पानी रूठा, खाद अटकी: प्रदेश को 1.58 लाख मीट्रिक टन डीएपी कम सप्लाई,खरीफ पर दोहरी मार: 12 लाख हेक्टेयर बुआई भी कम - Jaipur News

Published on 9 अग॰ 2026
  • Hindi News
  • Local
  • Rajasthan
  • Jaipur
  • The State Received A 1.58 Lakh Metric Tonne DAP Supply Shortage, A Double Whammy For Kharif Season: Sowing Also Fell Short By 12 Lakh Hectares.

जयपुर38 मिनट पहलेलेखक: श्याम राज शर्मा

  • कॉपी लिंक
प्रदेश में खरीफ फसल की बुआई - Dainik Bhaskar

प्रदेश में खरीफ फसल की बुआई

मानसून के पहले दौर में कमजोर बारिश से प्रदेश के किसान खरीफ की बुआई में पिछड़ गए, अब खाद की किल्लत ने उनकी मुश्किल बढ़ा दी हैं। पिछले साल के मुकाबले इस बार 12 लाख हेक्टेयर कम क्षेत्र में खरीफ फसलों की बुआई हुई है।

पिछले साल 143 लाख हेक्टेयर में बुआई हो चुकी थी, जबकि इस बार केवल 131 लाख हेक्टेयर में ही फसलें बोई जा सकी हैं। मानसून की सक्रियता से प्रदेश के कई इलाकों में बारिश हुई तो किसानों ने दूसरे दौर में 16.60 लाख हेक्टेयर में बिना डीएपी व एनपीके के ही बुआई कर दी। खाद नहीं मिलने से फसलें कमजोर हैं।

वहीं, राजस्थान को आवंटन के बावजूद 1.58 लाख मीट्रिक टन डीएपी नहीं मिला है। प्रदेश को 3.32 लाख मीट्रिक टन डीएपी आवंटित हुआ था, लेकिन अब तक 1.74 लाख मीट्रिक टन ही मिल सका है। आयुक्त कृषि नरेश कुमार गोयल का दावा है कि फिलहाल केवल डीएपी को लेकर दिक्कत है, यूरिया व एनपीके का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है।

अभी प्रदेश में औसत से 11.20% कम बारिश प्रदेश में अब तक औसत 256.24 के मुकाबले 227.54 मिमी बारिश हुई है। यानी 11.20% कम बारिश हुई है। पिछले साल इस अवधि तक 409.09 मिमी बारिश हो चुकी थी।

किसानों के हिस्से की खाद दूसरे राज्यों में डायवर्ट सरकारी आंकड़ों में खाद का स्टॉक पर्याप्त है, लेकिन किसानों तक पहुंचने के बजाय डीएपी व यूरिया दूसरे राज्यों में डायवर्ट होने का आरोप है। कृषि विभाग की सुस्त मॉनिटरिंग के कारण यहां आवंटित खाद उत्तरप्रदेश, मध्यप्रदेश, गुजरात, हरियाणा व पंजाब जा रहा है। कृषि कार्य के लिए आवंटित खाद का कॉमर्शियल उपयोग भी हो रहा है। कृषि विभाग की मॉनिटरिंग में सुस्ती का फायदा दुकानदार और सोसाइटियां उठा रही हैं। किल्लत दिखाकर खाद की कालाबाजारी की जा रही है। प्रदेश में 10 कंपनियां खाद की सप्लाई करती हैं। केंद्र सरकार राज्यवार कंपनियों के हिसाब से खाद का आवंटन करती है।

80% बुआई

  • मानसून की बेरुखी के कारण इस साल लक्ष्य की तुलना में बाजरा, मक्का, धान, ज्वार व दालों की सिर्फ 80% बुआई हुई है।
  • अब यूरिया, डीएपी व एनपीके की किल्लत से फसलें चौपट होने के कगार पर पहुंच गई हैं।

आवंटन से कम पहुंचा यूरिया, डीएपी व एनपीके राजस्थान को यूरिया का 7.18 लाख मीट्रिक टन आवंटन हुआ, लेकिन 6.48 लाख मीट्रिक टन ही सप्लाई हुआ। यानी 70 हजार मीट्रिक टन कम मिला। डीएपी का 3.32 लाख मीट्रिक टन आवंटन था, लेकिन 1.74 लाख मीट्रिक टन ही मिला। एनपीके का 1.39 लाख मीट्रिक टन आवंटन हुआ था, लेकिन 66 हजार मीट्रिक टन ही सप्लाई हुई।

266 रुपए का यूरिया किसान तक पहुंचते 500 का हुआ किसानों का आरोप है कि सरकार यूरिया का पर्याप्त स्टॉक होने का दावा कर रही है, लेकिन जमीनी हकीकत अलग है। 266 रुपए में मिलने वाला यूरिया थोक स्तर पर 400 रुपए तक और किसान तक पहुंचते-पहुंचते 500 रुपए तक बिक रहा है। जरूरत न होने के बावजूद नैनो यूरिया खरीदने के लिए भी किसानों को मजबूर किया जा रहा है।

.