि और मल्चिंग से बढ़ाया सब्जी उत्पादन

फूलमती दीदी ने तकनीकी मार्गदर्शन के साथ अपने खेत में मचान विधि, मल्चिंग और वैज्ञानिक देखरेख को अपनाया। इन तरीकों की मदद से उन्होंने करेला, तोरई, बरबट्टी, परवल सहित कई तरह की सब्जियों की खेती शुरू की। उनकी बाड़ी में इस समय विभिन्न हरी सब्जियों की अच्छी पैदावार हो रही है। उन्नत कृषि पद्धतियों और मेहनत के चलते अब तक उन्हें 10 क्विंटल से अधिक सब्जियों का उत्पादन मिला है। उनकी उपज की गुणवत्ता और ताजगी के कारण स्थानीय हाट-बाजारों में भी इन सब्जियों की मांग बनी हुई है।

सीधे बाजार में बेच रहीं सब्जियां, मिल रहा उचित मूल्य

फूलमती दीदी खेत से सब्जियों की तुड़ाई के बाद उन्हें क्रेट्स में व्यवस्थित करती हैं और सीधे स्थानीय बाजारों में बिक्री के लिए ले जाती हैं। इससे बिचौलियों पर निर्भरता कम हुई है और उन्हें अपनी उपज का उचित मूल्य मिल रहा है। नवरात्रि और त्योहारी सीजन में ताजी हरी सब्जियों की मांग बढ़ने से उनकी उपज की बिक्री भी अच्छी हो रही है।

समूह से जुड़ने और इंटीग्रेटेड फार्मिंग क्लस्टर के तकनीकी मार्गदर्शन से फूलमती दीदी को खेती की लागत कम करने और उत्पादन बढ़ाने में मदद मिली है। सब्जी की खेती से होने वाली अतिरिक्त आमदनी से वे अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के साथ बच्चों की शिक्षा और पोषण पर भी ध्यान दे रही हैं।

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दूसरी महिलाओं के लिए बनीं प्रेरणा

फूलमती दीदी की सफलता राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन बिहान के तहत महिला स्व-सहायता समूहों और इंटीग्रेटेड फार्मिंग क्लस्टर के माध्यम से किए जा रहे प्रयासों को दर्शाती है। आधुनिक कृषि तकनीकों का उपयोग करके वे खेती को आजीविका का बेहतर साधन बना रही हैं। उनकी उपलब्धि बस्तर के ग्रामीण क्षेत्रों की दूसरी महिलाओं को भी समूहों से जुड़ने, वैज्ञानिक तरीके से खेती करने और अपनी आमदनी बढ़ाने के लिए प्रेरित कर रही है। फुलमती दीदी की कहानी बताती है कि सही तकनीकी मार्गदर्शन, मेहनत और बाजार तक सीधी पहुंच से महिलाएं खेती के जरिए आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकती हैं।

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