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80s Trend: कुछ यादें पुरानी नहीं होतीं, बस वक्त के साथ थोड़ी धुंधली पड़ जाती हैं. फिर सोशल मीडिया पर कोई तस्वीर, कोई गाना या कोई पुरानी गाड़ी सामने आती है और अचानक लगता है कि जैसे वक्त ने यू-टर्न ले लिया हो. इन दिनों सोशल मीडिया पर चल रहा 80s Trend भी कुछ ऐसा ही है. ब्लैक एंड व्हाइट टीवी का जमाना, कैसेट की आवाज, डेनिम जींस, दूरदर्शन के सामने बैठा पूरा परिवार और सड़कों पर दौड़ती पुरानी विंटेज गाड़ियां, जिन्हें देखकर... महसूस कर मिलेनियल्स का पूरा तबका बड़ा हुआ.

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अगर आप सोशल मीडिया पर एक्टिव हैं तो तय है कि, बीते कुछ दिनों में आप भी अस्सी के इस ट्रेंड से दो-चार हुए होंगे. 80s Trend सिर्फ फैशन, संगीत और फिल्मों तक सीमित नहीं रहा है. भारतीय ऑटोमोबाइल की दुनिया में भी 80 का दशक एक बेहद सुनहरा दौर रहा है, जब सड़क पर दिखने वाली हर गाड़ी अपने आप में एक कहानी हुआ करती थी. आज भले ही ये गाड़ियां सड़क पर नजर नहीं आतीं, लेकिन उनकी यादें अब भी लाखों भारतीयों के जेहन में जिंदा हैं.

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दरअसल, इन गाड़ियों को याद करना सिर्फ ऑटोमोबाइल इतिहास को याद करना नहीं है बल्कि, यह उस भारत को फिर से महसूस करना है, जहां एक स्कूटर पूरे परिवार की सवारी था, एक बाइक नौकरीपेशा नौजवान की आजादी और एक कार पूरे घर की ख्वाहिश थी. 80s Trend ने इसी पुराने भारत की उस खिड़की को फिर से खोल दिया है, जहां गाड़ियों से जुड़े कई किस्से सांस ले रहे हैं, जो बताते हैं कि, किस तरह सड़क पर दौड़ती इन मशीनों ही बदलते भारत के सपनों को पहली रफ्तार दी थी.
आज हम आपको यादों के उसी दुनिया में ले चलेंगे और ऐसी ही कुछ गाड़ियों से रूबरू कराएंगे, जिनके इंजन की धमक आज भी लोगों के सीने में किसी धड़कन की तरह पैबस्त है.

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Mahindra Jeep
महिंद्रा जीप की कहानी आजादी के बाद के उस भारत से शुरू होती है, जहां सड़कें कम और मुश्किल रास्ते ज्यादा थे. दो भाईयों जगदीश चंद्र महिंद्रा और कैलाश चंद्र महिंद्रा ने मलिक गुलाम मुहम्मद (जो बंटवारे के बाद पाकिस्तान गए और तीसरे गवर्नर-जनरल बने) के साथ मिलकर 1945 में महिंद्रा एंड मोहम्मद नाम की कंपनी बनाई. आगे चलकर पार्टिशन के बाद जब गुलाम मुहम्मद भारत छोड़कर चले गए तो कंपनी का नाम बदलकर महिंद्रा एंड महिंद्रा हो गया. (Photo: Mahindra.com)

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महिंद्रा ने 1947 में अमेरिका की Willys Jeep के 75 यूनिट भारत लाकर मुंबई में असेंबल किए और 1949 में देश में पहली इंडिया-मेड Jeep CJ3A तैयार की. इन सभी यूनिट को कम्पलीट नॉक डाउन (CKD) रूट से भारत लाया गया था. ये जीप 2.2-लीटर Go-Devil L-head, 4-सिलेंडर पेट्रोल इंजन से लैस थी, जिसे 3-स्पीड मैनुअल गियरबॉक्स और 2-स्पीड ट्रांसफर केस के साथ जोड़ा गया था. इसकी सबसे बड़ी ताकत छोटा व्हीलबेस, ज्यादा ग्राउंड क्लीयरेंस, मजबूत लैडर-टाइप स्टील चेसिस, फोल्डिंग विंडस्क्रीन और रिमूवेबल कैनवास रूफ थी. (Photo: Mahindra.com)

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आज भारत में SUV का क्रेज देखकर लगता है कि यह ट्रेंड नया है, लेकिन इसकी जड़ें काफी पुरानी हैं. महिंद्रा जीप ने भारतीय सड़कों पर एसयूवी की जो लीक बनाई है, उस पर दौड़कर न जाने कितनी कंपनियों ने अपने हिस्से की कहानियां लिखी हैं. समय के साथ महिंद्रा जीप आम लोगों की जिंदगी का भी हिस्सा बन गई. शहर से लेकर गांव तक जीप लोकप्रिय हुई. ख़ासकर पुलिस फोर्स और आर्मी में जीप का इस्तेमाल लंबे समय तक होता रहा. (Photo: AI Generated)

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Hindustan Ambassador
अगर 80 के दशक की भारतीय कारों की तस्वीर बनाई जाए तो सबसे पहले सफेद रंग की हिंदुस्तान एंबेसडर नजर आती है. भारत में 1957 में शुरू हुआ इसका सफर दशकों तक भारतीय सड़कों पर जारी रहा. सरकारी अधिकारी, बड़े-बड़े राजनेता, कारोबारियों से लेकर आम परिवारों तक हर जगह एंबेसडर का जलवा था. मूल रूप से ब्रिटिश Morris Oxford पर बेस्ड इस कार को जब लॉन्च किया गया था उस वक्त इसकी कीमत तकरीबन 10,000 रुपये थी. (Photo: AI Generated)

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हिंदुस्तान एंबेसडर अपने स्पेसियश केबिन, मजबूत सेमी-मोनोकॉक स्ट्रक्चर और कम्फर्टेबल राइड के लिए मशहूर थी. शुरुआत में इसमें 1.5-लीटर पेट्रोल इंजन का इस्तेमाल हुआ, जबकि आगे चलकर ये कार 1.5 लीटर डीजल इंजन के साथ भी पेश की गई. बाद के मॉडलों में पावर स्टीयरिंग, पावर ब्रेक, रिमोट-शिफ्ट गियर, नई ग्रिल, बॉडी-कलर्ड बंपर और बेहतर इंटीरियर जैसे फीचर्स भी जोड़े गए. तकरीबन 57 सालों के शानदार सफर के बाद मई 2014 को इस कार को आधिकारिक तौर पर डिस्कंटीन्यू कर दिया गया. (Photo: ITG)

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Kinetic Luna
काइनेटिक लूना की कहानी 1972 से शुरू होती है, जब पुणे बेस्ड कारोबारी एच. के. फिरोदिया ने काइनेटिक इंजीनियरिंग की स्थापना की. दरअसल, फिरोदिया एक ऐसी दोपहिया बनाना चाहते थें जो कम कीमत में आम आदमी के दोपहिया के सपने को पूरा कर सके. मूल रूप से इटैलियन मोपेड Piaggio Ciao पर बेस्ड काइनेटिक लुना को जब लॉन्च किया गया उस वक्त इसकी कीमत महज 2,000 रुपये थी और इसका वजन केवल 30 किलोग्राम था. दरअसल, यह मोपेड साइकिल और स्कूटर के बीच का विकल्प थी. इसमें 50cc का इंजन, सेंटर-माउंटेड इंजन लेआउट और पेडल-स्टार्ट जैसे फीचर्स दिए गए थे. (Photo: X/TheKineticIndia)

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पेट्रोल खत्म होने के बावजूद इस मोपेड को पैडल के जरिए चलाया जा सकता था. चूंकि वजन कम था तो इसे चलाना भी आसान था. इसके 16-इंच के पहिए, ट्विन शॉक एब्जॉर्बर और लाइटवेट डिजाइन ने इसे उस समय की सबसे मशहूर टू-व्हीलर बना दिया. लूना में वजन कम रखने के लिए फैन, एयर फिल्टर, साड़ी गार्ड और हेडलैंप जैसे कंपोनेंट में प्लास्टिक का इस्तेमाल भी किया गया था. 80 के दशक में इसकी मांग इतनी बढ़ी कि Kinetic का कारखाना एक दिन में करीब 2,000 लूना बनाने लगा था. (Photo: AI Generated)

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Premier 118 NE
मुंबई के वालचंद ग्रुप ने साल 1964 में प्रीमियर ऑटोमोबाइल के साथ कार बिजनेस में एंट्री की थी. कंपनी ने अपनी पहली कार के तौर पर प्रीमियम पद्मिनी को पेश किया था, जिसने इस ब्रांड को हिंदुस्तान मोटर्स के सबसे बड़े प्रतिद्वंदी के तौर पर खड़ा कर दिया. समय के साथ बाजार और ग्राहकों की पसंद दोनों बदली. अब ग्राहक पद्मिनी और एंबेस्डर से आगे बढ़कर कुछ नया और मॉडर्न चाहिए था. यहीं से शुरू हुई Premier 118 NE की कहानी. (Photo: AI Generated)

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मूल रूप से Fiat 124 पर बेस्ड इस सेडान कार को 1985-86 के आसपास भारतीय बाजार में पेश किया गया था. इसमें Nissan का इंजन लगाया गया था, इसी वजह से इसके नाम में NE यानी निसान इंजन को शामिल किया गया. इसमें 1.2 लीटर का, 4-सिलेंडर, पेट्रोल इंजन दिया गया था, जो करीब 52 bhp की पावर और 81 Nm का टॉर्क जेनरेट करता था. इस इंजन को 4-स्पीड मैनुअल गियरबॉक्स से जोड़ा गया था. (Photo: AI Generated)

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Bajaj Chetak
अगर एंबेसडर उस दौर की 'ड्रीम कार' थी तो बजाज चेतक मिडिल क्लास का सपना था. इसकी एहमियत घर के एक सदस्य जैसी थी. मूल रूप से वेस्पा स्प्रिंट पर बेस्ड बजाज चेतक को 1972 में लॉन्च किया गया था. शुरुआत में इसमें 145cc, 2-स्ट्रोक, सिंगल-सिलेंडर पेट्रोल इंजन दिया गया था. इसमें आज की तरह ऑटोमेटिक ट्रांसमिशन नहीं बल्कि मैनुअल ट्रांसमिशन मिलता था, जिसे हैंडल पर लगे चेंजर से बदला जाता था. जिसके लिए कलाईयों में ताकत के साथ ख़ास ड्राइविंग एक्सपीरिएंस भी चाहिए होता था.(Photo: AI Generated)

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उस वक्त कंपनी ने बजाज चेतक को बेहद यूनिक विज्ञापन के साथ पेश किया, जिसके बैकग्राउंड में ख़ास जिंगल (हमारा बजाज...) बजता था. इस जिंगल उस वक्त की मशहूर विज्ञापन निर्माता एजेंसी लिंटास ने तैयार किया था. इस मशहूर गीत के बोल जयकृत रावत ने लिखे थे और धुन को दिग्गज संगीतकार लुइज़ बैंक्स ने तैयार किया था. समय के साथ ये स्कूटर इतना मशहूर हुआ कि, इसका वेटिंग पीरियड 10 साल तक पहुंच गया था. देश के कुछ हिस्सों में लोग उंची कीमत देखकर भी इस स्कूटर को खरीदने के लिए तैयार थे. (Photo: AI Generated)

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Maruti 800
अस्सी के दशक में भारत तेजी से बदल रहा था. सड़कों पर गाड़ियों की संख्या तो बढ़ रही थी, लेकिन ये हर किसी के बस की बात नहीं थी. इसी दौर में आई मारुति 800. मारुति उद्योग प्राइवेट लिमिटेड द्वारा पेश की इस छोटी कार मिडिल क्लास भारतीय परिवारों के कार के सपने को सच किया. 14 दिसंबर 1983 को लॉन्च हुई इस कार की शुरुआती कीमत करीब 47,500 रुपये थी. इसमें 796cc का तीन-सिलेंडर पेट्रोल इंजन मिलता था, जो करीब 39hp की पावर जेनरेट करता था और इसे 4-स्पीड मैनुअल गियरबॉक्स से जोड़ा गया था. (Photo: AI Generated)

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ये भारत की पहली मॉडर्न हैचबैक थी. जिसमें फ्रंट-व्हील ड्राइव, मोनोकॉक चेसिस, फ्रंट डिस्क ब्रेक, ऑल-सिन्क्रोमेश गियरबॉक्स, ओवरहेड कैमशाफ्ट, इलेक्ट्रिक कूलिंग फैन, फ्लोर-माउंटेड गियरशिफ्ट, बकेट सीट और प्लास्टिक-मोल्डेड डैशबोर्ड जैसे फीचर्स दिए गए थे. इस कार के पहले यूनिट की चाबी तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने स्वंय ग्राहक को सौंपी थी. दिल्ली के रहने वाले हरपाल सिंह इस कार के पहले मालिक थे. (Photo: X/shashankdrives)

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Hero Honda CD100
80 के दशक की सबसे बड़ी ऑटोमोबाइल क्रांतियों में से एक Hero Honda का साथ होना था. साल 1984 में देसी कंपनी हीरो और जापानी टू-व्हीलर कंपनी होंडा की साझेदारी हुई और 1985 में CD100 बाइक की एंट्री ने बाजार की दशा और दिशा दोनों बदल कर रख दी. उस समय भारतीय बाजार में टू-स्ट्रोक मोटरसाइकिलों का दबदबा था, लेकिन CD100 के फोर-स्ट्रोक इंजन और शानदार माइलेज ने इस हर युवा की पहली पसंद बना दिया. (Photo: AI Generated)

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CD100 में 97 सीसी का एयर-कूल्ड, 4-स्ट्रोक, सिंगल-सिलेंडर इंजन दिया गया था, जो 4-स्पीड गियरबॉक्स के साथ आता था. उस समय के हिसाब से इसमें इलेक्ट्रॉनिक इग्निशन, इल्यूमिनेटेड स्पीडोमीटर, न्यूट्रल और फ्लैशर इंडिकेटर जैसे एडवांस फीचर्स दिए गए थे. इसकी फ्यूल एफिशिएंसी के लिए कंपनी ने ख़ास पंच लाइन तैयार की थी, 'फिल इट, शट इट, फॉरगेट इट'. (Photo: ITG)

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Yamaha RX100
यामाहा की रॉकेट कही जाने वाली RX100 की कहानी भारत में 1985 में शुरू हुई, जब जापानी कंपनी यामाहा ने Escorts के साथ साझेदारी में इसे भारतीय बाजार में उतारा. अपने हल्के वजन, तेज पिकअप और खास टू-स्ट्रोक एग्जॉस्ट साउंड (साइलेंस की आवाज) के कारण यह जल्द ही युवाओं की पसंद बन गई. आज भी इस बाइक के फैंस की कमी नहीं है. ऐसे कई लोग हैं जो चाहते हैं कि, ये बाइक एक बार फिर से लॉन्च हो. (Photo: AI Generated)

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Yamaha RX100 में 98cc, एयर-कूल्ड, सिंगल-सिलेंडर, 2-स्ट्रोक पेट्रोल इंजन दिया गया था, जो करीब 11hp की पावर और 10.39Nm टॉर्क जेनरेट करता था. इस इंजन को 4-स्पीड गियरबॉक्स से जोड़ा गया था. करीब 103 किग्रा वजनी इस बाइक में टेलिस्कोपिक फ्रंट फोर्क, पीछे ट्विन शॉक एब्जॉर्बर, स्पोक व्हील और आगे-पीछे ड्रम ब्रेक दिए गए थे. ये बाइक अपने पिक-अप के लिए मशहूर रही है. अपने समय में इस बाइक का इस्तेमाल पुलिसकर्मी भी खूब करते थे. (Photo: ITG)