भोपाल में शक्कर के बाद अब दालों के भाव बढ़ने लगे हैं। तुवर दाल सितंबर की शुरुआत में ₹111 से बढ़कर ₹130 किलो पहुंच गई। चना, मूंग, उड़द और मसूर के भाव भी बढ़े हैं।
भोपाल के थोक किराना बाजार में त्योहारी सीजन से पहले दालों के भाव बढ़ गए हैं।
- Published: 22 Sep 2026, 01:08 PM IST
- Last Updated: 22 Sep 2026, 01:08 PM IST
भोपाल। त्योहारी सीजन शुरू होने से पहले ही किराना बाजार में महंगाई का असर दिखाई देने लगा है। शक्कर के बाद अब दालों के बढ़ते दाम ने रसोई का बजट बिगाड़ना शुरू कर दिया है। भोपाल के थोक किराना बाजार में तुवर, चना, मूंग, उड़द और मसूर समेत प्रमुख दालों के भाव में तेजी दर्ज की गई है।
सबसे ज्यादा उछाल तुवर दाल में आया है, जो सितंबर की शुरुआत से अब तक ₹111 से बढ़कर ₹130 प्रति किलो तक पहुंच गई है।
एक सप्ताह में तुवर दाल ₹119 से ₹130 पहुंची
भोपाल किराना व्यापारी महासंघ के महामंत्री विवेक साहू के मुताबिक, अच्छे माल की तुवर दाल का भाव करीब एक सप्ताह पहले ₹119 प्रति किलो था, जो अब बढ़कर ₹130 प्रति किलो तक पहुंच गया है। यानी सप्ताहभर में करीब ₹10-11 प्रति किलो की तेजी आई है।
वहीं, 1 सितंबर को तुवर दाल का भाव करीब ₹111 प्रति किलो था। इस लिहाज से सितंबर की शुरुआत से अब तक तुवर दाल करीब ₹19 प्रति किलो महंगी हो चुकी है। दालों की कीमतों में यह तेजी त्योहारी सीजन से पहले उपभोक्ताओं के लिए चिंता बढ़ाने वाली है।
चना, मूंग, उड़द और मसूर के भाव भी बढ़े
दालों में तेजी केवल तुवर तक सीमित नहीं है। चना दाल के भाव में करीब ₹400 प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। 1 सितंबर को चना दाल करीब ₹76 प्रति किलो थी, जो अब बढ़कर ₹80 प्रति किलो हो गई है।
इसी तरह बाजार में अन्य प्रमुख दालों के भाव भी बढ़े हैं।
| दाल | 1 सितंबर का भाव | मौजूदा भाव |
| तुवर दाल | ₹111/kg | ₹130/kg |
| चना दाल | ₹76/kg | ₹80/kg |
| हरी मूंग | ₹85/kg | ₹89/kg |
| मूंग मोगर | ₹91/kg | ₹93/kg |
| उड़द मोगर | ₹102/kg | ₹105/kg |
| मसूर दाल | ₹73/kg | ₹76/kg |
त्योहार और शादियों का सीजन, मांग बढ़ने की उम्मीद
- व्यापारियों के अनुसार दालों में तेजी का प्रमुख कारण मांग और आपूर्ति के बीच बढ़ता अंतर है। गणेश उत्सव के बाद नवरात्रि और दीपावली जैसे बड़े त्योहार आने वाले हैं।
- इसके साथ ही विवाह सीजन भी शुरू होने वाला है। ऐसे में दालों की खपत बढ़ने की संभावना को देखते हुए बाजार में अभी से अग्रिम मांग बन रही है।
- व्यापारी और मिलर्स भी आने वाले दिनों की मांग को देखते हुए स्टॉक तैयार कर रहे हैं। इसका असर बाजार में उपलब्ध माल और कीमतों पर दिखाई दे रहा है।
मंडियों में कम आवक से भी बढ़ा दबाव
- उत्पादक राज्यों की मंडियों में दालों की आवक सामान्य से कम रहने और पुराने स्टॉक में कमी आने से उपलब्धता पर दबाव बढ़ा है।
- नई फसल की पर्याप्त आवक शुरू होने में अभी समय है। ऐसे में मांग बढ़ने और आपूर्ति सीमित रहने से कीमतों में तेजी बनी हुई है।
- व्यापारियों का कहना है कि आने वाले दिनों में नई फसल की आवक और मंडियों में उपलब्ध स्टॉक दालों के भाव की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
मौसम और आयात का भी असर
- दालों की कीमतों में उतार-चढ़ाव के पीछे घरेलू उत्पादन के साथ मौसम की स्थिति भी महत्वपूर्ण है।
- दलहन उत्पादक क्षेत्रों में बारिश, बुवाई और संभावित उत्पादन का असर बाजार पर पड़ता है।
- इसके अलावा भारत की आयात जरूरत के कारण म्यांमार, कनाडा सहित अन्य देशों से आने वाली दालों की कीमत और उपलब्धता भी घरेलू बाजार को प्रभावित करती है।
- अंतरराष्ट्रीय बाजार से आने वाले माल की परिवहन और लॉजिस्टिक्स लागत भी अंतिम कीमत में जुड़ती है।
शक्कर में सरकारी हस्तक्षेप का दिया उदाहरण
दालों की मौजूदा तेजी के बीच विवेक साहू ने हाल में शक्कर के बाजार में आई तेजी का उदाहरण दिया। उनके मुताबिक, शक्कर का भाव एक समय करीब ₹70 प्रति किलो तक पहुंच गया था।
इसके बाद सरकारी हस्तक्षेप और बाजार में उपलब्धता बढ़ाने के प्रयासों से शक्कर का भाव कुछ ही दिनों में करीब ₹52 प्रति किलो तक आ गया।
व्यापारियों का कहना है कि आवश्यक खाद्य वस्तुओं में समय पर पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध कराने से कीमतों पर दबाव कम किया जा सकता है।
इसी तरह दालों के मामले में भी बफर स्टॉक को बाजार में उतारने से तेजी को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है।
नई फसल और सरकारी कदम पर टिकी नजर
फिलहाल तुवर दाल में एक सप्ताह में करीब ₹10-11 और सितंबर की शुरुआत से करीब ₹19 की तेजी के साथ अन्य दालों के बढ़ते भाव ने त्योहारी सीजन से पहले उपभोक्ताओं की चिंता बढ़ा दी है।
अब बाजार की नजर नई फसल की आवक, उपलब्ध स्टॉक और संभावित सरकारी हस्तक्षेप पर है। यही कारक आने वाले दिनों में दालों की कीमतों की दिशा तय करेंगे।